सरकार के सामने चुनौती बना ब्याजमुक्त फसली ऋण, अब 30 सितंबर तक मिलेगा

Nirmal Tiwari Published Date 2019/09/05 03:20

जयपुर: पहले कर्ज माफी के लिए कर्ज लिया और अब मानसून विदाई लेने को है तो किसानों से कहा जा रहा है. थोड़ा इंतजार करो, ऋण सबको मिलेगा..! कर्ज माफी और ऋण वितरण ने सरकार का वित्तीय प्रबंधन कुछ इस कदर बिगाड़ दिया है कि सरकार को सत्ता में लाने वाले किसानों के अब सरकार से ही नाराज होने की आशंका बढ़ गई है. 

कर्ज माफी का लाभ भी सभी किसानों को नहीं मिला: 
कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश के किसानों को कर्ज माफी का वादा किया था. किसानों ने इसे हाथों हाथ लिया और कांग्रेस को प्रदेश की सत्ता तक पहुंचाया भी. वहीं कांग्रेस ने भी अशोक गहलोत के नेतृत्व में सरकार बनाते ही वादा निभाया और किसानों को कर्ज माफी की सौगात दी. अब सवाल उठता है कि राज से किसान खुश है या नाराज..? चारों तरफ से आवाज आएगी कि जिस योजना से कांग्रेस पॉलिटिकल माईलेज लेना चाहती थी वही योजना अब गले की फांस बन गई है. कर्ज माफी के लिए सरकार ने कई विभागों के बजट में कटौती की, भुगतान रोके पर नतीजा...वही सिफर..! आखिर सहकारिता विभाग के माध्यम से सरकार को एनसीडीसी से पांच हजार करोड़ रुपए का 8.65 फीसदी ब्याज पर लोन लेना पड़ा यानी कर्ज माफी के लिए सरकार को कर्ज लेना पड़ा. इतनी जद्दोजहद के बाद भी कर्ज माफी का लाभ भी सभी किसानों को नहीं मिला. 

कांग्रेस के सामने चुनौती बन गया है ब्याजमुक्त फसली ऋण: 
अब निकाय चुनाव के मुहाने पर खड़ी कांग्रेस के सामने चुनौती बन गया है ब्याजमुक्त फसली ऋण..! दरअसल सरकार ने इस बात की घोषणा तो कर दी कि प्रदेश के 20 लाख पुराने और 10 लाख नए किसानों को दस हजार करोड़ रुपए का ब्याजमुक्त फसली ऋण दिया जाएगा लेकिन योजना पूरी करने के लिए धन का सरकार के पास इंतजाम नहीं था. ऋण वितरण कार्यक्रम में देरी हुई, मानसून आ गया...बुवाई शुरू हो गई लेकिन धरतीपुत्रों को ऋण नहीं मिला. आखिर जिला कलक्टर्स ने जब किसानों की नाराजगी और कई जगह कानून व्यवस्था बिगड़ने की बात शासन को बताई तो वित्त विभाग ने 1100  करोड़ रुपए जारी करने की बात कही. लेकिन इसमें से भी महज 500 करोड़ ही जारी किए. इससे एक लाख की जगह बमुश्किल आठ से दस लाख किसानों को 25 हजार से 35 हजार रुपए तक ऋण राशि मिल पाई. अब चूंकि मानूसन विदाई की ओर है और सियासी मजबूरी यह है कि निकाय चुनाव आने वाले हैं. ऐसे में सरकार की पेशानी पर इस बात से बल पड़ गए है कि आखिर किसानों को कैसे साधा जाए.

एनसीडीसी ने दिया पांच हजार करोड़ रुपए का नया ऋण देने का भरोसा: 
अब सरकार ने एनसीडीसी का दरवाजा एक बार फिर खटखटाया है और एनसीडीसी ने पुराना ऋण चुकाने की शर्त पर पांच हजार करोड़ रुपए का नया ऋण देने का भरोसा दिलाया है. अब चूंकि सहकारिता विभाग ने पुराने ऋण के 2350 करोड़ ही चुकाए हैं इसलिए एनसीडभ्सी ने इतनी ही राशि नए सिरे से कर्ज के रूप में देना मंजूर किया है. यह राशि भी तब मिलेगी जब सहकारिता विभाग को मिली वित्तीय मंजूरी को कैबिनेट मंजूर करे. अब हालात बिगड़ते देख सरकार ने ब्याजमुक्त फसली ऋण के लिए अंतिम तिथि 31 अगस्त से बढ़ाकर 30 सितंबर कर दी है. लेकिन अभी भी मूल सवाल यक्ष प्रश्न की तरह अपनी जगह अनसुलझा ही है. देरी से ही पर क्या 30  सितंबर से पहले प्रदेश के 30 लाख किसानों को दस हजार करोड़ रुपए ऋण के रूप में मिल जाएंगे क्या..? जवाब होगा नहीं. अभी एनसीडीसी से 2350 करोड़ मिल जाएंगे वहीं बंट जाएं तो काफी होगा. बहरहाल एक समस्या और खड़ी हो गई है.

भारी मुश्किल में सहकारिता विभाग: 
नाबार्ड ने सहकारिता विभाग को साफ कर दिया है कि जो राशि 30 सितंबर तक किसानों को मिलेगी उस पर ही नाबार्ड 40 फीसदी रीफाइनेंस करेगा. इसका सीधा मतलब है कि सहकारिता विभाग भारी मुश्किल में है और सरकार के सामने भी किसानों की नाराजगी का खतरा है. ऐसे में पैंतरेबाजी से बेहतर होगा शासन कोई ठोस कार्रवाई कर किसानों की नाराजगी बढ़े उससे पहले उनके खाते में ब्याजमुक्त फसली ऋण पहुंचा दे.
 

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