बीकानेर पूर्व में इस बार मुकाबला दिलचस्प

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/11/27 05:32

बीकानेर। बीकानेर पूर्व विधानसभा क्षेत्र भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है। यहां विधायक सिद्धि कुमारी लगातार दो चुनाव जीत चुकी है ऐसे में इस बार कांग्रेस के रणनीतिकार अशोक गहलोत ने अपने कैंप के केएल झंवर पर दाव लगाया है। हालांकि ये बात सही है कि कांग्रेस के टिकट वितरण में जिस तरह की फजीहत हुई उससे कुछ नुकसान भी हुआ है लेकिन फिर भी इस बार बीकानेर पूर्व में कांग्रेस के प्रत्याशी के एल झंवर और सिद्धि कुमारी को टक्कर देते दिखाई दे रहे है।

दरअसल 2008 में डीलिमिटेशन के बाद बीकानेर पूर्व विधानसभा क्षेत्र पश्चिम से अलग होकर एक नया विधानसभा क्षेत्र बना 2008 और 2013 के चुनाव में भाजपा की सिद्धि कुमारी ने कांग्रेस के प्रत्याशियों को तगड़ी पटखनी दी। ऐसे में इस बार कांग्रेस ने भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए वैश्य चेहरे पर दांव लगाया। सियासत में चर्चा इस बात की भी रही कि प्रतिपक्ष नेता रामेश्वर डूडी भी चाहते थे केएल झंवर नोखा से शिफ्ट कर जाए। चतुर व्यापारी झंवर ने भी थोड़ी सी ना नुकुर के बाद हामी भर दी और चुनाव प्रचार में भी जुट गए। लेकिन बी डी कल्ला जैसे दिग्गज नेता को टिकट देनी पड़ी ऐसे एकबारगी झंवर की टिकट काटकर यशपाल गहलोत को टिकट थमा दिया उसके बाद रामेश्वर डूडी की चेतावनी काम आई और केएल झंवर को फिर से कांग्रेस का प्रत्याशी बना दिया। 

झंवर के प्रत्याशी बनने के बाद से ही विधायक सिद्धि कुमारी भी सक्रिय हो गई। अविनाश राय खन्ना जैसे नेताओं ने निर्दलीय पूजा गहलोत को मना भी लिया लेकिन आदर्श शर्मा युधिष्टर सिंह भाटी जैसे भाजपा के बागी सिद्धि कुमारी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। लेकिन जो लोग सिद्धि कुमारी की सियासी समझ पर सवाल उठा रहे थे उनको गलत साबित करते हुए सिद्धि कुमारी ना केवल सक्रिय हो गई अपितू अपने समाज के नाराज लोगों को मनाने की जुगत में भी जुट गई हैं। महिला होने का माइलेज भी सिद्धि कुमारी को मिल रहा है हालांकि वे मानती हैं कि एंटी इनकंबेंसी हैं लेकिन कहती है कि वे फेस करेंगी।
 
इधर सियासत के मंझे हुए खिलाड़ी के एल झंवर भी लगातार लोगो के बीच जा रहे है। कभी नोखा में रामेश्वर डूडी को हरा के चर्चा में आए केएल झंवर को चुनाव लड़ने का महारथी माना जाता है। वे जानते हैं कि उनका मुकाबला ग्लैमर और पूर्व राजघराने की मजबूत प्रत्याशी सिद्धि कुमारी से हैं ऐसे में वे आम आदमी की छवि के सहारे चुनावी वैतरणी पार करने की कोशिश में है। डोर टू डोर संपर्क के साथ साथ साथ उनका माइक्रो चुनाव मैनेजमेंट निश्चित तौर पर भाजपा प्रत्याशी सिद्धि कुमारी के लिए मुश्किल है तो बढा रहा है। हालांकि निर्दलीय प्रत्याशी गोपाल गहलोत की बगावत उनके के लिए भी थोड़ी मुश्किलें पैदा कर रही हैं लेकिन शहर में इस बात की चर्चा भी है कि चुनाव मैदान में डटे रहने के बाद विधायक सिद्धि कुमारी ज्यादा सक्रिय हो चली है। ठेठ लाला की छवि के सहारे आम आदमी को जीतने की जद्दोजहद में केएल झंवर पानी बिजली सड़क जैसे मुद्दों पर बात कर रहे हैं साथ ही साथ बीकानेर पूर्व में नोखा जैसा विकास कराने का दावा भी करते है।

दलित और अल्पसंख्यक वोट बैंक हालांकि कांग्रेस का परम्परागत वोट बैंक माना जाता है लेकिन क्या झंवर के सहारे कांग्रेस स्वर्ण वोट बैंक में सेंध लगा पाएगी ये एक बड़ा सवाल है।

फर्स्ट इंडिया के लिए लक्ष्मण राघव की रिपोर्ट

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