फांसी की धाराओं के साथ जीवाणु के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश, सामने आई दरिंदगी

Nizam Kantaliya Published Date 2019/07/25 09:10

जयपुर: शास्त्रीनगर में मासूम के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में जयपुर पुलिस ने आरोपी सिकंदर खान उर्फ जीवाणु के विरुद्ध पॉक्सो मामलों की विशेष अदालत में 400 पेज का आरोप पत्र पेश कर दिया है. पुलिस ने आरोप पत्र में आरोपी जीवाणु पर मासूम से दुष्कर्म के बाद मारने की नियत से पत्थरों पर पटकने का भी आरोप लगाया है. 

इस मामले को लेकर राजधानी में बना रहा था तनाव: 
राजधानी में 7 साल की मासूम के साथ दुष्कर्म के मामले ने बड़ा तुल पकड़ा था. कई दिनो तक राजधानी में इस मामले को लेकर तनाव भी बना रहा. जयपुर पुलिस ने अब इस मामले में मासूम से दुष्कर्म के आरोपी जीवाणु के खिलाफ आईपीसी की धारा 363, 376, 323, 341 और 376 एबी की धाराओ में ये चालान पेश किया है. आईपीसी की धारा 376 एबी में फांसी का प्रावधान है. आरोप पत्र के अनुसार बिस्किट लेने गई पीड़िता को आरोपी ने रुपए देने का बहाना बनाकर उसे रास्ते में रोककर उसे अपने साथ मोटरसाइकिल से अमानीशाह नाले तक लेकर आया. अमानीशाह नाले में आरोपी जीवाणु ने मासूम के साथ मारपीट करने के बाद दुष्कर्म किया. दुष्कर्म के बाद भी आरोपी ने पीड़िता को मारने के लिए उसे कई बार पत्थरों पर भी पटका. आरोपी ने दुष्कर्म के बाद मासूम को उसके घर के पास छोड़ गया और घटना की जानकारी देने पर गोली मारने की धमकी दी. 

जीवाणु पर कई गंभीर मामलो में भी केस दर्ज है: 
पुलिस द्वारा पेश किये गये आरोप पत्र में जीवाणु की दरिंदगी का भी खुलासा हुआ है. 26 साल के आरोपी जीवाणु को शास्त्री नगर थाने से जुड़े 5 अन्य आपराधिक मामलों में सजा हो चुकी है. जबकि 16 दूसरे मामले लंबित चल रहे हैं. इन मामलो में कई गंभीर केस भी दर्ज है. आरोप पत्र में अभियोजन पक्ष की ओर से 38 गवाहों की सूची पेश की गई है. वही पोक्सो कोर्ट के जज अरूण अग्रवाल ने पुलिस द्वारा पेश किये गये आरोप पत्र पर प्रसंज्ञान लेते हुए चार्ज बहस के लिए 26 जुलाई की तारीख तय की है. पुलिस ने आरोप पत्र में इस केस को रेयरेस्ट आफ द रेयर बताते हुए जीवाण को सेक्सुअल प्रिडेटर बताया है. पुलिस ने जीवाणु को पीडोफाइल बताते हुए उसकी गंदी मानसिकता के लिए समाज में विचरण के अयोग्य मानते हुए फांसी देने के लिए उपयुक्त बताया है.

3 सप्ताह में ही पेश किया चालान: 
जयपुर पुलिस ने इस मामले में तत्परता बरतते हुए 3 सप्ताह में ही चालान पेश कर दिया है. अब इस मामले में स्पीडी ट्रायल की पूर्ण जिम्मेदारी अभियोजन पक्ष पर है कि वो इस मामले में कितने समय में ट्रायल कर आरोपी जीवाणु को सजा दिलाता है.  

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