नई दिल्ली राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बोले- विदेशों से भारत की अमूल्य धरोहरों को वापस लाना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बोले- विदेशों से भारत की अमूल्य धरोहरों को वापस लाना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बोले- विदेशों से भारत की अमूल्य धरोहरों को वापस लाना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है

नई दिल्ली: देश में पर्यटन की दृष्टि से आध्यात्मिक विरासत को फिर से जीवंत करने के प्रयासों की चर्चा करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को कहा कि विदेशों से भारत की अमूल्य धरोहरों को वापस लाना सरकार की प्राथमिकता है.

बजट सत्र के पहले दिन संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने यह बात कही. उन्होंने कहा कि मेरी सरकार, भारत की प्राचीन विरासत को संरक्षित, समृद्ध और सशक्त करना अपना दायित्व समझती है. यह गौरव की बात है कि धौलावीरा की हड़प्पा साइट और तेलंगाना स्थित 13वीं शताब्दी के काकतीय रूद्रेश्वर रामप्पा मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है. उन्होंने कहा कि प्रयागराज कुंभ मेले के बाद यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में कोलकाता की प्रतिष्ठित दुर्गा पूजा को भी शामिल किया गया है. राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार की यह भी प्राथमिकता रही है कि भारत की अमूल्य धरोहरों को देश में वापस लाया जाए. 

 

सौ वर्ष पूर्व भारत से चोरी हुई मां अन्नपूर्णा देवी की मूर्ति को वापस लाकर काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित किया गया है.  दुनिया के अलग-अलग देशों से ऐसी ही कई ऐतिहासिक धरोहरें आज भारत में वापस लाई जा रही हैं. उन्होंने विरासत और पर्यटन का एक-दूसरे से गहरा नाता होने की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि आज एक ओर भारत की आध्यात्मिक विरासत को फिर से जीवंत किया जा रहा है, तो साथ ही तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाएं और इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास भी हो रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार की ‘स्वदेश दर्शन’ एवं ‘प्रसाद’ योजनाएं इसमें बड़ी भूमिका निभा रही हैं. सोर्स- भाषा

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