VIDEO: 21 साल पुरानी लोहा मंडी योजना को लेकर जेडीए का बड़ा कदम, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: 21 साल पुरानी लोहा मंडी योजना को लेकर जेडीए का बड़ा कदम, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: पिछले करीब 21 सालों से लंबित लोहा मंडी योजना को क्रियान्वित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए जयपुर विकास प्राधिकरण ने योजना की भूमि का लैंड यूज चेंज कर दिया है, लेकिन जिस विधिक राय के आधार पर ऐसा किया गया है. उसका असर जेडीए के ऐसे ही दूसरे मामलों पर भी पड़ने के आसार हैं. सीकर रोड स्थित ग्राम ग्राम माचेड़ा में 21 साल पहले जेडीए ने लोहामंडी योजना प्रस्तावित की थी. प्रभावित खातेदारों के साथ मुआवजे के विवाद को लेकर यह योजना क्रियान्वित नहीं की जा सकी.

योजना की भूमि के लैंड यूज़ को लेकर भी तकनीकी अड़चन:
यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल की अध्यक्षता में गठित कैबिनेट एंपावर्ड कमेटी की इस वर्ष 14 फरवरी को बैठक हुई. बैठक में इस विवाद का हल निकालने के लिए मुआवजा बढ़ाने का फैसला किया गया था. मुआवजे का यह विवाद सुलझाया तो जेडीए के जिम्मेदार अधिकारियों का फिर ध्यान आया कि योजना की भूमि के लैंड यूज़ को लेकर भी तकनीकी अड़चन है.

जानिए क्या है पूरा मामला:
-जेडीए रीजन में पूर्व में लागू मास्टर प्लान 2011 के अनुसार लोहा मडी योजना की भूमि का लैंड यूज रीजनल पार्क और आंशिक आवासीय था.
-योजना की 25 हेक्टेयर का लैंड यूज भूमि 5 जुलाई 2003 को बदलकर स्पेशलाइज्ड मार्केट कर दिया गया.
-योजना की अन्य भूमि 132 हेक्टेयर 5 एयर के लैंड यूज़ चेंज के लिए 13 जुलाई 2004 को पहली अधिसूचना भी जारी कर दी गई.
-लैंड यूज चेंज को लेकर आए आपत्ति व सुझाव का निस्तारण करते हुए स्वीकृति के लिए मामला राज्य सरकार को भेजा गया.लेकिन मामले में लैंड यूज चेंज का फाइनल फैसला नहीं हो पाया.
-इसके बाद 6 सितंबर 2011 को जेडीए रीजन का नया मास्टर प्लान 2025 लागू किया गया.
-इस नए मास्टर प्लान में इस भूमि का लैंड यूज आवासीय एवं व्यावसायिक रखा गया.
-गुलाब कोठारी प्रकरण में 12 जनवरी 2017 के हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार किसी भी मास्टर प्लान में अगर कोई भूमि इकोलॉजिकल जोन, इको सेंसेटिव जोन या ग्रीन एरिया के तौर पर चिन्हित की जा चुकी है, उसका लैंड यूज़ नया मास्टर प्लान लागू करके भी नहीं बदला जा सकता.

गुलाब कोठारी प्रकरण में दिए गए आदेश के कारण जेडीए ने लोहामंडी योजना के लैंड यूज चेंज के मामले में अतिरिक्त महाधिवक्ता अनिल मेहता से राय ली. अतिरिक्त महाधिवक्ता अनिल मेहता ने जेडीए को राय दी कि योजना के क्रियान्वयन में गुलाब कोठारी प्रकरण में दिए हाईकोर्ट के आदेश की कोई विधिक बाधा नहीं है. जेडीए मामले में विधि सम्मत प्रक्रिया अपनाते हुए योजना को क्रियान्वित कर सकता है. आपको बताते हैं कि अतिरिक्त महाधिवक्ता अनिल मेहता ने किन बिंदुओं के आधार पर अपनी यह राय दी है और इसका अन्य मामलों में क्या असर पड़ने की संभावना है.

अन्य मामलों में क्या असर पड़ने की संभावना:
-अतिरिक्त महाधिवक्ता अनिल मेहता ने अपनी विधिक राय में कहा है कि पुराने मास्टर प्लान 2011 में जो लैंड यूज़ दर्शित किया गया था उसे जेडीए ने कभी लागू नहीं किया.
-नया मास्टर प्लान 2025 लागू होने से पहले ही योजना के हिस्से की एक भूमि का लैंड यूज विधिक प्रक्रिया अपनाते हुए बदल दिया गया था.
-गुलाब कोठारी प्रकरण में हाईकर्ट का आदेश व्यापक जनहित में मास्टर प्लान में बदलाव की स्वीकृति देता है.
-लोहा मंडी की योजना भी इसलिए प्रस्तावित की गई थी ताकि शहर को यातायात दबाव से मुक्ति दिलाई जाए इस लिहाज से यह मामला व्यापक जनहित का है.
-इस विधिक राय पर राज्य सरकार ने अपनी स्वीकृति दे दी है.
-राज्य सरकार की स्वीकृति के बाद जेडीए ने योजना की 132 हेक्टेयर 5 एयर भूमि का लैंड यूज आवासीय व व्यावसायिक से बदलकर स्पेशलाइज मार्केट कर दिया है.
-इसके लिए जेडीए की ओर से जेडीए एक्ट की धारा 25(1) के तहत फाइनल अधिसूचना भी जारी कर दी गई है.
-इस विधिक राय को मानते हुए पिछले मास्टर प्लान में लैंड यूज रीजनल पार्क होते हुए भी इसे बदल दिया गया है, इसी प्रकार जेडीए से जुडे ऐसे ही अन्य मामलों में भी इस विधिक राय को आधार बनाया जा सकता है.

गुलाब कोठारी प्रकरण में दिए हाईकोर्ट के आदेश के कारण जेडीए कई मामलों में पुराने मास्टरप्लान के अनुसार कार्यवाही कर रहा है. लेकिन लोहा मंडी योजना में अतिरिक्त महाधिवक्ता अनिल मेहता की विधिक राय ऐसे ही दूसरे मामलों में किस प्रकार सहायक होगी, यह तो आने वाला समय ही बताएगा.

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