JDA सरकार और शासन दोनों से भारी, रिंग रोड पर क्लोवर लीफ के लिए जमीन देने से मुकरा

Nirmal Tiwari Published Date 2019/09/16 03:45

जयपुर: JDA इन दिनों सिस्टम यानी सरकार और शासन दोनों से भारी हो गया है. शायद यही कारण है कि सरकार के सशक्त मंत्री शांति धारीवाल के दौरे के बाद भी रिंग रोड को लेकर जेडीए लापरवाह बना हुआ है. सीएस डीबी गुप्ता के आदेश पहले ही जेडीए नकार चुका है. जी हां...रिंग रोड पर क्लोवर लीफ के लिए जेडीए आगरा रोड पर जमीन देने से मुकर गया है. अब एनएचएआई आगारा रोड पर क्लोवर लीफ नहीं बनाएगा. इससे रिंग रोड के औचित्य पर ही सवाल खड़ हो गए हैं.  

रिंग रोड को अहम प्रोजेक्ट:  
रिंग रोड बनाने में जेडीए के नाकाम रहने के बाद पिछली भाजपा सरकार ने रिंग रोड बनाने के लिए केंद्र का दरवाजा खटखटाया था. तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी से रिंग रोड प्रोजेक्ट देने का आग्रह किया था. इसके बाद गड़करी ने प्रोजेक्ट एनएचएआई को दिया. राजधानी जयपुर में स्मार्ट ट्रेफिकिंग शुरू करने और ट्रैफिक कंजेशन को कम करने के लिए रिंग रोड को अहम प्रोजेक्ट माना जा रहा था. एनएचआई ने तय समय में रिंग रोड प्रोजेक्ट की 47  किलोमीटर लंबी स्ट्रैच को पूरा भी कर लिया लेकिन 6 महीने से 810  करोड़ का रिंग रोड खेल मैदान से ज्यादा कुछ नही बन पाया. दरअसल एनएचएआई को रिंग रोड पर ट्रैफिक शुरू करने के लिए अजमेर, आगरा, टोंक रोड पर तीन क्लोवर लीफ बनाने थे. इसके लिए आगरा रोड और अजमेर रोड पर 12-12 हैक्टेयर और टोंक रोड पर 6 हैक्टेयर भूमि की जरूरत है. एनएचएआई इन तीनों जगह भूमि के लिए जेडीए को पिछले एक साल से बार बार कह रहा है लेकिन जेडीए के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी.

आगरा रोड पर जमीन देने से खड़े किए हाथ: 
मंत्री शांति धारीवाल और सीएस डीबी गुप्ता के कहने के बाद कुछ दिन पहले जेडीए ने अजमेर और टोंक रोड पर जमीन मुहैया करवा दी लेकिन प्रोजेक्ट के लिए सबसे अहम आगरा रोड पर जमीन देने से हाथ खड़े कर दिए हैं. आगरा रोड पर जेडीए ने रिलायंस के पेट्रोल पंप की भूमि को अधिग्रहित करने से मना कर दिया है. अब एनएचएआई ने भी जेडीए की लापरवाही सामने आने के बाद टोंक और अजमेर रोड पर ही क्लोवर लीफ बनाने का निर्णय किया है. दोनों का डिजायन फाइनल कर दिया है और करीब 150 करोड़ रुपए के टेंडर एक दो दिन में जारी कर दिए जाएंगे. एनएचएआई के सीजीएम एमके जैन ने बताया कि जेडीए का रुख स्पष्ट नहीं है. जेडीए ने बेवजह प्रोजेक्ट को लटकाने की मंशा बना रखी है. दर्जनों बार पत्र भेजने के बाद भी आगरा रोड पर जमीन नहीं दी. अब दो क्लोवर लीफ तो बन जाएंगे लेकिन आगरा रोड रिंग रोड से कनैक्ट नहीं हो पाएगा. इससे रिंग रोड पर ट्रेफिक टोंक रोड और अजमेर रोड तक तो निर्बाध चलेगा लेकिन आगरा रोड पर आकर गति भी थम जाएगी और कनेक्टिविटी नहीं मिल पाएगी.

बिना क्लोवर लीफ के बढ़ जाएगा दुर्घटना का खतरा: 
उधर सूत्रों का कहना है कि बिना क्लोवर लीफ के दुर्घटना खतरा बढ़ जाएगा इसके लिए जेडीए को जिम्मेदारी लेनी होगी. बहरहाल रिंग रोड प्रोजेक्ट को लेकर जेडीए का रवैया शुरू से ढ़लमुल रहा है. मंत्री और सीएस के कहने के बाद भी जेडीए ने रिंग रोड के क्लोवर लीफ के लिए भूमि न देकर जो दुस्साहस किया है उससे साफ है कि जेडीए के कुछ अफसर भूमि अधिग्रहण में या तो रुचि नहीं दिखा रहे या मिलीभगत करके राजधानी के ड्रीम प्रोजेक्ट के औचित्य को समाप्त करना चाहते हैं. 

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