नई दिल्ली जगदीप धनखड़ बने देश के नए उप राष्ट्रपति, मिले 528 वोट और मार्गरेट अल्वा को मिले 182 वोट 

जगदीप धनखड़ बने देश के नए उप राष्ट्रपति, मिले 528 वोट और मार्गरेट अल्वा को मिले 182 वोट 

जगदीप धनखड़ बने देश के नए उप राष्ट्रपति, मिले 528 वोट और मार्गरेट अल्वा को मिले 182 वोट 

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल जगदीप धनखड़ देश के नए उपराष्ट्रपति होंगे.उन्होंने उपराष्ट्रपति चुनाव में शनिवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के प्रत्याशी के तौर पर विपक्ष की साझा उम्मीदवार मार्ग्रेट अल्वा को पराजित किया. अधिकारियों ने बताया कि धनखड़ को कुल 528 मत मिले, जबकि अल्वा को सिर्फ 182 वोट हासिल हुए.इस चुनाव में कुल 725 सांसदों ने मतदान किया था, जिनमें से 710 वोट वैध पाए गए, 15 मतपत्रों को अवैध पाया गया. अब 71 वर्षीय धनखड़ देश के नए उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति के रूप में एम वेंकैया नायडू की जगह लेंगे.वह भारत के 14वें उपराष्ट्रपति होंगे.नायडू का कार्यकाल 10 अगस्त को पूरा हो रहा है.

नतीजे घोषित होने से पहले ही संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी के आवास के बाहर जश्न शुरू हो गया था.यहीं पर धनखड़ मौजूद थे.राजस्थान के झुंझुनू में भी जश्न मनाया गया, जो धनखड़ का गृहनगर है. चुनाव परिणाम घोषित होने के तत्काल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धनखड़ से मुलाकात कर उन्हें बधाई दी.उपराष्ट्रपति चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत करीब 93 प्रतिशत सांसदों ने मतदान किया, जबकि 50 से अधिक सांसदों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं किया.

मतदान करने के पात्र 780 सांसदों में से 725 ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया.मतदान सुबह 10 बजे शुरू हुआ था और शाम पांच बजे संपन्न हुआ.संसद के दोनों सदनों को मिलाकर कुल सदस्यों की संख्या 788 होती है, जिनमें से उच्च सदन की आठ सीट फिलहाल रिक्त है.ऐसे में उपराष्ट्रपति चुनाव में 780 सांसद वोट डालने के लिए पात्र थे. तृणमूल कांग्रेस अपनी पहले की घोषणा के मुताबिक इस चुनाव से दूर रही, हालांकि, उसके दो सांसदों शिशिर कुमार अधिकारी और दिव्येंदु अधिकारी ने मतदान किया.दोनों सदनों में तृणमूल कांग्रेस के कुल 36 सांसद हैं.साल 2017 में नायडू के निर्वाचन के समय 98.2 प्रतिशत वोट डाले गए थे, जो इस बार के मुकाबले अधिक है.राजनीतिक क्षितिज में पिछले कुछ वर्षों के दौरान धनखड़ के उदय ने बहुत सारे लोगों को आश्चर्य में डाला है.

कभी जनता दल के साथ रहे धनखड़ 2008 में भाजपा में शामिल हुए थे.वह अतीत में अधिवक्ता के तौर पर काम कर चुके हैं.उन्होंने राजस्थान में जाट समुदाय को ओबीसी का दर्जा दिलाने की मांग और ओबीसी से जुड़े कई अन्य मुद्दों की जोरदार ढंग से पैरोकारी की. धनखड़ की उम्मीदवारी की घोषणा करते समय भाजपा ने उन्हें किसान पुत्र बताया था, जिसे किसानों और खासकर जाट समुदाय के बीच एक संदेश देने के प्रयास के तौर पर देखा गया, क्योंकि तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ हुए आंदोलन में इस समुदाय के लोगों ने अच्छीखासी भागीदारी की थी.

धनखड़ 11 अगस्त को शपथ ग्रहण करेंगे. चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद अल्वा ने धनखड़ को बधाई दी और साथ ही उन विपक्षी नेताओं और सांसदों का आभार प्रकट किया, जिन्होंने विपक्ष की साझा उम्मीदवार के तौर पर उनका समर्थन किया था. अल्वा ने ट्वीट किया, धनखड़ के उपराष्ट्रपति निर्वाचित होने पर उन्हें बधाई.मैं विपक्ष के उन सभी नेताओं और सांसदों का आभार जताती हूं, जिन्होंने इस चुनाव में मुझे वोट किया.मैं उन सभी स्वयंसेवियों को भी धन्यवाद कहती हूं, जिन्होने इस छोटे, लेकिन गहन चुनाव प्रचार के दौरान अपनी नि:स्वार्थ सेवा दी.

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