जय नारायण विश्वविद्यालय में जातियां तय करती है छात्रसंघ चुनाव परिणाम

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/08/20 11:44

जोधपुर: जय नारायण विश्वविद्यालय में हर साल जातियों को जोड़कर जीत का जुगाड़ किया जाता है. विश्वविद्यालय के सियासी मुस्तकबिल की रेखाएं खींचने वाली मुख्य जातियां हैं, राजपूत और जाट. छात्रसंघ चुनाव नजदीक हैं और हम आपको बता रहे हैं कि जातिगत समीकरण जीत की बिसात कैसे बिछाते हैं. जातिवाद को बढ़ावा देने का विरोध हर पार्टी और राजनेता करता है. लेकिन जब चुनावों में जीत की बात आती है तो ये सारे दावे खोखले साबित होते हैं. जीत के समीकरण की गणित जातिगत समीकरण पर आकर रुक जाती है. वहीं राजनीति की पहली सीढ़ी छात्रसंघ चुनाव भी जातिवाद से अछूते नहीं रहे हैं. जोधपुर का जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय भी जातिगत समीकरणों से अछूता नहीं रहा है. 

दिग्गज नेता भी चुनाव में पर्दे के पीछे:  
जेएनवीयू छात्रसंघ चुनाव सिर्फ छात्रों का चुनाव नहीं होता है. इसमें छात्र संगठन के अलावा इन संगठनों की सरंक्षक पार्टियों के दिग्गज नेता भी चुनाव में पर्दे के पीछे से अपनी भूमिका निभाते रहे हैं. हम गत 21 छात्रसंघ चुनावों पर नजर डालें तो छात्रसंघ अध्यक्ष पर सिर्फ दो जातियों राजपूत और जाटों का वर्चस्व रहा है. सिर्फ एक बार ब्राह्मण समाज का छात्र छात्रसंघ अध्यक्ष बना है. विश्वविद्यालय दस्तावेजों से मिली जानकारी के अनुसार 1989-90 के छात्रसंघ चुनाव से 2015-16 के छात्रसंघ चुनाव में 12 बार राजपूत उम्मीदवार और 8 बार जाट उम्मीदवार छात्रसंघ अध्यक्ष बना है. 1996-97 में एक बार ब्राह्मण उम्मीदवार अरुण आचार्य छात्रसंघ अध्यक्ष बने थे. जेएनवीयू में सबसे बड़ा वोट बैंक यानी छात्र एससी-एसटी के पढ़ते हैं. 

राजपूत या जाट उम्मीदवार को टिकट: 
वहीं राजपूत और जाट समाज के छात्रों की संख्या एससी-एसटी के मुकाबले कम है. फिर छात्रसंघ अध्यक्ष के लिए एबीवीपी हो या एनएसयूआई, राजपूत या जाट उम्मीदवार को भी टिकट देती रही है. वहीं एपेक्स पैनल में छात्रसंघ अध्यक्ष के साथ वरिष्ठ उपाध्यक्ष, महासचिव, संयुक्त महासचिव के पदों पर दूसरी जातियों के उम्मीदवारों को चुनाव लड़ाया जाता रहा है और दूसरी जाति के उम्मीदवार पैनल में जीत भी दर्ज करते रहे हैं. 

...राजीव गौड फर्स्ट इंडिया न्यूज जोधपुर


 

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