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जयपुर डेयरी की कर्फ्यू ग्रस्त इलाकों में दूध की डोर टू डोर सप्लाई, मई माह में सरस के दूध और अन्य उत्पादों की बिक्री में बढ़ोतरी दर्ज

जयपुर डेयरी की कर्फ्यू ग्रस्त इलाकों में दूध की डोर टू डोर सप्लाई, मई माह में सरस के दूध और अन्य उत्पादों की बिक्री में बढ़ोतरी दर्ज

जयपुर: राजस्थान की जयपुर डेयरी की ओर से कोरोना महामारी के दौरान कर्फ्यू ग्रस्त इलाकों में दूध की डोर टू डोर सप्लाई की जा रही है. शहर के कर्फ्यू ग्रस्त 40 थाना क्षेत्रों में सरस दूध और अन्य दूध उत्पाद डोर टू डोर पहुंचाए जा रहे हैं. जिला प्रशासन के समन्वय से कर्फ्यू ग्रस्त इलाकों में 24 फील्ड स्टाफ बूथों पर सरस दूध की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है.

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सरस दूध डोर टू डोर सप्लाई:
इसके लिए डेयरी प्रशासन ने 4 नोडल अधिकारी लगाए हुए हैं. वही 3 अधिकारी जयपुर दक्षिण, जयपुर पश्चिम और जयपुर पूर्व में नियुक्त किए गए हैं. हालांकि डेयरी की ओर से दूध की सप्लाई दिन में एक बार ही की जा रही है. जयपुर डेयरी के प्रबंध संचालक एके गुप्ता ने बताया कि कर्फ्यू ग्रस्त इलाकों में वर्तमान में एक लाख लीटर से अधिक सरस दूध डोर टू डोर सप्लाई किया जा रहा है.

सप्लाई के लिए एक हेल्पलाइन जारी:
ग्रामीण क्षेत्रों में सरस दूध की निर्बाध सप्लाई के लिए एक हेल्पलाइन जारी की गई है. जिसमें लोग दूध की कमी होने पर फोन नंबर 0141-2713652 पर संपर्क कर सकते हैं. गुप्ता ने बताया कि अप्रैल माह की तुलना में मई माह में सरस के दूध और अन्य उत्पादों की बिक्री में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. दूध की बिक्री में 2.43 प्रतिशत पनीर की बिक्री में 13.32 प्रतिशत दही की बिक्री में 6.43 प्रतिशत लस्सी की बिक्री में 27.72 प्रतिशत श्रीखंड की बिक्री में 17.94 की बिक्री में 22.86 और छाछ की बिक्री में 9.17 प्रतिशत  की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

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जयपुर: राज्य सरकार ने जिस उम्मीद से लॉक डाउन में शराब की दुकान खोलने का जो साहसिक निर्णय लिया था 1 महीने में ही यह निर्णय सरकार की उम्मीदों पर खरा उतरा है. इस 1 महीने की अवधि में प्रदेश में करीब 1000 करोड़ रुपए की शराब बिकी है जिससे सरकार को करीब 400 करोड़ रुपए आबकारी राजस्व के तौर पर मिला है. 

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शराब की दुकान खोलने को लेकर सरकार को आलोचना भी झेलनी पड़ी: 
लॉक डॉन में शराब की दुकान खोलने को लेकर सरकार को आलोचना भी झेलनी पड़ी थी और शुरुआती 2 दिन में जिस तरह से लोग शराब खरीदने के लिए शराब के ठेकों पर टूटकर पड़े उससे भी एक बार सरकार के इस निर्णय को लेकर अलग अलग राय सामने आई थी. कोरोना संकट के चलते केंद्र और राज्य सरकार ने लॉक डाउन की घोषणा की थी इसके बाद प्रदेश में 23 अप्रैल को सभी शराब की दुकानों को तुरंत प्रभाव से बंद कर दिया गया था. लॉक डाउन की अवधि में केंद्र से अपेक्षित मदद न मिलने और राज्य के सभी आर्थिक संसाधन अवरुद्ध हो जाने से सरकार शराब की दुकान खोलने को लेकर पसोपेश में थी. इस दौरान मार्च के अंत में यानी 31 मार्च को वर्ष 2019-20 का आबकारी बंदोबस्त भी समाप्त हो चुका था. 

नए लाइसेंसी भी लाइसेंस फीस जमा कराने से कतरा रहे थे:
अचानक लॉक डाउन में शराब दुकान बंद होने से वित्त वर्ष के अंतिम 8 दिनों में पुराने अनुज्ञाधारियों को भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था. सरकार के सामने चुनौती थी कि 1 अप्रैल से शुरू हुए नए वित्त वर्ष में कैसे नए आबकारी बंदोबस्त को लागू किया जाए. इस दौरान जो सबसे बड़ी समस्या थी वह यह थी कि पुराने अनुज्ञाधारियों से वित्तीय सेटलमेंट भी करना था और नए अनुज्ञाधारियों से लाइसेंस फीस जमा कराने की भी बड़ी चुनौती थी. दरअसल लॉक डाउन के चलते नए लाइसेंसी भी लाइसेंस फीस जमा कराने से कतरा रहे थे. ऐसे में वित्त विभाग के एसीएस निरंजन आर्य, एसएसआर डॉ पृथ्वी और आबकारी आयुक्त बीसी मलिक ने अपनी पूरी टीम के साथ कड़ी मशक्कत की और अधिकतर अनुज्ञाधारियों से लाइसेंस फीस जमा करवाने में सफल रहे. हालांकि अभी भी प्रदेश की होटल, क्लब और resto-bar बंद हैं जिनकी संख्या करीब 1000 है. इनमें से चार सौ से ज्यादा होटल, क्लब और resto-bar ने अभी तक अपने लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं करवाया है. बहरहाल तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए आबकारी विभाग ने अंग्रेजी और देसी शराब के अनुज्ञाधारियों से फीस वसूल कर ली.

करीब 41 दिन बंद रखने के बाद 4 मई को खोली शराब की दुकान:
अब चुनौती इस बात की थी की लॉक डाउन के दौरान शराब दुकानों को कैसे और कब खोला जाए ? लॉक डाउन में करीब 41 दिन बंद रखने के बाद आखिर 4 मई को प्रदेश में शराब दुकानों को खोल दिया गया. इसके लिए बाकायदा गाइडलाइन जारी की गई. सीधे तौर पर अनुज्ञाधारियों को कहा गया कि वे अपनी दुकान पर बैरिकेडिंग कराएं, सोशियल डिस्पेंसिंग की सख्ती से पालना करें, मास्क, दस्ताने, सैनिटाइजर का उपयोग हो और समय सीमा को भी सुबह 10 बजे से रात्रि 8 बजे के स्थान पर सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक ही रखा गया. 4 मई को जैसे ही शराब दुकानों को खोला गया सुरा प्रेमियों का धैर्य का बांध मानो टूट गया और ऐसा महसूस हुआ जैसे उन्होंने शराब दुकानों पर धावा बोल दिया हो. पहले ही दिन आरएसबीसीएल और गंगानगर शुगर मिल के डिपो से करीब 74 करोड रूपए की शराब बेची गई. इसके अगले दिन 59 करोड़ फिर 65 करोड़ की शराब बिकी. पिछले 1 महीने में प्रदेश में करीब 1000 करोड रुपए की अंग्रेजी व देशी शराब लिखी है.

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अब करीब 20 करोड़ से 25 करोड़ रुपए औसतन रोजाना की शराब बिक रही:
इसके बाद स्थिति सामान्य हुई और अब करीब 20 करोड़ से 25 करोड़ रुपए औसतन रोजाना की शराब बिक रही है. गर्मी के चलते वैसे भी इस समय शराब की बिक्री ज्यादा होती है लेकिन पर्यटन स्थल बंद होने से और विदेशी पर्यटकों की आवक लगभग बंद होने से अपेक्षित बिक्री नहीं हो पा रही है. सरकार को शराब दुकान खोलने के 1 महीने के अंदर ही करीब 400 करोड रुपए आबकारी शुल्क के तौर पर राजस्व मिला है. 3 दिन पहले ही राज्य सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर अंग्रेजी व देशी शराब पर प्राकृतिक आपदाओं और मानव निर्मित आपदाओं से निपटने के लिए ₹5 से लेकर ₹30 तक सर चार्ज भी लगाया है. वैसे भी राज्य सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए 12500 करोड रुपए का आबकारी राजस्व का लक्ष्य रखा है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में शराब की बिक्री तो बढ़ेगी ही सरकार के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी. 

सीएम गहलोत के प्रयास लाए रंग, बदलने लगी प्रदेश की औद्योगिक तस्वीर

जयपुर: जीवन के साथ आजीविका भी जरूरी है, यह कहना है मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का. सीएम  गहलोत के प्रयासों के बाद अब प्रदेश की औद्योगिक तस्वीर बदलने लगी है. प्रदेश की अनेक एमएसएमई इकाइयों ने नवाचारों के प्रयोग के साथ उत्पादन शुरू कर दिया और श्रमिकों को भी अब काम मिलने लगा है. 

औद्योगिक गतिविधियां अब फिर से सांस लेने लगी:
दो महीने के लॉकडाउन के दौरान ठप हुई प्रदेश की औद्योगिक गतिविधियां अब फिर से सांस लेने लगी है. राज्य के औद्योगिक परिदृश्य के लिए शुभ संकेत आने लगे हैं और कोटा, भीलवाड़ा, भरतपुर, भिवाड़ी, बीकानेर, चित्तोडगढ़, जोधपुर, जयपुर, अजमेर आदि की अधिकांश बड़ी इकाइयों ने उत्पादन शुरु कर दिया है. सीमेंट, टैक्सटाइल्स, पत्थर, आयल, फूड प्रोसेसिंग, फर्टिलाइजर, केमिकल, ग्लास सहित अनेक बड़ी इकाइयों में उत्पादन शुरु हो गया है.

-लॉकडाउन-1 में 1840 इकाईयां चालू थी, 44 हजार श्रमिक कार्यरत थे
-लॉकडाउन-2 में 6290 इकाईयों में  1 लाख 40 हजार श्रमिक काम कर रहे थे
-लॉकडाउन-3 में 7790 इकाईयां चालू हो गई, 53 हजार मजदूर रोजगार से जुड़े
-लॉकडाउन-4 में 21728 इकाईयां और खुली, 94700 लोग रोजगार से जुड़े
-अब तक 37 हजार 648 इकाईयां प्रदेश में काम कर रही
-3 लाख 33 हजार से अधिक श्रमिक कर रहे हैं काम
-440 से अधिक बड़ी व मेगा इकाईयां शुरू हो चुकी है प्रदेश में

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लॉकडाउन की वजह से परिस्थितियों में आया बदलाव:
मुख्यमंत्री गहलोत ने दो बार औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, उद्योगपतियों व औद्योगिक संगठनों के पदाधिकारियों के साथ मीटिंग करके उनको आश्वासन दिया था कि सरकार उद्योग जगत को हर संभव सहयोग देगी. इसी का असर है कि अब उद्योग जगत में विश्वास जगा है प्रदेश की औद्योगिक गतिविधियां पटरी पर आने लगी है. पूरे प्रदेश की बात करें, तो अब तक 43 फीसदी यूनिट्स शुरू हो चुकी है और 27 फीसदी श्रमिक काम पर लौट आए हैं. एसीएस डॉ. सुबोध अग्रवाल ने लॉक डाउन के कारण परिस्थितियों में बदलाव आया है. उन्होंने अधिकारियों को उद्यमियों के विश्वास पैदा करने, सरकारी पैकेजों का लाभ दिलाने में सहयोग करने और उनसे संवाद कायम रखते हुए प्रदेश के औद्योगिक सिनेरियोें और अधिक बेहतर बनाने के समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए. विभाग ने अब उद्योगों और बाहर से आने वाले स्थानीय श्रमिकों के बीच समन्वय बनाने के निर्देश दिए. इससे स्थानीय श्रमिकों को यहां ही रोजगार मिल सकेगा. राज्य में 80 प्रतिशत से अधिक 547 में से 440 वृहदाकार इकाइयों ने उत्पादन शुरु हो गया है. वहीं करीब 30 फीसदी एमएसएमई इकाइयां उत्पादन कार्य में लग गई है. जापानी जोन में भी 45 में से 38 इकाइयों में उत्पादन होने लगा है.

-वस्त्र नगरी भीलवाड़ा में टैक्सटाइल उद्योग ने रफ्तार पकड़ी
-पाली व बालोतरा में भी उद्योग पटरी पर आने लगे
-मुख्यमंत्री के निर्देश पर सुबोध अग्रवाल ने की वीसी
-उद्योग जगत के साथ मंथन किया एसीएस सुबोध ने
खुद मुख्यमंत्री भी दो बार कर चुके हैं उद्योग जगत से संवाद
-स्थानीय श्रमिकों को रोजगार देने पर दिया जा रहा जोर
-सीएम के निर्देश पर श्रम विभाग भी आंकड़े जुटा रहा
-प्रदेश के श्रमिकों को किया जाएगा स्किल्ड

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जयपुर एयरपोर्ट से आज रहीं 7 फ्लाइट रद्द, स्पाइसजेट की 4, इंडिगो की 2 फ्लाइट रहीं रद्द

जयपुर एयरपोर्ट से आज रहीं 7 फ्लाइट रद्द, स्पाइसजेट की 4, इंडिगो की 2 फ्लाइट रहीं रद्द

जयपुर: जयपुर एयरपोर्ट से फ्लाइट्स का संचालन शुरू हुए 10 दिन बीत चुके हैं और अब हवाई यात्रियों की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है. हालांकि इसके बावजूद रोजाना कई फ्लाइट्स रद्द हो रही हैं. गुरुवार को भी जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 7 फ्लाइट रद्द रहीं. सबसे ज्यादा स्पाइसजेट एयरलाइन की 4 फ्लाइट रद्द रहीं. वहीं इंडिगो एयरलाइन की 2 फ्लाइट और एयर एशिया की 1 फ्लाइट रद्द रही. एयर इंडिया की सभी फ्लाइट्स निर्धारित रूट पर संचालित हुईं. आपको बता दें कि अब कई फ्लाइट्स में यात्रीभार 80 फीसदी से भी अधिक रहने लगा है, ऐसे में आगामी दिनों में फ्लाइट्स की संख्या में और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है.

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ये 7 फ्लाइट रहीं रद्द:
- स्पाइसजेट की सुबह 5:45 बजे सूरत जाने वाली फ्लाइट SG-2763 हुई रद्द
- इंडिगो की सुबह 6:10 बजे बेंगलूरु जाने वाली फ्लाइट 6E-839 हुई रद्द
- इंडिगो की सुबह 6:40 बजे मुंबई जाने वाली फ्लाइट 6E-218 हुई रद्द
- स्पाइसजेट की सुबह 7:20 बजे जालंधर जाने वाली फ्लाइट SG-2750 हुई रद्द
- एयर एशिया की सुबह 9:15 बजे बेंगलूरु जाने वाली फ्लाइट I5-1721 हुई रद्द
- स्पाइसजेट की सुबह 9:45 बजे उदयपुर जाने वाली फ्लाइट SG-6632 हुई रद्द
- स्पाइसजेट की सुबह 11:15 बजे अमृतसर जाने वाली फ्लाइट SG-3522 हुई रद्द

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VIDEO: हाउसिंग बोर्ड का एक और बड़ा धमाका, 11 शहरों में लॉन्च होंगी 17 नई आवासीय योजनाएं

जयपुर: आमजन को आवास उपलब्ध कराने के लिए कमिटेट हाउसिंग बोर्ड ने बुधवार को 11 शहरों में 17 आवासीय योजनाएं लांच करने का बड़ा ऐलान किया है. बोर्ड के कर्मचारियों को बड़ी सौगात देते हुए मुख्यमंत्री राज्य कर्मचारी आवासीय योजना लांच करने का भी फ़ैसला लिया है. हाउसिंग बोर्ड के इतिहास में पहली बार एक साथ इतनी योजनाएं लांच होंगी. 

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बोर्ड अब 11 शहरों में 17 आवासीय योजनाएं लांच करने जा रहा: 
पिछले करीब 1 साल से हर वर्ग के लोगों को मकान उपलब्ध कराने में कई रिकॉर्ड स्थापित कर चुके हाउसिंग बोर्ड ने अब एक बार फिर बड़ा धमाका किया है. हाउसिंग बोर्ड अब 11 शहरों में 17 आवासीय योजनाएं लांच करने जा रहा है. अगले 1 महीने में बोर्ड इन योजनाओं की लांचिंग कर देगा. बोर्ड के 50 वर्ष के इतिहास में पहली बार होगा जब एक साथ बोर्ड इतनी योजनाओं को लांच करेगा. बोर्ड कमिश्नर पवन अरोड़ा ने बताया कि इन योजनाओं में हर वर्ग के लोगों के लिए 11250 आवास उपलब्ध कराए जाएंगे. 

यह योजनाएं जयपुर के सिरोली, महला, वाटिका, शाहपुरा, उदयपुर के दक्षिण विस्तार और देवरी, श्रीगंगानगर के सूरतगढ़, टोंक के निवाई, सिरोही के आबूरोड़, अजमेर के नसीराबाद, किशनगढ़ और डूंगरपुर, बांसवाड़ा में यह आवासीय योजनाएं लांच की जाएंगी. 

हाउसिंग बोर्ड का एक और बड़ा धमाका: 
- बोर्ड के 50 साल के इतिहास में पहली बार लांच होंगी एक साथ इतनी योजनाएं
- जयपुर समेत कई शहरों में अच्छी लोकेशन पर लांच होंगी आवासीय योजनाएं
- आवसों की कीमत भी आमजन की सुविधा के लिहाज से होगी तय
- आर्थिक दृष्टि से कमजोर लोगों को भी मिलेंगे आवास
- योजनाओं में पीएम आवास और सीएम जन आवास योजना का भी मिलेगा लाभ

हाउसिंग बोर्ड ने आज कर्मचारियों को भी बड़ी सौगात दी है. बोर्ड कमिश्नर पवन अरोड़ा ने बताया कि बोर्ड जयपुर के प्रतापनगर में मुख्यमंत्री राज्य कर्मचारी आवसीय योजना भी लांच करने जा रहा है. इस योजना में हर स्तर के कर्मचारी की सुविधा के 674 फ्लैट बनाएं जाएंगे. कर्मचारियों के लिए यह बड़ी सौगात इसलिए भी है क्योंकि कर्मचारियों के संग़ठन ने 27 मई को ही सरकार और बोर्ड को ज्ञापन दे कर योजना लांच करने की मांग की थी. बोर्ड ने एक सप्ताह के अंदर ही उनकी मांग को मानते हुए योजना लांच करने का एलान कर दिया है. 

- सीएम शिक्षक और प्रहरी आवासीय योजना की लोकप्रियता के बाद बोर्ड की एक और बड़ी घोषणा. 
- जयपुर के प्रताप नगर में लांच होगी सीएम राज्य कर्मचारी आवसीय योजना
- 10 लाख 90 हजार रुपये में मिलेगा 632 वर्गफीट में निर्मित 2 बीएचके साइज का फ्लैट
- 15 लाख 70 हजार रुपये में मिलेगा 882 वर्गफीट में निर्मित 2 बीएचके साइज का फ्लैट
- 21 लाख रुपये में मिलेगा 1097 वर्गफीट में बना 3 बीएचके साइज का फ्लैट
- पूर्व में लांच सीएम राज्य सहायक कर्मचारी योजना के आवेदकों को भी किया जाएगा इस योजना में शामिल
- योजना के पास में अच्छे  स्कूल और अस्पताल जैसी सुविधाएं हैं पहले से ही विकसित

10 फीसदी दीजिए और गृह प्रवेश कीजिए योजना को लेकर भी हाउसिंग बोर्ड से अच्छी खबर आई है. बोर्ड कमिश्नर पवन अरोड़ा ने बताया कि योजना में आवास लेने पर किश्तों और ईएमडी पर जीएसटी नहीं देना होगा. वित्त एक्सपर्ट से हुई बातचीत के बाद क्योंकि यह मकान पूर्ण निर्मित हैं इसलिए जीएसटी नहीं देनी होगी. अब इस योजना में लोगों को और भी सस्ती दरों पर आवास उपलब्ध हो सकेंगे. आपको बता दें कि बोर्ड को इस योजना में कुछ ही समय में बहुत भारी रिस्पॉन्स मिला है. 

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कोरोना के प्रभाव के बाद भी बोर्ड की यह ऐतिहासिक घोषणाएं इस बात का प्रमाण हैं कि बोर्ड ने हर वर्ग के लोगों को आवास उपलब्ध कराने की सीएम की मंशा को लेकर तैयारियां पूरी की हुईं हैं. जिस तरीक़े से सीएम शिक्षक और प्रहरी आवसीय योजना का समय पर शिलान्यास कर काम शुरू करा दिया है उस तरह ही इन योजनाओं को भी बोर्ड जल्द ही अमलीजामा पहना देगा. 

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RSS के लघु उद्योग भारती की अनुकरणीय पहल, घर के नजदीक मिलेगा रोजगार

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जयपुर: दो वक्त की रोटी के लिए घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर मजदूरी करने वाले श्रमिक कोरोना काल में अपने गृह राज्यों में वापस तो लौट चुके हैं. लेकिन अब उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है. लॉकडाउन में उद्योग-धंधे बंद होने से दिहाड़ी मजदूरों के लिए खड़ी हुई इस विकट समस्या के समाधान की दिशा में लघु उद्योग भारती ने एक अनूठा प्रयास शुरू किया है. 

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एलयूबी नेशनल डॉट कॉम नामक पोर्टल लॉन्च किया:  
लघु उद्योग भारती ने एलयूबी नेशनल डॉट कॉम नामक पोर्टल लॉन्च किया है. इस पोर्टल पर बेरोजगार लोग अपना रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे. जिनकी योग्यतानुसार स्क्रूटनी के बाद सम्बंधित क्षेत्र में रोजगार मिल सकेगा. 

रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में सराहनीय कार्य: 
पोर्टल का शुभारम्भ मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल, लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री प्रकाशचंद व पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ओपी मित्तल ने आर एस एस के सेवा सदन में किया. डॉ. अग्रवाल ने कहा कि कोरोना संक्रमण के दौर में बड़ी तादात में लोग बेरोजगार हो चुके हैं. रोजगार के अभाव में अनेकों परिवारों को भरण-पोषण बहुत मुश्किल हो गया है. ऐसे में समाज के लोग रोजगारयुक्त हों इसका हरसंभव प्रयास करना सेवा भाव से हम सबकी जिम्मेदारी बनती है. इसके लिए लघु उद्योग भारती ने पोर्टल व मोबाइल एप लॉन्च कर बेरोजगार लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में सराहनीय कार्य शुरू किया है.

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मोबाइल या ई-मित्र से आवेदन किया जा सकता है:
इस दौरान संघ के अखिल भारतीय घुमंतू कार्य प्रमुख दुर्गादास, क्षेत्र प्रचारक निम्बाराम, सेवा प्रमुख शिवलहरी समेत कई कार्यकर्ता दो गज दूरी का पालन करते हुए कार्यक्रम में शामिल हुए. लघु उद्योग भारती के प्रदेशाध्यक्ष घनश्याम ओझा ने बताया कि पोर्टल पर नौकरी, नौकरी देने वाला व स्वरोजगार नाम से तीन श्रेणियां बनाई गई हैं. इनमें मोबाइल या ई-मित्र से आवेदन किया जा सकता  है. आवेदनों की जांच के बाद उन्हें रोजगार देने के लिए सम्बंधित उद्योगों में भेजा जाएगा. उन्होंने बताया कि पोर्टल व एप के माध्यम से कुशल, अकुशल व तकनीकी जानकार लोगों को उनके गृह क्षेत्र में ही काम मिल सकेगा. विभिन्न राज्यों से आ रहे प्रवासी उद्यमी अपने क्षेत्र में ही कोई छोटा मोटा व्यवसाय करना चाहेंगे तो उन्हें स्टार्ट अप में मदद मिलेगी. वहीं उद्यमियों को उनकी मांग के अनुरूप कारीगर, कंप्यूटर ऑपरेटर, ड्राइवर, हैल्पर, मशीन ऑपरेटर, फोरमैन, बाबू, कैटर्स आदि मिल सकेंगे तो इस तरह की श्रेणी के लोगों को अपने घर के आसपास काम मिल सकेगा. 

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फिर बढ़ गई शराब की कीमतें, 5 से 30 रुपए तक कीमतों में बढ़ोतरी

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जयपुर: राज्य सरकार अब प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदाओं की जंग शराब पर लगाकर लड़ने की तैयारी में है. राज्य सरकार ने मंगलवार को एक अधिसूचना जारी कर शराब की विभिन्न किस्म और पैकिंग पर 5रुपए से लेकर 30 रुपए तक की वृद्धि कर दी है. इसका असर उपभोक्ताओं पर मंगलवार से ही पड़ना शुरू हो गया है. राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि सूखा, बाढ़, महामारी जन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं और आगजनी की स्थिति से निपटने के लिए शराब पर सर चार्ज लगाया गया है. जारी अधिसूचना के अनुसार अंग्रेजी शराब के पव्वे पर 5 रुपए, अद्धे पर 5 रुपए और बोतल पर 10 रुपए की वृद्धि की गई है.

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उपभोक्ता के बीच दरों को लेकर गफलत:
इसी तरह ब्रीज़र पर 5 रुपए,  मिनिएचर और अन्य पैकिंग पर 5 रुपए और बीयर की बोतल पर 20 रुपए की वृद्धि की गई है. छोटी बीयर पर 5 रुपए की वृद्धि की गई है. देसी शराब के प्रति पव्वे और राजस्थान निर्मित शराब के प्रति पव्वे पर डेढ़ रुपए सरचार्ज लगाया गया है. आदेश में यह भी कहा गया है कि रिटेलर से यह राशि खरीदारी के समय ही वसूल की जाएगी और रिटेलर इस राशि को उपभोक्ता से वसूलेगा. बड़ी बात यह है कि सर चार्ज की राशि एमआरपी यानी अधिकतम खुदरा मूल्य में शामिल नहीं होगी ऐसे में लाइसेंसी और उपभोक्ता के बीच दरों को लेकर गफलत ही रहेगी. 

खजाना भरने के लिए शराब की दरों में लगातार वृद्धि:
इससे लाइसेंसी और ग्राहक के बीच तनाव बढ़ेगा. ध्यान रहे राज्य सरकार ने बीते वित्त वर्ष में अंग्रेजी शराब की दरों में 4 बार वृद्धि की थी और चालू वित्त वर्ष में दो बार वृद्धि की जा चुकी है. एक साल पहले जो शराब 100 रुपए की मिलती थी उसकी कीमत आज 200 रुपए से ज्यादा हो चुकी है सीधे तौर पर कहा जा सकता है कि राज्य सरकार खजाना भरने के लिए शराब की दरों में लगातार वृद्धि कर रही है. इससे उपभोक्ता को तो अपना शौक पूरा करने के लिए मोटी राशि चुकानी पड़ रही है साथ ही लाइसेंसी के लिए शराब बेचना मुश्किल हो गया है. सूत्रों की मानें तो सरकार शराब की दर बढ़ाकर राजस्व कमाना चाहती है जबकि हो इससे उलट रहा है. शराब की दर बढ़ने से शराब की बिक्री में कमी आई है ऐसी स्थिति में लाइसेंसी के लिए अपने राशि निकालना मुश्किल हो गया है और उपभोक्ता पर भी भार पड़ रहा है.

ढाई महीने के लंबे इंतजार के बाद खुले पर्यटन स्थल, पर्यटन स्थलों पर 524 पर्यटक ही पहुंचे 

ढाई महीने के लंबे इंतजार के बाद खुले पर्यटन स्थल, पर्यटन स्थलों पर 524 पर्यटक ही पहुंचे 

जयपुर: ढाई महीने के लंबे इंतजार के बाद मंगलवार को प्रदेश के स्मारक और संग्रहालयों को पर्यटकों के लिए खोल दिया गया. पहले दिन राजधानी जयपुर में आए 214 पर्यटकों सहित पूरे प्रदेश में स्मारक और संग्रहालय में पर कुल 524 सैलानी पहुंचे इनमें 7 विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं. राजधानी में आज पहुंचे कुल 214 पर्यटकों में से आमेर 82, जंतर मंतर 23, हवा महल 43, अल्बर्ट हॉल 27, नाहरगढ़ 32, सिसोदिया रानी भाग 3, ईसरलाट 4 पर्यटक पहुंचे. 

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एक विदेशी पर्यटक पहुंचा अल्बर्ट हॉल:
जंतर मंतर पहुंचे 4 विदेशी पर्यटक, एक विदेशी पर्यटक पहुंचा अल्बर्ट हॉल और 2 विदेशी पर्यटक मंगलवार को नाहरगढ़ पहुंचे. इसी तरह जयपुर के अलावा शेष राजस्थान में कुल 310 पर्यटक पहुंचे. इनमें अजमेर 33, अलवर 165, उदयपुर 1, चित्तौड़गढ़ 26, पाली 11, कोटा और झालावाड़ 13-13 पर्यटक, गागरोन किला 12, सुख महल बूंदी 10, रानी जी की बावड़ी 14 पर्यटक, 84 खंभों की छतरी दो और बूंदी 10 पर्यटक पहुंचे.

पर्यटन स्थलों की रौनक तेजी से लौटेगी:
पुरातत्व विभाग के निर्देशक प्रकाश चंद्र शर्मा ने बताया कि पर्यटन स्थल खोलने के पहले दिन सैलानियों की सर्वाधिक आमद आमेर में हुई. उम्मीद की जा रही है कि पर्यटकों की संख्या में दिन-ब-दिन इजाफा होगा और पर्यटन स्थलों की रौनक तेजी से लौटेगी.

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जयपुर जंक्शन से गति पकड़ रहा ट्रेनों का संचालन, मुम्बई से 834 यात्रियों के साथ ट्रेन पहुंची जयपुर

जयपुर: जयपुर जंक्शन से ट्रेनों का संचालन अब गति पकड़ रहा है, लेकिन यात्रियों की संख्या के अनुरूप स्टेशन पर पर्याप्त सुविधाएं नहीं रखे जाने से सोशल डिस्टेंसिंग रख पाना संभव नहीं हो पा रहा है. मंगलवार दोपहर में जब स्पेशल ट्रेन मुम्बई से जयपुर पहुंची तो यात्रियों की भीड़ के आगे इंतजाम नाकाफी नजर आए और सोशल डिस्टेंसिंग की पालना नहीं हो सकी. यूं तो देशभर में 200 स्पेशल ट्रेनों का संचालन कल से शुरू हो गया था, लेकिन सही मायनों में जयपुर जंक्शन से ट्रेनों का संचालन मंगलवार से शुरू हुआ है. मंगलवार दोपहर मुम्बई सेंट्रल से स्पेशल ट्रेन जयपुर पहुंची. 

मुम्बई ट्रेन के समय नहीं रखी जा सकी सोशल डिस्टेंसिंग:
यात्रियों की संख्या बहुत अधिक नहीं होने के बावजूद जयपुर जंक्शन पर सोशल डिस्टेंसिंग नहीं रखी जा सकी.दरअसल ट्रेन से उतरते समय यात्रियों के बाहर निकलने के लिए दो निकास द्वार तय किए गए हैं. लेकिन मंगलवार को जब मुम्बई सेंट्रल से दोपहर साढ़े बारह बजे यह ट्रेन जयपुर पहुंची, तो उसी समय इस ट्रेन से मुम्बई जाने वाले यात्री भी स्टेशन पहुंचे हुए थे, ऐसे में यात्रियों का निकास दो के बजाय केवल एक गेट से कर दिया. कॉनकोर्स हॉल वाले निकास द्वार से यात्रियों का निकास नहीं करते हुए केवल एस्केलेटर वाले गेट से ही निकास रखा गया। चूंकि प्रत्येक यात्री की डिटेल वाला डिक्लेरेशन फॉर्म भरवाया जाता है और उसकी स्वास्थ्य जांच भी की जाती है, ऐसे में निकलते समय यात्रियों की जांच में अधिक समय लगा. इस वजह से निकास द्वार पर यात्रियों की कतार काफी अधिक लम्बी हो गई और भीड़ के कारण यात्रियों के बीच 2 फुट की दूरी भी नहीं रखी जा सकी। इसके बावजूद यात्रियों को बाहर निकालने में एक घंटे से ज्यादा समय लगा.

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इस तरह रहा कुछ ट्रेन संचालन
- मुम्बई सेंट्रल से दोपह 12:30 बजे ट्रेन जयपुर जंक्शन पहुंची
- इस ट्रेन से 834 यात्री जयपुर आए, 64 यात्री दुर्गापुरा स्टेशन पर उतरे
- जयपुर से दोपहर 2 बजे स्पेशल ट्रेन मुम्बई के लिए रवाना हुई
- इस ट्रेन से कुल 779 यात्री मुम्बई के लिए रवाना हुए
- मुम्बई से आई ट्रेन में 5 यात्री बगैर मास्क पाए गए, इनके चालान किए
- इन यात्रियों से प्रति यात्री 200 रुपए जुर्माना वसूला गया
- आज अलसुबह अहमदाबाद-दिल्ली आश्रम एक्सप्रेस का आगमन हुआ
- ट्रेन में 126 यात्री अहमदाबाद से जयपुर आए, 132 जयपुर से दिल्ली गए
- जयपुर से जोधपुर गई ट्रेन में 284 यात्री रवाना हुए

यात्रियों की भीड़ बढ़ी, लेकिन एक ही गेट से रखा निकास:
यूं तो रेलवे प्रशासन ने सोशल डिस्टेंसिंग और सेनिटाइजेशन के लिए काफी इंतजाम किए हैं, लेकिन इन्हें और व्यवस्थित किए जाने की जरूरत है. जिस तरह से आज यात्रियों के निकास के समय एक गेट से बाहर निकलते समय परेशानी हुई है, उसे देखते हुए रेलवे प्रशासन को अतिरिक्त इंतजाम करने होंगे. चूंकि मुम्बई सेंट्रल ट्रेन के समय अधिक यात्रीभार रहेगा, और शाम को आश्रम एक्सप्रेस के आगमन के समय भी ज्यादा भीड़ रह सकती है, उस हिसाब से यात्रियों को अधिक सावधानी बरतनी होगी. यात्रियों के स्टेशन से बाहर निकलते समय कॉनकोर्स हॉल स्थित मुख्य निकास द्वार को भी खुला रखना जरूरी होगा. इसके अलावा चिकित्सा टीमों की संख्या में भी बढ़ोतरी करनी होगी. एक विकल्प यह भी हो सकता है कि यात्रियों को डिटेल्स भरने वाले डिक्लेरेशन फॉर्म पहले से मुहैया करवाए जाएं या फिर बोर्डिंग वाले स्टेशन पर ही यात्रियों से डिटेल भरवा ली जाए, अन्यथा निकास के समय भीड़ से इंतजाम और खराब हो सकते हैं. 

...फर्स्ट इंडिया के लिए काशीराम चौधरी की रिपोर्ट

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