VIDEO: फिर निजीकरण की राह पर जयपुर डिस्कॉम, 4 शहरों के बाद अब रूरल फ्रेंचाइजी की कवायद 

Vikas Sharma Published Date 2019/03/19 07:54

जयपुर (विकास शर्मा)। प्रदेश के चार शहरों की बिजली निजी हाथों में देने के बाद अब बिजली कम्पनियां ग्रामीण इलाकों में भी "फ्रेंचाइजी" मॉडल लागू करने की तैयारी में है। जयपुर डिस्कॉम प्रशासन ने इसके लिए फिर से कवायद शुरू की है, जिसमें कोठपूतली सबडिवीजन में "फ्रेंचाइजी" मॉडल लागू किया जाना है। आखिर क्या है फ्रेंचाइजी मॉडल और डिस्कॉम-उपभोक्ताओं पर कैसे आएगा असर, खास रिपोर्ट- 

दरअसल पूर्ववर्ती सरकार ने सत्ता संभालने के साथ ही 80 हजार करोड़ के कर्ज में डूबी बिजली कम्पनियों में निजीकरण पर फोकस शुरू कर दिया था। तीन चरणों की कवायद में विरोध के बीच कोटा, भरतपुर, बीकानेर और अजमेर शहर की बिजली निजी हाथों में देने में ऊर्जा विभाग सफल भी हो गया। इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों के पॉकेट बनाकर यहां की बिजली व्यवस्था को भी अलग-अलग मॉडल पर निजी कम्पनियों को देने की कवायद शुरू की गई, लेकिन पहले किसान और फिर कर्मचारी आंदोलन के चलते यह मामला ठण्डे बस्ते में डाल दिया गया। अब एकबार फिर जयपुर डिस्कॉम प्रशासन ने कोठपूतली सब डिवीजन को "फ्रेंचाइजी" मॉडल पर देने के लिए कवायद शुरू की है। अगर डिस्कॉम अपने प्रयास में सफल रहा तो करीब 25 हजार ग्रामीण उपभोक्ताओं को निजी कम्पनी बिजली देगी। 

एक नजर में कोठपुतली सबडिवीजन:
- चार शहरों के बाद अब ग्रामीण इलाकों की बिजली निजी हाथों में देने की तैयारी 
- जयपुर डिस्कॉम ने फ्रेंचाइजी मॉडल के लिए कोठपूतली सबडिवीजन का किया चयन 
- कोठपूतली सबडिवीजन में फिलहाल करीब 48 फीसदी बिजली जा रही चोरी में 
- कवायद रही सफल तो डिस्कॉम के बजाय निजी कम्पनी देगी यहां उपभोक्ताओं को बिजली 
- सब डिवीजन के चार फीडरों के 25 हजार उपभोक्ताओं पर दिखेगा असर 
- चोरी रोकने से लेकर उपभोक्ताओं की सेवाओं का पूरा जिम्मा संभालेगी निजी बिजली कम्पनी 

डिस्कॉम प्रशासन ने भले ही कोठपूतली सबडिवीजन को "फ्रेंचाइजी" मॉडल पर देने की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन पिछले अनुभवों को देखे तो यह काफी मुश्किल होगा। पिछले सरकार के कार्यकाल में भी ग्रामीण इलाकों के लिए आवेदन मांगे गए थे, लेकिन किसी भी कम्पनी ने प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया। ऐसे में डिस्कॉम की कॉर्डिनेशन कमेटी ने यह तय किया है कि रूरल फ्रेंचाइजी के प्रारूप में कुछ संशोधन किया जाए। ताकि निजी कम्पनियां शहरों की तर्ज पर रूरल फ्रेंचाइजी मॉडल में भी रूचि दिखाए।

बिजली कम्पनियों के इतिहास में यह पहला मौका होगा,जब ग्रामीण इलाके को "फ्रेंचाइजी" मॉडल पर देने के लिए कवायद शुरू की गई है। उद्देश्य सिर्फ एक है कि बिजली आपूर्ति के कामकाज को कॉर्पोरेट रूप में लाया जाए। बिजली चोरी पर अंकुश लगे और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिले। अब देखना ये होगा कि ग्रामीण इलाके में बिजली आपूर्ति और राजस्व वसूली जैसे चुनौतीपूर्ण काम के लिए निजी कम्पनियों को डिस्कॉम कैसे आर्कषित करती है।  
 

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