VIDEO: द्रव्यवती नदी कायाकल्प परियोजना, चुनौतियों से निपटारे के लिए सरकार बनाएगी ठोस कार्ययोजना, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: द्रव्यवती नदी कायाकल्प परियोजना, चुनौतियों से निपटारे के लिए सरकार बनाएगी ठोस कार्ययोजना, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: प्रदेश की राजधानी जयपुर की महत्वाकांक्षी द्रव्यवती नदी कायाकल्प परियोजना तय डेडलाइन गुजरने के करीब 3 साल बीतने के बावजूद भी पूरी नहीं हो पाई है. परियोजना में मुद्दा केवल काम पूरा करने का ही नहीं है, बल्कि नदी में कचरा,गंदगी और प्रदूषित पानी का लगातार प्रवाह जिम्मेदारी एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. इन चुनौतियों से निपटने के लिए मंत्री शांति धारीवाल के निर्देश पर जल्द ही ठोस कार्य योजना बनाई जाएगी. जानिए क्या है पूरा मामला...

पिछली भाजपा सरकार के समय 10 अप्रेल 2016 तक को इस परियोजना का काम शुरू किया गया है. करीब 1676 करोड़ रुपए लागत के इस काम की जिम्मेदारी टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड व शंघाई अरबन कंस्ट्रक्शन ग्रुप के कंसोरटियम को दी गई. इस परियोजना के तहत नाहरगढ़ की पहाड़ियों के आगे से ढूंढ नदी तक 47 किलोमीटर लम्बाई में बहने वाली द्रव्यवती नदी का कायाकल्प किया जाना था. परियोजना का प्रमुख उद्देश्य नदी का बहाव क्षेत्र संरक्षित करना और इसमें स्वच्छ पानी का बहाव सुनिश्चित करना था. परियोजना का काम 10 अक्टूबर 2018 में पूरा किया जाना था. लेकिन अब तक ना तो पूरी लम्बाई में बहाव क्षेत्र संरक्षित हो पाया है और नहीं नदी में साफ पानी बह रहा है. हालांकि इस परियोजना की कार्यकारी एजेंसी जयपुर विकास प्राधिकरण है,लेकिन इसके अलावा भी अन्य सरकारी एजेंसियों की भी इसमें भागीदारी है. 

नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल के निर्देश पर इन सभी जिम्मेदार एजेंसियों के अधिकारियों की प्रमुख सचिव यूडीएच कुंजीलाल मीना ने 21 सितंबर दोपहर 3 बजे बैठक बुलाई है. बैठक का उद्देश्य इस परियोजना की सफलतापूर्वक क्रियान्विति के लिए ठोस कार्य योजना बनाना है. आपको सबसे पहले बताते हैं कि जेडीए के अलावा दूसरी एजेंसियों की क्या जिम्मेदारी थी और अब तक कितना काम किया गया है.

नगर निगम की जिम्मेदारी:

-हसनपुरा क्षेत्र में 350 मीटर लंबाई में मौजूद कई अतिक्रमण अब तक नहीं हटाए गए हैं.

-नगर निगम के दहलावास ट्रीटमेंट प्लांट से अनट्रीटेड गंदा पानी लगातार नदी में आ रहा है.

-62.5 मिलियन लीटर प्रतिदिन क्षमता के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का नगर निगम अपग्रेडेशन कर रहा है.

-इसके अलावा 90 मिलियन लीटर प्रतिदिन क्षमता के नए प्लांट का निगम निर्माण कर रहा है.

-निगम की बड़ी चुनौती शहर को 100 प्रतिशत सीवर लाइन से जोड़ना है.

-इस परियोजना के लिए उधार देने वाली एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने इसको लेकर नगर निगम से जवाब मांगा है.

-नदी के आस-पास एरिया में कचरा संग्रहण सिस्टम को मजबूत नहीं किया गया,इसके चलते लोग नदी में ही कचरा डाल रहे हैं.

-नदी में कई छोटे-बड़े नाले खुलते हैं, इनकी नियमित सफाई नहीं होने के कारण बड़ी मात्रा में कचरा और मलबा नदी में आ रहा है.

-रंगाई इकाईयों व अन्य उद्योगों से निकला वेस्ट मैटेरियल सीवर के माध्यम से सीधे नदी में आ रहा है.

राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल:

-वीकेआई,सुशीलपुरा,करतारपुरा,सांगानेर और सीतापुरा स्थित इकाईयों से इंडस्ट्रीयल वेस्ट सीधे नदी में आ रहा है.

-इसके चलते परियोजना में लगे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की मशीनरी खराब हाे रही है.

-मंडल की ओर से  सांगानेर में लगाए गए कॉमन एफ्युलेंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) को जल्द शुरू किया जाना है.
 
-CETP से सभी औद्योगिक इकाईयों को जोड़ने, ऐसा नहीं करने वाली इकाईयों के बिजली कनेक्शन काटने व CETP से जो इकाईयां जुड़ नहीं सकती उनके अन्यत्र शिफ्ट करने का काम पूरा नहीं हुआ है.

जिला प्रशासन:

- गोनेर ब्रिज से दो किलोमीटर तक के प्रभावित खातेदार परियोजना में शामिल भूमि के लिए मुआवजे की मांग कर हैं, मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है.

-करतारपुरा नाला द्रव्यवती नदी में जहां खुलता है, उससे 500 मीटर की लंबाई में करतारपुरा नाले का निर्माण अतिक्रमणों के कारण नहीं हो पा रहा है.

जिम्मेदार सरकारी एजेंसियों के अलावा कार्यकारी एजेंसी जेडीए और अनुबंधित कंसोरटियम के बीच में कई मामले उलझे हुए हैं. इसके अलावा कई काम जेडीए के मुताबिक अनुबंधित कंसोरटियम ने पूरे नहीं किए हैं.

-नदी की नियमित सफाई के लिए अब तक कोई प्रभावी व्यवस्था लागू नहीं कर पाई है.

-नदी में खुलने वाले नदी-नालों में कचरा व मलबा रोकने के लिए कोई कारगर उपाय नहीं किए गए हैं.

-नदी में विभिन्न स्थानों पर प्रस्तावित वर्षा जल पुनर्भरण संरचनाओं का अब तक निर्माण नहीं किया गया है.

-विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए जेडीए और अनुबंधित कंसोरटियम के बीच विवाद है.

-इनमें सबसे प्रमुख विवाद निर्मित किए जा चुके पांच सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट्स,सीवर नेटवर्क,तीन पार्क और प्रोजेक्ट एक्जीबिशन सेंटर की इमारत के हैंड ओवर का है.

-कंसोरटियम चाहता है कि या इन सभी को जेडीए को हैंड ओवर कर दिया जाए,ताकि इनके संचालन व रखरखाव का पैसा जेडीए से मिल सके.

-साथ ही पिछले तीन वर्षों से कंसोरटियम ट्रीटमेंट प्लांट के चलाने में हुए खर्चे की भी जेडीए से मांग कर रहा है.

-कंसोरटियम का कहना है कि ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन व रखरखाव का जेडीए भुगतान नहीं करता है,तो इन्हें बंद करने की स्वीकृति दे.

-जेडीए का तर्क है कि इस प्रकार पार्शियल हैंड ओवर का अनुबंध में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं,प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद ही कंपलीट हैंड ओवर किया जा सकता है.

-इसी मामले को लेकर कंसोरटियम की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, हाईकोर्ट ने आदेश दिए हैं कि कंसोरटियम जेडीए को इस बारे में प्रस्तुतीकरण दे,जेडीए इस पर फैसला नहीं लेता है तो दुबारा मामला हाईकोर्ट में आ सकता है.

-मजार बांध,गूलर बांध और रामचंद्रपुरा बांध के इलाके में भुगतान को लेकर भी जेडीए व कंसोरटियम के बीच विवाद है.

कहने को तो परियोजना का 94 प्रतिशत काम पूरा किया जा चुका है. लेकिन इसके अलावा बड़ी चुनौती नदी को हर प्रकार के प्रदूषण्,कचरे व मलबे से मुक्त करना और परियोजना के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराना भी है. नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल के निर्देश पर ही दहलावास ट्रीटमेंट प्लांट के अपग्रेडेशन का काम शुरू किया गया है. उम्मीद की जानी चाहिए कि प्रमुख सचिव कुंजीलाल मीना की अध्यक्षता में होने वाली बैठक के बाद परियोजना को पटरी पर लाने के लिए ठोस कार्य योजना बनेगी.

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