VIDEO: शहरों में चल रहे अवैध बजट होटल्स के नियमन की तैयारी, नियमन के लिए तैयार किए गए तकनीकी मापदंड

VIDEO: शहरों में चल रहे अवैध बजट होटल्स के नियमन की तैयारी, नियमन के लिए तैयार किए गए तकनीकी मापदंड

जयपुर: प्रदेश के शहरों में बड़ी संख्या में चल रहे अवैध बजट होटल्स को रेगुलेट करने का राज्य सरकार बड़ा फैसला कर सकती है. शहरों में पर्यटन व रोजगार का अहम केन्द्र बने इन बजट होटल्स को लेकर जल्द मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के स्तर पर फैसला किया जा सकता है. अगर इन होटल्स को रेगुलेट करने का फैसला किया जाता है तो इससे प्रदेश के शहरी निकायों को अच्छी आय की उम्मीद है. प्रदेश के शहरी निकायों की आय बढ़ाने और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के उद्देश्य से अशोक गहलोत सरकार की ओर से विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं. इसी दिशा में अवैध बजट होटल्स के नियमन को लेकर भी सरकार गंभीर है. आपको सबसे पहले बताते हैं सरकार की इस गंभीरता के पीछे क्या कारण है.

अवैध बजट होटल्स के नियमन की तैयारी: 

-प्रदेश भर के शहरों में 2 हजार से अधिक बजट होटल्स चल रहे हैं.
-इन बजट होटल्स के निर्माण संबंधित निकाय की बिना अनुमति के किया गया है.
-अधिकतर बजट होटल्स रेलवे स्टेशन व बस स्टैण्ड के नजदीक घनी आबादी में बने हुए हैं.
-लक्जरी होटल्स और स्टार कैटेगिरी वाले होटलों से अलग ये होटल्स स्थानीय पर्यटन और राेजगार के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं.
- अल्प व मध्यम  आय वर्ग के पर्यटकों को सस्ते किराए में रहने की सुविधा उपलब्ध कराते हैं.
-नियमन करने से बजट होटल्स में अग्निशमन संसाधनों और पार्किंग की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी.
-इन होटल्स को रेगुलेट करने से राज्य सरकार को एक हजार करोड़ रुपए से अधिक की आय होगी.
-इस राशि का उपयोग शहरों में आधारभूत सुविधाओं के विकास में हो सकेगा.

बजट होटल्स को रेगुलेट करने के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री के सलाहकार गोविंद शर्मा की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में भी सैद्धांतिक सहमति दी जा चुकी है. इसके बाद नगर नियोजन विभाग में इन होटल्स के नियमन के लिए तकनीकी मापदंड प्रस्तावित किए हैं आपको बताते हैं यह तकनीकी मापदंड क्या है.

होटल्स के नियमन के लिए तकनीकी मापदंड प्रस्तावित: 

-उन होटल्स को बजट होटल की श्रेणी में माना जाएगा जो लग्जरी टैक्स के दायरे में नहीं आते, जिनमें कम से कम 20 कमरे हो और होटल के निर्माण व संचालन में न्यूनतम 2 करोड रुपए का निवेश किया गया हो.
-31 मार्च 2020 से पहले संचालित बजट होटल्स का ही नियमन किया जाएगा.
-नियमन के लिए जरूरी होगा कि 225 वर्ग मीटर से कम भूमि पर बने होटल में भूतल और अधिकतम 3 मंजिल का ही निर्माण हो और उसमें न्यूनतम 20 कमरे हो.
-225 से अधिक और 350 वर्ग मीटर तक भूमि पर बने होटल के नियमन के लिए जरूरी होगा कि वे न्यूनतम  30 फीट  चौड़ी सड़क पर  बने हो, उसमें कम से कम 30 कमरे हो और भूतल व 4 मंजिल का निर्माण हुआ हो, इमारत की ऊंचाई अधिकतम 15 मीटर हो. 
 -350 से अधिक और 500 वर्ग मीटर तक भूमि पर बने होटल के नियमन के लिए जरूरी होगा कि  वह न्यूनतम 40 फीट चौड़ी सड़क पर स्थित हो होटल में अधिकतम भूतल और 5 मंजिल हो जिनकी कुल ऊंचाई 18 मीटर से अधिक नहीं हो.
-500 से अधिक और 750 वर्ग मीटर तक भूमि पर बने होटल्स न्यूनतम 60 फीट सड़क पर स्थित होने चाहिए, इमारत में मंजिल और उसकी ऊंचाई तत्कालीन बिल्डिंग बायलॉज के अनुरूप होनी चाहिए.
-वर्तमान में लागू बिल्डिंग बायलॉज के तहत होटल संचालक को पार्किंग उपलब्ध करानी होगी, पार्किंग उपलब्ध नहीं होने पर प्रति इक्विवेलेंट कार यूनिट ₹1 लाख के हिसाब से संबंधित निकाय को शुल्क देना होगा.
- मौजूदा बिल्डिंग बायलॉज के अनुसार होटल परिसर में निर्धारित सेट बैक भी छोड़ा जाना जरूरी होगा.
-सरकार के आदेश के मुताबिक होटल में अग्निशमन संसाधन रखने होंगे. 
-बिल्डिंग बायलॉज के तहत सोलर सिस्टम लगाना होगा. 
-ठोस व तरल अपशिष्ट के प्रबंधन की व्यवस्था नगर पालिका के नियमों के अनुसार करनी होगी. 
-होटल में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी बनाना होगा.
- यह सभी तकनीकी मापदंड पूरा करने पर नियमन के लिए होटल संचालक को मौजूदा बिल्डिंग बायलॉज के मुताबिक बिल्डिंग प्लान अप्रूवल व अन्य शुल्क जमा कराने होंगे.
-इसके अलावा बिना अनुमति निर्माण पर सरकार के आदेश के मुताबिक अलग से राशि भी देनी होगी.

इन प्रस्तावित तकनीकी मापदंडों की पत्रावली यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल को भेजी गई थी. मंत्री शांति धारीवाल ने नियमन की जिम्मेदारी देने के संबंध में अधिकारियों से जवाब मांगा है. नियमन के पीछे सरकार की मंशा है कि स्थानीय रोजगार और पर्यटकों की सुविधा पर कोई प्रतिकूल प्रभाव भी नहीं पड़े और विभिन्न जरूरी प्रावधानों के दायरे में इन होटल्स को लाया जाए.

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