VIDEO: 'पोपाबाई' के बाद अब छायी 'नाथी', शिक्षा मंत्री डोटासरा के एक डायलॉग के बाद मचा रखी धूम

VIDEO: 'पोपाबाई' के बाद अब छायी 'नाथी', शिक्षा मंत्री डोटासरा के एक डायलॉग के बाद मचा रखी धूम

जयपुर: पीसीसी अध्यक्ष व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के एक डायलॉग के बाद अब प्रदेश में पोपाबाईको नाथी की चर्चा जोरो आम है. विधानसभा तक धूम मचा चुके पोपाबाई के राज को अब नाथी के बाड़ा ने पीछे छोड़ दिया है. 

जी हां, इसी नाथी के बाड़ा ने दो दिन से प्रदेश में धूम मचा रखी है. लेकिन इससे पहले पूरा वाकया समझ लेते हैं. दरअसल कुछ शिक्षक दो दिन पहले मंत्री डोटासरा के आवास पर ज्ञापन देने पहुंचे थे, तो गुस्साए मंत्री कहा कि यदि ये लोग बिना छुट्टी लिए आए हैं, तो तुरंत सस्पेंड कर दिया जाए. इसके बाद मंत्री ने इन शिक्षकों से कहा क्या मेरे घर को नाथी का बाड़ा समझ रखा है क्या ?

हर कोई नाथी के बाड़ा की चर्चा करने लगा:
शिक्षा मंत्री ने यह डायलॉग क्या मारा, सोशल मीडिया पर ऐसा छाया कि हर कोई नाथी के बाड़ा की चर्चा करने लगा. अब तक तो राजस्थान में पोपाबाई के राज की चर्चा थी. विधानसभा तक पोपाबाई ने अपनी छाप छोड़ी. सदन की कार्यवाही के दौरान यहां तक कहा गया था कि पोपाबाई पर बहस करा ली जाए, लेकिन आज तक यह पता नहीं लग पाया कि आखिर पोपाबाई कौन थी, लेकिन अब पोपाबाई को नाथी ने पीछे छोड़ दिया है. चाहे ट्वीटर हो या फेसबुक या फिर व्हाट्सएप हर किसी पर नाथी के बाड़ा की चर्चा चल रही है. इतना ही नहीं नाथी का बाड़ा पर प्रश्नोत्तरी तक शुरू हो गई है. 

सोशल मीडिया पर नजर डालेंगे, तो कल रोचक प्रश्न पाएंगे:
सोशल मीडिया पर नजर डालेंगे, तो कल रोचक प्रश्न पाएंगे. एक युवा ने तो इसे रीट परीक्षा का प्रश्न तक बना डाला, लिखा नाथी का बाड़ा कहां पर है, यह क्यो प्रसिद्ध है, इस बाड़े में कौन कौन जा सकता है और यहां पर जाने की क्या प्रक्रिया है. बेरोगार युवा, शिक्षक संगठन ही नहीं बल्कि विपक्षी पार्टी भाजपा ने भी नाथी का बाड़ा को लेकर सोशल मीडिया पर रोचक टिप्पणियां की है. वहीं एक व्यक्ति ने तो उसे उपचुनाव से भी जोड़ दिया. ट्वीटर पर लिखा कि जनता का घर भी कोई नाथी का बाड़ा नहीं है, जहां पर कभी भी जाकर वोट मांग लो. वहीं दूसरे ने लिखा कि मेरा राजस्थान सरकार से निवेदन है कि नाथी का बाड़ा को पर्यटन स्थल घोषित किया जाए. दरअसल इन दिनों पर्यटन विभाग भी डोटासरा के पास ही है. सोशल मीडिया पर यहां तक लिखा जा रहा है कि आरएएस परीक्षा 2022 में नाथी का बाड़ा पर 20 शब्दों में लिखना है.

अब नाथी का बाड़ा की खोज भी गूगल व सोशल मीडिया पर होने लगी: 
पोपाबाई का तो आज तक पता नहीं चला कि आखिर पोपाबाई कौन थी और कैसे राज करती थी, लेकिन अब नाथी का बाड़ा की खोज भी गूगल व सोशल मीडिया पर होने लगी है. आखिर नाथी का बाड़ा है क्या, कौन थी नाथी. इन सभी प्रश्नों का जवाब ढूंढते हुए एक कहानी जरूर सोशल मीडिया पर आई है. इस कहानी के अनुसार मारवाड़ में प्राचीन समय में एक महिला थी नाथीबाई, शादी के बाद बालविधवा हो गई थी लेकिन सामाजिक परंपरा के कारण दुसरा विवाह नहीं हो सका, तो नाथीबाई विधवा ही ससुराल में रही, नाथीबाई मेहनत मजदूरी करती, गरीबों की मदद करती, गांव में मान-सम्मान से रहती, ऐसे करते करते नाथीबाई के पास बहुत धन जमा हो गया.  गांव में जब कोई भी कोई शादी, मायरा, नुक्ता वगैरह बड़ा काम होता तो लोग नाथीबाई के पास आते और धन उधार लेते. नाथीबाई सबको धन देती कोई हिसाब नहीं लिखती और न ही ब्याज लेती. ऐसे नेक आचरण से नाथीबाई बहुत प्रसिद्ध हुई जिसके पास कोई भी आदमी मदद मांगने जा सकता था. इसलिए कहावत बनी यहां नाथी का बाड़ा समझ रखा है क्या?

इस एक डायलॉग ने केवल सोशल मीडिया पर धूम मचा रखी: 
आखिर इस कहानी में कितनी सचाई है यह तो इतिहासकार ही बता सकते है या फिर शिक्षा मंत्री गोविंद डोटासरा ही जानकारी दे सकते हैं, लेकिन यह तो तय है कि इस एक डायलॉग ने केवल सोशल मीडिया पर धूम मचा रखी है, बल्कि आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में इसकी अहम भूमिका रहेगी. न केवल चुनावी सभाओं में बल्कि विधानसभा में भी अब नाथी के बाड़ा की गूंज सुनाई देगी. इस बीच विभिन्न शिक्षकों व शिक्षक संगठनों ने यह डॉयलॉग बोलने पर मंत्रीजी की शिकायत मुख्यमंत्री तक कर दी है.
 

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