Jaipur: जेडीए की ट्रांसपोर्ट नगर योजना को लेकर बड़ी खबर, कमेटी ने राज्य सरकार को भेजी सिफारिश

Jaipur: जेडीए की ट्रांसपोर्ट नगर योजना को लेकर बड़ी खबर, कमेटी ने राज्य सरकार को भेजी सिफारिश

जयपुर: राजधानी में सीकर रोड पर स्थित ट्रांसपोर्ट नगर योजना की आरक्षित दर के संबंध में सिफारिश के लिए गठित अधिकारियों की कमेटी ने राज्य सरकार को रिपोर्ट भेज दी है. नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल की अध्यक्षता में गठित कैबिनेट एम्पावर्ड कमेटी इस सिफारिश पर फैसला करेगी.  योजना की आरक्षित दर को लेकर आखिर अधिकारियों की कमेटी ने क्या भेजी सिफारिश, जानने के लिए पढ़ें फर्स्ट इंडिया न्यूज की ये खास रिपोर्ट....

जयपुर के शहर के ट्रांसपोर्ट व्यवसाय को बाहर स्थानांतरित करने के लिए जयपुर विकास प्राधिकरण ने ट्रांसपोर्ट नगर योजना सृजित की थी. ट्रांसपोर्ट व्यवसायी लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि द्वितीय फेज के लिए योजना की आरक्षित दर 13 हजार 500 रुपए प्रति वर्गमीटर को कम किया जाए. आपको सबसे पहले बताते हैं कि पूरा मामला क्या है. 

- जयपुर विकास प्राधिकरण की ओर से ट्रांसपोर्ट नगर योजना वर्ष 2004 में सृजित की गई. 

- योजना में कुल 1484 भूखंडों के लिए ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों के  2582 आवेदन प्राप्त हुए. 

- कॉर्नर भूखंड छोड़ते हुए 1346 भूखंडों की लॉटरी जेडीए ने 30 जून 2007 को निकाल दी. 

- सफल आवेदको को तत्कालीन आरक्षित दर 1111 रुपए प्रति वर्गमीटर के अनुसार आवंटन पत्र जारी कर दिया गया. 

- जेडीए की कार्यकारी समिति की 25 नवम्बर 2014 को हुई बैठक में द्वितीय फेज के लिए आरक्षित दर 13 हजार 500 रुपए प्रति वर्गमीटर तय की गई. 

- जेडीए ने द्वितीय फेज में 970 आवेदकों की लॉटरी 9 जनवरी 2018 में निकाली. 

- नई तय की गई आरक्षित दर के अनुसार जेडीए ने सफल आवेदकों को आवंटन पत्र जारी कर दिए. 

- इस नई आरक्षित दर के खिलाफ ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों की विभिन्न एसोसिएशनों के माध्यम से हाईकोर्ट में 20 याचिकाएं दायर की गई. 

- ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों ने कोरोना, नोटबंदी व आर्थिक मंदी का हवाला देते हुए आरक्षित दर कम करने की मांग की. 

- जेडीए में 10 दिसम्बर 2020 को आयोजित बैठक में विभिन्न एसोसिएशनों ने आरक्षित दर 1111 रुपए से लेकर 6 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर रखने की मांग की. 

ट्रांसपोर्ट नगर योजना की आरक्षित दर को कम करने पर सहानुभूति पूर्वक विचार करने की ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों की मांग पर जेडीए ने मामला राज्य सरकार को भेज दिया.  नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल की अध्यक्षता में गठित कैबिनेट एम्पावर्ड कमेटी की इस वर्ष 14 फरवरी को हुई बैठक में मामले पर विचार किया गया.  कमेटी ने आरक्षित दर के संबंध में सिफारिश देने के लिए जेडीए आयुक्त गौरव गोयल के संयोजन में एक कमेटी के गठन का फैसला किया.  इस कमेटी में परिवहन विभाग के आयुक्त,जिला कलक्टर और नगरीय विकास विभाग के संयुक्त सचिव शामिल किए गए. आपको बताते हैं कि इस कमेटी ने किस दर को आरक्षित दर के तौर पर उपयुक्त माना और इसके पीछे कमेटी ने क्या आधार माने...

- कमेटी में शामिल सभी अधिकारियों का मत था कि योजना के आस-पास उपलब्ध व्यवसायिक भूखंडों की बाजार दर योजना की आरक्षित दर से कहीं अधिक है. 

- जेडीए ने यहां विकास कार्य शुरू कर भूखंडों की नीलामी शुरू कर दी है. 

- नीलामी में जेडीए को 49 हजार 700 रुपए, 50 हजार 800 रुपए और 52 हजार 800 रुपए प्रति वर्गमीटर की अधिकतम बोली प्राप्त हुई है. 

- कमेटी का मानना था कि द्वितीय फेज के लिए तय की गई आरक्षित दर 13 हजार 500 रुपए प्रति वर्गमीटर तर्क संगत व नियमानुसार है. 
- इसी के चलते कमेटी ने द्वितीय फेज के लिए आरक्षित दर 13 हजार 500  रुपए प्रति वर्गमीटर ही रखने की सिफारिश की है. 

- कमेटी ने यह भी सिफारिश की है कि आवंटन पत्र जारी होने के बाद भी राशि जमा नहीं कराने पर व्यवसायियों को ब्याज व जुर्माने में छूट दी जाए. 

- यह एकबारीय छूट उन व्यवसायियों को दी जाए जो तय की गई अवधि में राशि जमा कराएं.  

जेडीए आयुक्त गौरव गोयल के संयोजन में गठित अधिकारियों की इस कमेटी ने अपनी सिफारिश राज्य सरकार को भेज दी है.  नगरीय विकास विभाग की ओर से जल्द यह मामला कैबिनेट एम्पावर्ड कमेटी की आगामी बैठक में रखा जाएगा.  उम्मीद की जानी चाहिए कि पिछले करीब 17 सालों से चला रहा विवाद खत्म होगा और ट्रांसपोर्ट नगर योजना अपने उद्देश्य के मुताबिक मूर्त रूप लेगी. 

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