VIDEO: प्रदेश की पर्यटन उद्योग पर कोरोना का कहर, बुकिंग 80 फीसदी तक गिरी

VIDEO: प्रदेश की पर्यटन उद्योग पर कोरोना का कहर, बुकिंग 80 फीसदी तक गिरी

जयपुर: राजस्थान में कोरोना वायरस की दहशत होटल इंडस्ट्री और ट्रैवल ट्रेड पर भारी पड़ रही है. कोरोना के डर से से पर्यटकों ने मरुधरा से किनारा कर लिया है. सबसे ज्यादा प्रभाव होटल इंडस्ट्री पर देखने को मिल रहा है जिसकी बुकिंग 80 फ़ीसदी तक नीचे गिरी है. स्मारक, जंगल, शाही ट्रेन, हस्तशिल्प, ग्रामीण और धार्मिक पर्यटन बी हाशिए पर आ गए हैं.  

- प्रदेश की होटल इंडस्ट्री पर कोरोना का कहर
- होटल बुकिंग 80 फ़ीसदी तक गिरी
- पांच सितारा से बजट होटल तक सभी के हाल खराब
- बजट होटल्स में स्टाफ का वेतन निकालने में भी दिक्कत
- आरटीडीसी की होटल्स की बुकिंग 10 से 15 फीसदी
- अब सितंबर से पहले संभलने की नहीं उम्मीद

अकेले राजधानी की बात करें तो राजधानी जयपुर में करीब 1100 सितारा और बजट होटल हैं जिनमें करीब 8000 से ज्यादा कमरे हैं. मार्च से पहले तक इन होटलों में 60 से 70 फीसदी बुकिंग थी पर कोरोना की दहशत के साथ हुई मैग्नीफिसेंट मार्च की शुरुआत बेहद खराब तरीके से हुई. मार्च की शुरुआत से बुकिंग गिरने लगी और 15 मार्च आते आते 15 से 20  के स्तर पर रह गई.  कमरों की बुकिंग के तौर पर इसे समझें तो कहा जा सकता है कि मार्च तक जहां 5 हजार से साढ़े पांच हजार कमरे बुक रहते थे वह 15 मार्च आते आते डेढ़ से दो हजार तक सिमट गए थे.  इससे पर्यटन उद्योग चरमरा गया है और सबको इंतजार है तो इस बात का कि गर्मी चढ़े और कोरोना वायरस से निजात मिले.  दरअसल प्रदेश में गोल्डन ट्रायंगल यानी दिल्ली, आगरा और जयपुर के अलावा जोधपुर, उदयपुर, सवाई माधोपुर, चित्तौड़, माउंट आबू और जैसलमेर में देश विदेश के पावणा की काफी चहल-पहल रहती थी. लेकिन इस बार कोरोना वायरस के चलते पर्यटन उद्योग एवं उनके गिरा है. फॉरेन एक्सचेंज से जुड़े व्यवसायियों की हालत भी काफी खराब है. ट्रैवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटर्स कोरोना के कहर के आगे त्राहिमाम कर चुके हैं. हालात इस कदर भयावह है कि पर्यटन उद्योग अगले दो-तीन साल तक अपने पैरों पर खड़ा हो पाएगा इसकी गुंजाइश बहुत कम दिखाई देती है. 

कोरोना की दहशत का असर प्रदेश के तमाम प्रमुख पर्यटन स्थलों पर:
मार्च में रणथंभौर और सरिस्का में टाइगर की साइटिंग शानदार होती रही है लेकिन इस बार कोरोना के चलते 17 अप्रैल से तमाम टाइगर पार्क, सफारी और बायोलॉजिकल पार्क बंद कर दिए गए थे. विश्व विरासत में शुमार आमेर हो या फिर चित्तौड़ और मेहरानगढ़ के किले इससे भी आगे बात करें तो जैसलमेर के सम के धोरे और सोनार किला साथ ही माउंट आबू में भी कोरोना का कर्फ्यू दिखाई देता है.  कोरोना की दहशत का असर यह रहा कि न केवल राजधानी जयपुर वरन प्रदेश के तमाम प्रमुख शहर खासकर पर्यटन स्थलों वाले शहरों में सैलानियों का आगमन तेजी से गिरा और होटलों में कमरे खाली होते चले गए.  बजट होटल्स हालत कितनी बुरी है कि स्टाफ की तनख्वाह निकलने तक में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.  कोरोना के कहर का आलम यह है कि अगले 2 वर्ष की विदेशी पर्यटकों की बुकिंग प्रभावित हुई है.  कई ट्रैवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटर्स में सितंबर से शुरू हो रहे अगले पर्यटन सत्र की एडवांस बुकिंग रद्द करा दी है.  

मानसून में भी पर्यटन को ज्यादा गति मिलेगी इसको लेकर आशंका:
अब जून तक प्रदेश में मानसून के आने के आसार हैं लेकिन मानसून में भी पर्यटन को ज्यादा गति मिलेगी इसको लेकर आशंका है.  ट्रैवल ट्रेड से जुड़े लोगों का कहना है कि अब कमजोर हुआ पर्यटन उद्योग सितंबर की शुरुआत से  संभल पाएगा इसमें भी शक है.  प्रदेश में मार्च के महीने में रोजाना औसतन पन्द्रह हजार से 20,000 पर्यटक ही आए वह भी 15 मार्च के बाद बंद हो गए.  पर्यटक स्थलों पर कोरोना का कर्फ्यू लगा दिखाई देता है.  कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि इस बार कोरोना की दूसरी लहर ट्रैवल ट्रेड की कमर तोड़ने वाली रही है.  भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने प्रदेश में अपने सभी 164 स्मारक पर्यटकों के लिए बंद कर दिए मही पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग में भी प्रदेश में अपने सभी 33 स्मारक और संग्रहालय जन अनुशासन पखवाड़े के दौरान बंद रखने का फैसला किया था पर्यटन पर लगातार दूसरे वर्ष कोरोना की मार के चलते 30 लाख से ज्यादा लोग प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से बेरोजगारी की हालत में पहुंच गए पर्यटन गाइड बेरोजगार दिखाई दे रहे हैं पर्यटन टैक्सी संचालक होकर वेंडर होटल संचालक हस्तशिल्प से जुड़े लोग लोक कलाकार सभी के लिए जून आने से पहले 2 जून की रोटी जुटाना मुश्किल हो गया फॉरेन एक्सचेंज अभी अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन बंद होने से बेरोजगारी की हालत में हैं. 

पर्यटन के तमाम इवेंट्स रद्द कर दिए गए:
कोरोना वायरस का कहर इतना घातक रहा है कि भारत से लेकर यूरोप और अमेरिका से लेकर अफ्रीकी देशों में होने वाले पर्यटन के तमाम इवेंट्स रद्द कर दिए गए हैं. राजधानी जयपुर की बात करें तो पर्यटन उद्योग की रीड कहे जाने वाले हाथी उत्सव, गणगौर और राजस्थान दिवस जैसे समारोह रद्द करने पड़े हैं. उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही देश और दुनिया कोरोना से निजात पाएगी और ट्रैवल इंडस्ट्री को एक बार फिर से जीवनदान मिलेगा. 

...निर्मल तिवारी फर्स्ट इंडिया न्यूज़, जयपुर

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