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Jaipur: प्रदेश की नाजुक वित्तीय सेहत की नब्ज टटोलती FRBM रिपोर्ट जारी, जनता पर कर्ज का बोझ 3 लाख 79 हजार करोड़ के पार

Jaipur: प्रदेश की नाजुक वित्तीय सेहत की नब्ज टटोलती FRBM रिपोर्ट जारी, जनता पर कर्ज का बोझ 3 लाख 79 हजार करोड़ के पार

जयपुर: कोरोना की वजह से राज्य की आर्थिक हालत और भी डांवाडोल हो गई है. प्रदेश की नाजुक वित्तीय सेहत की नब्ज टटोलती आज वित्त विभाग की ओर से जारी FRBM रिपोर्ट में इसी की तस्वीर दिखाई दी है. इसके तहत प्रदेश सरकार इस वित्तीय वर्ष में  बजट अनुसार खर्चा तो कर लेगा लेकिन राजस्व में अच्छी खासी कमी की संभावना है. पेट्रोलियम और वाहन से जुड़े राजस्व में भारी कमी आई है तो वहीं जनता पर कर्ज का बोझ 3 लाख 79 हजार करोड़ के पार हो गई है. 

अप्रैल से सितंबर तक अपनी आमदनी और खर्च का ब्योरा सार्वजनिक:
प्रदेश की वित्तीय सेहत नाजुक है और अभी तक के ट्रेंड्स भी उत्साहजनक नहीं हैं.  प्रदेश की फिस्कल रिस्पोंसिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट-FRBM की छह माह की रिपोर्ट में इसकी तस्वीर साफ दिखाई देती है. इस रिपोर्ट में सरकार ने अप्रैल से सितंबर तक अपनी आमदनी और खर्च का ब्योरा सार्वजनिक किया है.

छह महीनों में ही सरकार का राजस्व घाटा 27858 करोड़ रुपए पहुंचा:
रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा वित्तीय वर्ष के पहले छह महीनों में ही सरकार का राजस्व घाटा 27858 करोड़ रुपए पहुंच गया है. यह सरकारी आमदनी और खर्च का अंतर है. यानी इस अवधि में आमदनी 55096 करोड़ रुपए और खर्च 83055 करोड़ रुपए रहा है.

- कोरोना लॉकडाउन के चलते बंद हुए उद्योग धंधों से सरकार का राजस्व बुरी तरह प्रभावित हुआ है. इसमें पिछले वित्त वर्ष की इसी अविधि के मुकाबले इस बार सरकार प्रत्यक्ष कर 13.56 प्रतिशत और अप्रत्यक्ष कर 34.64 प्रतिशत कम रहा है.

- सरकार ने इस पूरे वित्त वर्ष के लिए 33922 करोड़ रुपए का राजकोषीय घाटा अनुमानित किया था. लेकिन महज छह महीनों में ही सरकार का घाटा 33109 करोड़ रुपए का छू गया है.

- पेट्रोलियम सेक्टर से मिलने वाले राजस्व में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है. पिछले वित्तीय वर्ष में जहां इस सेक्टर से 1788 करोड़ रुपए का राजस्व मिला वहीं इस वित्तीय वर्ष में यह घटकर 738 करोड़ रुपए रह गया.

छोटे उद्योगों में निवेश बढ़ा: 
रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा वित्त वर्ष में 3562 करोड़ रुपए के 8 निवेश प्रस्ताव सरकार को मिले हैं. जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में 2030 करोड़ रुपए के 26 निवेश प्रस्ताव आए थे.

- अप्रैल से जून के 2020 में 28165 एमएसएमई इकाईयों ने ऑनलाइन पंजीकरण करवाया जिससे प्रदेश में करीब 1 लाख 70 हजार लोगों को रोजगार के अवसर मिले. एमएसएमई सेक्टर में मौजूदा वित्त वर्ष में 3559 करोड़ रुपए का निवेश आया जो की पिछले वित्त वर्ष से करीब 70 प्रतिशत ज्यादा है. 

- केंद्रीय कर 17101 करोड़ के मुकाबले 15541 करोड़ मिला इसमें 11.87% का नुकसान रहा.

- कुल खर्च में से 53% यानि 45000 करोड़ से ज्यादा वेतन चुकाने और पेंशन कर्ज का ब्याज चुकाने में हुआ खर्च.

कर्ज का बोझ बढ़ा:
मौजूदा बजट में सरकार ने प्रदेश पर पर 3 लाख 75 हजार करोड़ का ऋण भार अनुमानित रखा था लेकिन छह महीनों में यह अनुमान से कहीं आगे निकल चुका है. प्रदेश पर अब 3 लाख 79 हजार करोड़ रुपए का ऋण चढ़ चुका है.

- सरकार की खुद की आय 13% कम हुई कोरोना के कारण

- शराब से आय में ज्यादा कमी नहीं आई सिर्फ 1%कमी हुई जबकि वाहन से आय में 38% कमी आई

- पेट्रोलियम व ट्रांसपोर्ट क्षेत्र का प्रदर्शन सबसे खराब पिछले साल का कर राजस्व 27000 करोड़,इस बार है 23000 करोड़. 

- केंद्रीय कर 17101 करोड़ के मुकाबले 15541 करोड़ मिला 11.87% नुकसान

- 8355 करोड़ खर्चा हुआ कुल

- इसमें 53% यानि 45000 करोड़ से ज्यादा वेतन चुकाने और पेंशन कर्ज का ब्याज चुकाने में होता खर्च

- राजस्व घाटा अनुमानित बजट से ढाई गुना हो चुका

- राजस्व में इस वित्तीय वर्ष में काफी कमी आएगी

- पेट्रोलियम से राजस्व में पिछले साल के मुक़ाबले  58% कमी,ट्रांसपोर्ट में 38% कमी

- अनुमानित बजट के अनुसार कर्ज था 3 लाख 75 हजार करोड़ 

- उससे 4000 करोड़ ज्यादा यानि 3 लाख 79 हजार 928.74 करोड़ कर्जा हुआ

- 2019-20 से 2020-21 में 18.88% फीसदी गिरी राजस्व प्राप्तियां

- 2019-20 में 67915.47 करोड़ थी अप्रैल-सितंबर माह में राजस्व प्राप्तियां

- 2020-21 में 55096.42 करोड़ रहा यह आंकड़ा

- कुल कर राजस्व घटा 11.87%

- 44815.26 करोड़ के मुकाबले 39497.89 करोड़ रहा राजस्व

- गैर कर राजस्व में आई 32.47% कमी

- 23100.21 के मुकाबले 15598.53 करोड़ रहा गैर कर राजस्व

- कैपिटल प्राप्तियों में वृद्धि 67.29%

- 27018 करोड़ के मुकाबले 45200 करोड़ है वास्तविक प्राप्तियों का आंकड़ा

- कुल खर्चा बढ़ा 2.85%,85954 करोड़ के मुकाबले 88405 करोड़ हुआ वास्तविक खर्चा

- राजस्व घाटा 10026 करोड़ से बढ़कर हुआ 27958 करोड़

कुल मिलाकर अभी तक के हालात सुखद नहीं माने जा रहे हैं. ऐसे में राज्य सरकार को बजट पेश करते हुए कई संतुलनों को साधना होगा. 

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