नहीं रहे गांधीवादी विचारक डॉ. एसएन सुब्बाराव: कई डकैतों ने सुब्बाराव से प्रेरित होकर किया था आत्मसमर्पण, CM गहलोत ने बताया व्यक्तिगत आघात

नहीं रहे गांधीवादी विचारक डॉ. एसएन सुब्बाराव: कई डकैतों ने सुब्बाराव से प्रेरित होकर किया था आत्मसमर्पण, CM गहलोत ने बताया व्यक्तिगत आघात

नहीं रहे गांधीवादी विचारक डॉ. एसएन सुब्बाराव: कई डकैतों ने सुब्बाराव से प्रेरित होकर किया था आत्मसमर्पण, CM गहलोत ने बताया व्यक्तिगत आघात

जयपुर: एसएमएस अस्पताल में भर्ती गांधीवादी विचारक डॉ. एसएन सुब्बाराव का आज सुबह निधन हो गया है. उनका पिछले 6 दिन से SMS अस्पताल में इलाज चल रहा था. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सुब्बाराव के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है.  डॉ. एसएन सुब्बाराव और सीएम गहलोत का नाता बेहद ख़ास और बहुत पुराना है. इसी के चलते उन्होंने इसे व्यक्तिगत आघात और अपूरणीय क्षति बताया है. 

मुख्यमंत्री गहलोत ने ट्वीट करते हुए कहा कि वयोवृद्ध गांधीवादी, भाईजी डॉ एसएन सुब्बाराव जी के निधन से मुझे व्यक्तिगत रूप से बेहद आघात पहुंचा है. 70 वर्षों से अधिक समय से देश के युवाओं से जुड़कर, लगातार अपने शिविरों के माध्यम से उन्हें प्रेरणा देने वाले देश की पूंजी गांधीवादी विचारक और प्रेरक का देहांत एक अपूरणीय क्षति है. 

उन्होंने कहा कि भाईजी ने जीवनपर्यन्त युवाओं को जागरूक करने की मुहिम चलाई, विदेशों में भी वहां पर नई पीढ़ी को देश के बारे में बताया, यहां के संस्कार, संस्कृति, अनेकता में एकता का सन्देश उन तक पहुंचाने का कार्य किया. उनके शिविरों में आकर मुझे बेहद सुकून महसूस होता रहा. 

सीएम गहलोत ने कहा कि उनके प्रेरणागीत और विचार प्रेरणादायी सन्देश देते रहेंगे. हम सौभाग्यशाली हैं कि राजस्थान में उनका सानिध्य हमको मिलता रहा. ईश्वर से प्रार्थना है उनके सहयोगियों एवं फॉलोवर्स को इस बेहद कठिन समय में सम्बल प्रदान करें एवं दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें. 

9 अगस्त 1942 को मात्र 13 साल की उम्र में जुड़ गए आजादी आंदोलन से:
गांधीवादी विचारक डॉ. एसएन सुब्बाराव का कर्नाटक के बेंगलुरु में 7 फरवरी 1929 को जन्म हुआ था. सुब्बाराव स्कूल में पढ़ते समय महात्मा गांधी की शिक्षा से प्रेरित थे. वह 9 अगस्त 1942 को मात्र 13 साल की उम्र में आजादी आंदोलन से जुड़ गए थे. ब्रिटिश पुलिस द्वारा गिरफ्तार करने पर उन्होंने दीवार पर  'QUIT INDIA' लिखा था. तभी से सुब्बा राव स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय हो गए थे. उन्होंने छात्र जीवन के दौरान स्टूडेंट कांग्रेस और राष्ट्र सेवा दल के कार्यक्रमों में भाग लिया था. सुब्बाराव पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित थे. 

डॉ. एसएन सुब्बाराव 1951 में कांग्रेस सेवा दल में शामिल हुए थे:
गांधीवादी विचारक डॉ. एसएन सुब्बाराव 1951 में कांग्रेस सेवा दल में शामिल हुए थे. इसके बाद लगातार कांग्रेस सेवा दल में कार्य करते रहे. उन्होंने पूरे भारत में यूथ शिविरों का आयोजन किया. युवाओं और महिलाओं के बीच सुब्बाराव की लोकप्रियता थी. उन्हे अपने कार्य के कारण पं. जवाहरलाल नेहरू का स्नेह मिला था. सुब्बाराव ने  1969 में 'गांधी शताब्दी' मनाने की जिम्मेदारी भी निभाई थी. उसके बाद उन्होंने 1970 में राजनीतिक दल के बजाय देश की सेवा करने का संकल्प लिया. 

सुब्बाराव से प्रेरित होकर आश्रम में कई डकैतों ने किया था आत्मसमर्पण:
सुब्बाराव ने मध्य प्रदेश के मुरैना में महात्मा गांधी सेवा आश्रम की स्थापना की थी. सुब्बाराव से प्रेरित होकर आश्रम में मोहर सिंह, माधो सिंह जैसे कुख्यात कई डकैतों ने आत्मसमर्पण किया था. आश्रम में आज भी 5 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है. आपको बता दें कि एसएन सुब्बाराव की पार्थिव देह विनोबा ज्ञान मंदिर आमजन के दर्शनों के लिए रखी जाएगी. उसके बाद स्व. सुब्बाराव का मुरैना के जोरा स्थित आश्रम में अंत्येष्टि की जाएगी. सुब्बाराव के निधन से मुख्यमंत्री गहलोत अत्यंत दुखी है.       

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