ढाई हजार करोड़ रुपए की कमाई के मामलों में कवायद अधूरी, किसी मे लॉकडाउन तो किसी मे जिम्मेदारों की सुस्ती है कारण

ढाई हजार करोड़ रुपए की कमाई के मामलों में कवायद अधूरी, किसी मे लॉकडाउन तो किसी मे जिम्मेदारों की सुस्ती है कारण

जयपुर: जयपुर विकास प्राधिकरण (Jaipur Development Authority) के खजाने में वर्षों से लंबित जिन महत्वपूर्ण मामलों के निस्तारण से ढाई हजार करोड़ रुपए आने की उम्मीद है, उन मामलों में अब तक कवायद अधूरी है. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण जहाँ कोरोना (Corona) संक्रमण के कारण लागू लॉकडाउन (Lockdown) है, वही जिम्मेदारों की कुछ सुस्ती भी है. 

कई तकनीकी और नीतिगत कारणों के कारण जयपुर विकास प्राधिकरण के 5 बड़े मामले वर्षों से लंबित चल रहे हैं. इन मामलों के निस्तारण के लिए क्या किया जाए, उसको लेकर मंत्री शांति धारीवाल के स्तर पर कई दौर की बैठकें हुई. इन बैठकों के बाद इन मामलों के हल के लिए जो रास्ता तय किया गया, उसी के अनुरूप जेडीए ने कैबिनेट एंपावर्ड कमेटी को सिफारिश भेजी. यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल की अध्यक्षता में इस वर्ष 14 फरवरी को हुई बैठक में इन सभी मामलों के हल के लिए बड़े फैसले किए गए. आपको सबसे पहले बताते हैं कि ये मामले जेडीए के

राजस्व बढ़ाने के लिहाज से किस तरह से महत्वपूर्ण हैं-
यूं है 2500 करोड़ रुपए की आमद:- 

- ट्रांसपोर्ट नगर योजना में व्यवसायियों को भूखंड आवंटन के बाद 4.15 लाख वर्ग मीटर भूमि जेडीए को मिलेगी
- इस भूमि में से कॉर्नर, कमर्शियल व होटल आदि भूखंडों की नीलामी से जेडीए को 557 करोड रुपए की आय होने की उम्मीद है
- लोहा मंडी योजना के क्रियान्वयन से जेडीए को 300 करोड़ रुपए की आय संभावित है
- सेंट्रल स्पाइन योजना में खातेदारों से भूमि समर्पित होने के बाद योजना के क्रियान्वयन से जेडीए को उम्मीद है  कि 1000 करोड रुपए उसके खजाने में आएंगे
- वेस्ट वे हाइट्स योजना के विवाद मुक्त होने से जेडीए को 670 करोड रुपए का राजस्व मिलने का अनुमान है
- गोपालपुरा बाईपास पर व्यवसायिक पट्टे जारी करने से जेडीए को 50 करोड़ रुपए की आय होने की उम्मीद है
किस मामले से जेडीए को कितनी आय की उम्मीद है, यह आंकड़े खुद जेडीए की ओर से सरकार को बताए गए थे. यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल की अध्यक्षता में गठित एंपावर्ड कमेटी की बैठक में किए गए फैसलों को लागू करने के लिए जेडीए को आदेश जारी किए गए. नगरीय विकास विभाग की ओर से 4 मार्च को जारी इन आदेशों में स्पष्ट कहा गया कि एंपावर्ड कमेटी के फैसले की पालना 30 दिन में की जाए और इसकी पालना रिपोर्ट विभाग को भिजवाई जाए. इस हिसाब से यह डेडलाइन 4 अप्रैल को पूरी हो गई थी जबकि लॉकडाउन इसके बाद लगा है. आपको बताते हैं कैबिनेट एंपावर्ड कमेटी के आदेश के अनुसार किस मामले में क्या कार्यवाही होनी थी और अब तक मामले में क्या किया गया है. 

ट्रांसपोर्ट नगर योजना:-
ये करनी है कार्यवाही:-

- योजना में चल रहे आवंटन दर के निर्धारण के लिए एक समिति का गठन होगा 
- यह समिति योजना की मौजूदा आवंटन दर ₹13500 प्रति वर्ग मीटर की समीक्षा करेगी 
- जयपुर विकास आयुक्त के संयोजन में गठित इस समिति में परिवहन विभाग के आयुक्त, कलेक्टर जयपुर और यूडीएच के संयुक्त सचिव तृतीय शामिल होंगे 
- यह समिति आवंटन दर के संबंध में अपनी सिफारिश मंत्रिमंडल एंपावर्ड कमेटी को प्रस्तुत करेगी 
- कमेटी गठन करने और उसके सिफारिश भेजने का काम 1 महीने में पूरा किया जाना जरूरी होगा
- इस बारे में पालना रिपोर्ट नगरीय विकास विभाग को भेजी जाएगी

अब तक यह किया:
- जेडीए आयुक्त की अध्यक्षता में कमेटी का गठन कर लिया गया इस कमेटी की पहली बैठक भी बुलाई गई 
- लेकिन कलेक्टर और परिवहन आयुक्त के नहीं पहुंचने के कारण बैठक नहीं हो सकी

जगतपुरा सेंट्रल स्पाइन योजना:-
ये करनी है कार्यवाही:-

- भूमि अधिग्रहण का मुआवजा देने के उद्देश्य से जेडीए को रीको से 35 हेक्टेयर भूमि दिलाई जानी है 
- इसके लिए योजना को लेकर जेडीए और रीको के बीच हुए एमओयू में संशोधन किया जाना प्रस्तावित है. 
- एमओयू में संशोधन के लिए जेडीए मुख्य सचिव को पूर्ण तथ्यों के साथ प्रस्ताव भेजेगा 
- इसके बाद जेडीए संपूर्ण तथ्यों सहित प्रस्ताव नगरीय विकास विभाग को भेजेगा 

अब तक ये की कार्यवाही:- 
- मुख्य सचिव की अध्यक्षता में दोनों एजेंसियों के अधिकारियों की बैठक हुई 
- बैठक में तय किया गया कि प्रमुख सचिव यूडीएच मामले में दोनों एजेंसियों के अधिकारियों से चर्चा करेंगे 
- चर्चा के बाद प्रस्ताव मुख्य सचिव को भेजेंगे

लोहा मंडी योजना:- 
ये करनी है कार्यवाही:- 

- अधिग्रहित ऐसी भूमि जिसका अवार्ड अब तक जारी नहीं किया गया है उन प्रकरणों में खातेदार को 20% आवासीय और 5% व्यवसाय भूमि आवंटित की जाएगी. 
- ऐसे प्रकरण जिनमें खातेदार ने नगद या विकसित भूखंड का मुआवजा नहीं लिया है उनमें भी 20% आवासीय और 5% व्यवसायिक भूमि आवंटित की जाएगी.
- योजना की ऐसी भूमि जिन पर गृह निर्माण सहकारी समितियों की ओर से अधिग्रहण की कार्यवाही से पूर्व कॉलोनी सृजित की जा चुकी है और उस कॉलोनी की भू रूपांतरण की कार्यवाही हो गई है. 
- ऐसे प्रकरणों में सेक्टर रोड की तर्ज पर बतौर मुआवजा भूखंड आवंटित किए जाएंगे लेकिन भूखंड आवंटन की निर्धारित दर भी वसूली जाएगी.  
- ऐसे प्रकरणों में संबंधित खातेदार अथवा सोसाइटी को कोई मुआवजा दिया नहीं जाएगा.  
- जिन प्रकरणों में 15% मुआवजा दिया जा चुका है उन प्रकरणों को खोला नहीं जाएगा. 
-विकसित भूखंड का मुआवजा लेने के लिए संबंधित खातेदार को अदालत में लंबित मामला वापस लेना होगा.

अब तक की कार्यवाही:- 
- मामले में कोई कार्यवाही नहीं की गई

गोपालपुरा बायपास योजना:-
ये करनी है कार्यवाही:- 

- गोपालपुरा बायपास योजना के संबंध में लिए गए नीतिगत फैसले को प्रदेशभर के शहरों में भी लागू किया जाएगा. 
- इसके अनुसार मास्टर प्लान या जोनल डेवलपमेंट प्लान में ऐसी सड़क जिसके दोनों तरफ वाणिज्यिक या मिश्रित भू उपयोग निर्धारित किया गया है. 
- ऐसी सड़कों के खाली भूखंड पर वाणिज्यिक भू उपयोग  स्वीकृत किया जा सकेगा.
- शहरों में आवासीय योजनाओं के ऐसे भूखंड जो ऐसी सड़क पर स्थित है जिस सड़क के दोनों तरफ मास्टर प्लान में भू उपयोग वाणिज्यिक या मिश्रित निर्धारित किया गया है.
- ऐसी सड़कों के दोनों तरफ के भूखंड व भवनों का विस्तृत सर्वे कर करवा कर जोनल डेवलपमेंट प्लान बनाया जाएगा. 
- इस प्लान के तहत सड़क की चौड़ाई, बिल्डिंग लाइन, भवन निर्माण के पैरामीटर, पार्किंग के लिए उपयुक्त स्थल का चयन एवं अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का प्रावधान किया जाएगा.
- सड़क के भूखंडों पर चल रही गैर आवासीय गतिविधियों का नियमन प्लान के मुताबिक संबंधित निकाय शुल्क लेकर करेंगे

अब तक की कार्यवाही:- 
- मामले में कोई कार्यवाही नहीं की गई

अजमेर रोड स्थित वेस्ट वे हाइट योजना:-
ये करनी है कार्यवाही:- 

- खातेदारों को दी जाने वाली 25% विकसित भूमि का आवंटन खातेदार द्वारा प्रस्तुत विकल्प के अनुसार यथासंभव उसी की भूमि में ही किया जाएगा. 
- अवाप्ति के मुआवजे के रूप में मिलने वाले विकसित भूखंड की लीज राशि में प्राधिकरण के हिस्से की 40% की राशि माफ की जाएगी. 
- लेकिन यह छूट केवल मूल खातेदारों और रजिस्टर विक्रय पत्र के आधार पर हितधारकों को ही दी जाएगी.
अब तक ये किया:- 
- 25 खातेदारों ने अदालतों से स्टे ले रखा है. 
- इनमें से 11 खातेदारों ने उन्हीं की भूमि में विकसित भूखंड का मुआवजा देने की शर्त पर अवाप्ति की सहमति दे दी है.

इन मामलों का निस्तारण केवल इसलिए आवश्यक नहीं है कि इससे  जेडीए का खजाना भरेगा बल्कि ये योजनाएं मूर्त रूप लेती हैं तो शहर के नियोजित विकास में भी मदद मिलेगी.
 

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