VIDEO: JDA की उम्मीदों को लगा बड़ा झटका, कई मौजूदा व भावी योजनाएं हुई प्रभावित

VIDEO: JDA की उम्मीदों को लगा बड़ा झटका, कई मौजूदा व भावी योजनाएं हुई प्रभावित

जयपुर: नाहरगढ़ वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के घोषित इको सेंसेटिव जोन के चलते जयपुर विकास प्राधिकरण की मौजूदा और भावी कई योजनाओं पर असर पड़ा है. क्या है पूरा मामला जानने के लिए पढ़ें फर्स्ट इंडिया न्यूज़ की यह खास रिपोर्ट...

आमेर की पहाड़ियों में स्थित नाहरगढ़ वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के प्रोटेक्टेड एरिया के चारों तरफ इको सेंसेटिव जोन निर्धारित किया गया है. केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से इस बारे में 8 मार्च 2019 को अधिसूचना जारी कर दी. इस अधिसूचना की खुद जेडीए के अधिकारियों को भी जानकारी नहीं थी. लेकिन भवन मानचित्र समिति बिल्डिंग प्लान की 4 जनवरी को हुई बैठक में एक प्रकरण पर विचार के दौरान यह मामला खुला. जेडीए अधिकारियों की जानकारी में नहीं होने के कारण पहले तो प्रकरण में रिसोर्ट के लिए एकल पट्टा भी जारी कर दिया गया और तो और राज्य सरकार ने भी पट्टा जारी करने की स्वीकृति दे दी. 

बाद में जब ग्राम नांगल सुसावतान तहसील आमेर में प्रस्तावित रिसोर्ट के निर्माण के लिए नक्शे बैठक में रखे गए तब पता चला कि यह रिसोर्ट तो इको सेंसेटिव जोन के दायरे में आता है. इसके चलते भवन मानचित्र समिति की इस बैठक में प्रकरण को निरस्त करने और मामला सरकार को भेजने का फैसला किया गया. लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं होता. सेंचुरी के प्रोटेक्टेड एरिया व पूरे इको सेंसेटिव जोन के दायरे में करीब 80 वर्ग किलोमीटर का इलाका आता है. जो इलाका इको सेंसेटिव जोन में शामिल किया गया है उसमें जेडीए की कई मौजूदा और भावी योजनाएं शामिल हैं. जेडीए इस इलाके में होटल रिसोर्ट के लिए भूमि नीलामी की योजना बना रहा था लेकिन इस अधिसूचना के चलते जेडीए की योजना पर पानी फिर गया है. आपको बताते हैं कि इस इको सेंसेटिव जोन और प्रोटेक्टेड एरिया के 1 किलोमीटर के बफर जोन में जेडीए रीजन किस तरह शामिल है. 

- इको सेंसेटिव जोन के दायरे में जेडीए रीजन के 13 गांव पूरी तरह या आंशिक रूप से आते हैं.

- कुकस, हरवाड, ढंड, गुणावता, लबाना, अनी, अचरोल, जैतपुरा खींची, छपरेरी, सिंघवाना, चोखलियावास, बगवाड़ा और दौलतपुरा शामिल है.

- जेडीए की संस्थानिक व्यवसायिक स्कीम, परकोटे का चांदपोल की तरफ का कुछ हिस्सा, सुभाष नगर व संजय नगर का हिस्सा शामिल है.

-इसी तरह शास्त्री नगर, पुराना विद्याधर नगर, विद्याधर नगर सेंट्रल स्पाइन, मल्होत्रा नगर विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र, बढ़ारना और अचरोल कस्बा के इलाके शामिल है.

प्रोटेक्टेड एरिया की बाउंड्री से जीरो किलोमीटर से लेकर 13 किलोमीटर तक इको सेंसेटिव जोन निर्धारित किया गया है. प्रोटेक्टेड एरिया के दक्षिण हिस्से में घनी आबादी के चलते इको सेंसेटिव जोन और प्रोटेक्टेड एरिया की बाउंड्री लगभग एक जैसी है. जबकि उत्तरी हिस्से में इको सेंसेटिव जोन 13 किलोमीटर तक फैला हुआ है. साथ ही प्रोटेक्टेड एरिया की बाउंड्री के 1 किलोमीटर के दायरे में बफर जोन तय किया गया है. इस पूरे भाग में बहुत ही कम सीमित गतिविधियां ही अनुज्ञेय है. आपको बताते हैं कि इस इलाके में कौन सी गतिविधि की जा सकती है और कौन सी नहीं...

-  नए होटल व रिसोर्ट का निर्माण प्रोटेक्टेड एरिया की बाउंड्री से 1 किलोमीटर या इको सेंसेटिव जोन की सीमा जो भी नजदीक हो, उस तक के दायरे में नहीं क्या किए जा सकते हैं.

- इस दायरे में किसी भी प्रकार का व्यवसायिक निर्माण भी नहीं किया जा सकता.

- स्थानीय निवासी अपने निवास के लिए तय नियमों के तहत आवासीय निर्माण कर सकते हैं.

- इस दायरे में नई टूरिस्ट एक्टिविटी या मौजूदा एक्टिविटी का विस्तार किया जा सकता है बशर्ते यह टूरिज्म मास्टर प्लान के अनुसार हो.

- प्रदूषण नहीं फैलाने वाली स्मॉल स्केल इंडस्ट्री यहां लगाई जा सकती है.

रेन वाटर हार्वेस्टिंग, ऑर्गेनिक फार्मिंग, कॉटेज इंडस्ट्री बायोगैस व सौर ऊर्जा का उपयोग आदि गतिविधियां की जा सकती हैं. इतना बड़ा इलाका इको सेंसेटिव जोन में आने से जयपुर विकास प्राधिकरण की उम्मीदों को झटका जरूर लगा है. लेकिन यहां अनुज्ञेय गतिविधियों के अनुसार जेडीए की ओर से नई योजनाएं लाने का विकल्प खुला हुआ है.
 

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