जयपुर Rajasthan: मंत्री रामलाल जाट ने बताई 'निकम्मा' शब्द की डेफिनेशन, जानिए क्या है इसकी वजह

Rajasthan: मंत्री रामलाल जाट ने बताई 'निकम्मा' शब्द की डेफिनेशन, जानिए क्या है इसकी वजह

जयपुर: राजस्थान की सियासत (politics of rajasthan) में एक बार फिर निकम्मा शब्द की गूंज चारों ओर सुनाई दे रही है. निकम्मे शब्द ने इन दिनों फिर से प्रदेश का सियासी पारा बढ़ा रखा है. इसी बीच आज राजस्व मंत्री रामलाल जाट (Revenue Minister Ramlal Jat) ने निकम्मा की डेफिनेशन बताई. उन्होंने कहा कि काम नहीं करने वाले को निकम्मा कहते हैं. बच्चा काम नहीं करता उसे निकम्मा कहते हैं, कोई ओछी बात करता है उसे निकम्मा कहते हैं. उन्होंने यह डेफिनेशन आज पीसीसी में जनसुवाई के दौरान दी. 

वहीं उन्होंने इस दौरान कहा कि ERCP को लेकर प्रधानमंत्री ने वादा किया लेकिन वो मुकर गए. पहले कालाधन लाने बात कही, किसानों की आय दोगुना करने की बात कही लेकिन हुआ कुछ भी नहीं. मंत्री रामलाल जाट ने कहा कि ERCP से 13 जिलों के लोगों को लाभ मिलेगा, इसके लिए राज्य सरकार ने अपनी तरफ से 9600 करोड़ रुपए दे दिए लेकिन बीजेपी इसे रोकने का काम कर रही है. 

उन्होंने कहा कि हमारे प्रशासन गांवों के संघ अभियान में कुछ काम रुके तो ऐसे काम हम जनसुनवाई में कर रहे हैं. जनसुनवाई में पटवारी और शिक्षा विभाग में तबादले भी आ रहे हैं. जयपुर के अलावा कई जिलों में पटवारियों की कमी है. रिक्त स्थान पर तबादलों की परिवेदना आ रही है. इसके साथ ही जनसुनवाई में मीडिया भी हमे सुधार का मौका देता है. वहीं उदयपुर की घटना पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि नूपुर शर्मा अगर ये बयान नहीं देती तो मौलाना नहीं आता. मौलाना नहीं आता तो कन्हैयालाल जिंदा होता. 

सतीश पूनिया और गजेंद्र सिंह शेखावत पर भी साधा निशाना:
इस दौरान मंत्रा रामलाल जाट ने सतीश पूनिया और गजेंद्र सिंह शेखावत पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि ये लोगों को काट पीटने की बात करते हैं. वहीं सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि आज धर्म के नाम पर जाती को लड़ाया जा रहा है. देश का विघटन होने की स्थिति हो गई है. भाजपा सामाजिक समरसता को तोड़ने का काम कर रही है. ऐसे में धार्मिक भावनाओं को भड़काने वालों को सरेआम फांसी पर लटकाया जाए. हम भी हनुमान चालीसा पढ़ते हैं. लेकिन BJP मन के धर्म को भड़काने का काम कर रही है. बीजेपी को भड़काने की बजाय शांति की अपील करनी चाहिए. उदयपुर मामले को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने समय रहते सही तरीके से संभाल लिया. 

गहलोत ने शेखावत पर निशाना साधते हुए उन्हें निकम्मा और एबसेंट माइड तक कह डाला था:
आपको बता दें कि हाल ही में सीएम गहलोत ने शेखावत पर निशाना साधते हुए उन्हें निकम्मा और एबसेंट माइड तक कह डाला था. गहलोत ने कहा है कि ईआरसीपी पर 13 जिले के विधायकों और कांग्रेस नेताओं की बैठक में गहलोत ने कहा-गजेंद्र सिंह खुद प्रधानमंत्री की सभा में थे, आपने देखा होगा फोटो में, इसके बावजूद वे इस तरह की बात बोल रहे हैं. इसका मतलब वो एब्सेंट माइंड रहते हैं, मीटिंग के अंदर. प्रधानमंत्री की मीटिंग में एब्सेंट माइंड रहना अच्छी बात है क्या? इसका मतलब हम कभी कहेंगे कि प्रधानमंत्री जी ऐसे निकम्मे मंत्री को रखते ही क्यों हो जो आपकी मीटिंग में ही एब्सेंट माइंड रहता है. प्रधानमंत्री बोले और आपने सुना ही नहीं, गजेंद्र सिंह खुद कह रहे हैं कि सुना ही नहीं. 

गहलोत ने शेखावत के खिलाफ तंज करते हुए उनके राजनीतिक संयास तक के बयान का जिक्र कर दिया:
मामले में बयान देते वक्त दोबारा गहलोत ने शेखावत के खिलाफ तंज करते हुए उनके राजनीतिक संयास तक के बयान का जिक्र कर दिया. गहलोत के तीखे बयानों के बाद मंत्री शेखावत ने जवाब देते हुए कहा कि ऐसे शब्दों कि राज्य के मुखिया से नहीं की जा सकती. शेखावत ने कहा कि गहलोत साहब के बिगड़े बोल से स्पष्ट लग रहा है कि वो गहरे मानसिक दबाव में हैं. एक ओर कुर्सी जाने का डर हमेशा उन्हें सताता रहता है, दूसरा राज्य उनसे संभल नहीं रहा है. कानून-व्यवस्था समेत राज्य में सबकुछ चौपट हो गया है. निकम्मा वाले बयान का जिक्र सचिन पायलट की बगावत को वो दिन याद दिला दिया, जिससे सियासी संकट राजस्थान में उभरा था. इस दौरान गहलोत ने पायलट के खिलाफ निकम्मा-नाकारा जैसे शब्दों का प्रयोग किया था.

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