Rajasthan: विकास कार्यों की गुणवत्ता के लिए JDA की तर्ज पर अन्य निकायों में भी लागू की नई व्यवस्था

Rajasthan: विकास कार्यों की गुणवत्ता के लिए JDA की तर्ज पर अन्य निकायों में भी लागू की नई व्यवस्था

जयपुर: जयपुर विकास प्राधिकरण की तर्ज पर प्रदेश के अन्य प्राधिकरण व नगर सुधार न्यासों की ओर से कराए जाने वाले विकास कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है. नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल के आदेश पर लागू यह नई व्यवस्था क्या है? जानने के लिए देखें फर्स्ट इंडिया न्यूज की ये खास रिपोर्ट

प्रदेश के कई विकास प्राधिकरण व नगर सुधार न्यासों की ओर से विकास कार्यों को लेकर मांगी गई निविदा में कई बार निर्धारित बेसिक शेड्यूल रेट से 40 फ़ीसदी तक कम रेट्स प्राप्त हो रही है. इतनी कम रेट पर अनुबंध से होने वाले कार्यों की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में रहती है. बेसिक शेड्यूल रेट एक स्टैंडर्ड रेट होती है जिस पर किसी कार्य को किया जा सकता है. जयपुर विकास प्राधिकरण में भी पिछले दिनों इस तरह के मामलों से निपटने के लिए निविदा में चयनित फर्म से वर्क परफॉर्मेंस गारंटी लेने की व्यवस्था शुरू की गई. अब इसी व्यवस्था को प्रदेश के दूसरे निकायों में भी लागू करने के नगरीय विकास विभाग ने आदेश जारी कर दिए हैं आपको बताते हैं आखिर क्या है यह नई व्यवस्था...

- निविदा में कई बार ऐसी फर्म का चयन होता है जिसकी दी हुई रेट बेसिक शेड्यूल रेट (BSR) से कम होती है.

- इस नई व्यवस्था के तहत ऐसी चयनित फर्म को अपनी दी हुई रेट और बेसिक शेड्यूल रेट के अंतर की राशि वर्क परफॉर्मेंस गारंटी के तौर पर निकाय को बैंक गारंटी के रूप में देनी पड़ेगी.

- अगर फर्म की ओर से किया गया कार्य गुणवत्ता के लिहाज से संतोषजनक नहीं पाया जाता. 

- अथवा डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड में कार्य गुणवत्ता के लिहाज से सही नहीं पाया जाता है.

- तो निकाय वर्क परफॉर्मेंस गारंटी की राशि को जब्त कर लेगा.

यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के सख्त आदेश के बाद जेडीए की तर्ज पर विकास प्राधिकरण और नगर सुधार न्यासों में यह व्यवस्था लागू की गई है. इस व्यवस्था को  प्रभावी रूप से लागू करने के लिए नियम-कायदे तय किए गए हैं. आपको बताते हैं कि ये  नियम-कायदे क्या हैं. 

- निविदा में चयनित फर्म को काम शुरू करने के लिए निकाय की ओर लैटर ऑफ एक्सेप्टेंस जारी होने के 14 दिन के भीतर वर्क परफॉरमेंस गारंटी की राशि बैंक गारंटी व एफडीआर के तौर पर जमा कराना होगी.

- अगर तय अवधि में यह राशि चयनित फर्म की ओर से जमा नहीं कराई जाती है तो उसकी अमानत राशि को निकाय जब्त कर लेगा.

- फर्म की ओर से किया गया कार्य संतोषजनक नहीं होने पर वर्क परफॉर्मेंस गारंटी की राशि तो जब्त होगी ही साथ ही संबंधित फर्म के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी.

- फर्म की ओर से किया गया कार्य गुणवत्तापूर्ण है और डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड में भी फर्म ने संतोषजनक काम किया है तो यह वर्क परफॉर्मेंस गारंटी की राशि निकाय फर्म को लौटा देगा.

राज्य सरकार ने निकायों को सख्त हिदायत दी है कि इस नई व्यवस्था को लागू करने से पहले कोई निविदा जारी कर दी गई है तो उस निविदा में भी वर्क परफॉर्मेंस गारंटी वसूलने का प्रावधान किया जाए. इसके लिए निविदा में संशोधन किया जाए. वर्क परफॉर्मेंस गारंटी जमा कराने से काम मे गुणवत्ता की उम्मीद की जा सकती है. लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो अगर फर्म के कार्यों की निचले स्तर से लेकर ऊपरी स्तर तक प्रभावी मॉनिटरिंग की जाए तो भी हालात काफी हद तक सुधारे जा सकते हैं. 

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