जयपुर VIDEO: कब आएंगे मुकुंदरा के अच्छे दिन ? क्या टूरिज्म हो सकता है बचाने की आखिरी उम्मीद

VIDEO: कब आएंगे मुकुंदरा के अच्छे दिन ? क्या टूरिज्म हो सकता है बचाने की आखिरी उम्मीद

जयपुर: मुकंदरा में बाघ बसाने को पूरे दो साल हो गए हैं लेकिन इस सच के साथ ही एक और भयानक सच जुड़ा हुआ है कि मुकंदरा को उजड़े हुए भी एक वर्ष हो चला है. देखते ही देखते यहां सात बाघ हो गए और प्रशासनिक लापरवाही कहें या प्रबंधन की कमियां यहां महज एक बाघिन बची है वो भी जिंदगी की जंग लड़ रही है. 

जी हां, प्रदेश का तीसरा टाइगर रिज़र्व यानी मुकंदरा अब तक के सबसे बुरे दौर से गुज़र रहा है. 8 वर्ष पहले वर्ष 2013 में 9 अप्रैल को वसुंधरा सरकार में प्रदेश के तीसरे टाइगर रिज़र्व की घोषणा हुई थी इसके बाद से लोग मुकुन्दरा से काफ़ी उम्मीदें लगाए बैठे रहे लेकिन नकारा सिस्टम औऱ नई सोच की कमी के चलते पालिसी मेकर्स नें इसका बंटाधार कर दिया. मुकुन्दरा प्रदेश का एकमात्र टाइगर रिज़र्व है जिसमें चम्बल जैसी नदी इसका अहम हिस्सा है और रिज़र्व के कोर टाइगर हैबिटेट से होकर बहती है. काली सिंध इसकी सपोर्टिंग नदी है. गराड़िया महादेव, गेपर नाथ, जवाहर सागर डैम, रावठा, कोलीपुरा, गिरधरपुरा, दर्रा, सावन भादो डैम,  गागरोन का दुर्ग, प्राचीन रॉक पेंटिंग्स, लक्ष्मीपुरा और नौलाव के तालाब और प्राचीन शिकार औधियाँ यहां की शान है. गराड़िया, गेपरनाथ और गिद्ध कराई में लंबी चौंच वाले गिद्ध की लार्जेस्ट ब्रीडिंग साइट है. 

भालू और पैंथर मुकुन्दरा में आसानी से दिख जाते हैं:
यहां चंबल की कराइयों में मगरमच्छ का अपना साम्राज्य है तो औटर भी आपको अठखेलियाँ करते नज़र आ जाते हैं. बोट राइड करते हुए राजस्थान में शायद ही कहीं आपको भालू और पैंथर नज़र आए लेकिन मुकुन्दरा ये आसानी से दिख जाते हैं. यहां उल्लुओं की कई प्रजातियां हैं जिसमें, ब्राउन फिश आउल, डस्की ईगल आउल, इंडियन ईगल आउल, और मोटेल्ड वुड आउल प्रमुख है. यहां वुल्फ यानी भेड़िये की सबसे अच्छी साइटिंग होती है. तो कई पक्षी और रेप्टर्स भी यहां देखने को मिलते हैं. जल दुर्ग गागरोन का किला यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट है. इतनी खूबियां होने पर भी यहां अभी तक जनता के लिए वास्तविक रूप में टूरिज़म स्टार्ट नहीं हो पाया. मात्र कुछ लोगों नें यहां चोरी छिपे अवैध सफारियाँ करके मुकुन्दरा की छवि को बहुत नुकसान पहुंचाया जिनपर वन विभाग कोई भी कार्यवाई करने में नाकाम रहा. 

रोज़ रोज़ की तू और तेरा नें भी मुकुन्दरा को छवि धूल में मिलाके रख दी:
सलाहकार समिति के कुछ लोग बस इस बात पर झगड़ते रहे कि नाव मेरा आदमी चलाएगा की तेरा. इस रोज़ रोज़ की तू और तेरा नें भी मुकुन्दरा को छवि धूल में मिलाके रख दी. सलाहकार समितियों में झालावाड़ बूंदी औऱ  चित्तौड़ से किसी भी वन्यजीव मामलों के जानकारों को नहीं लिया गया. 16 गांवों के विस्थापन का काम भी मंद गति से चल रहा है. तो कई स्टाफ वाले ही अवैध सफ़ारी वालों का साथ देते नज़र आए. स्टाफ की कमी के कारण अधिकारी इनका ट्रांसफर नहीं करना चाहते बस इसी बात का फायदा कुछ कर्मीक उठाते रहे. कुछ पुराने अधिकारियों नें ग्रामीणों को दोस्त बनाने की जगह उनके ख़िलाफ़ बेवज़ह मुकदमे किए जिसका परिमाण भी मुकुन्दरा के वन्यजीवों को भुगतना पड़ा. नकारा वायरलेस सिस्टम कंम्यूनिकेशन गैप और लोगों वन्यजीव प्रेमियों से तालमेल की कमी के चलते मुकुन्दरा का भट्टा बैठ गया. एन्टी पोचिंग और सर्वेलांस सिस्टम नकारा सिद्ध हुआ. 

शिकारियों की ज़मानत हो गयी और विभाग लीपा पोती में लगा रहा:
शिकारियों की ज़मानत हो गयी और विभाग लीपा पोती में लगा रहा. फ़िलहाल मुकुन्दरा में एक मात्र बची बाघिन की भी हालत अच्छी नहीं है. विशेषज्ञों का मानना है कि अब व्यवस्थाओं को ठीक करते हुए. बाघ का प्रे-बेस बढ़ाया जाए, स्वेच्छिक रिलोकेशन में तेज़ी लाई जाए. स्टाफ को री शफल कर मोनिटरिंग में अच्छे और ईमानदार स्टाफ को रखा जाए, अवेयरनेस प्रोग्राम किए जाएं. मुकुन्दरा में जैसे बोट सफारी है वैसे ही जिप्सी सफारी भी शुरू की जाए. नेचर गाइड की भर्ती की जाए उन्हें ट्रेंनिंग दी जाय. इंटरप्रिटेशन सेंटर बनाया जाए. सलाहकार समिति में नए जानकार लोगों को जोड़ा जाए. तब जाके कहीं मुकुन्दरा का भला हो सकता है. 

मुकुन्दरा को बचाना है तो टूरिज़म जल्द से जल्द शुरू करना होगा:
फ़िलहाल यहां डेडिकेटेड ऑफिसर्स लगे हुए हैं लेकिन यहां वन्यजीव प्रेमियों के आए दिन के झगड़ों से वो भी परेशान हैं कि वन्यजीव संभालें, स्टाफ संभालें की रोज़ के वन्यजीव प्रेमियों के अलबत्ता ठेकेदारों के झगड़े निपटाएं. बाघ विहीन हुए सरिस्का और पन्ना भी अब बाघों से आबाद हैं उसके पीछे वहां के कर्मचारियों और अधिकारियों के अथक प्रयास हैं और वहां वन्यजीव प्रेमियों ठेकेदारों में झगड़े भी नहीं हैं. इसलिए यदि हमको अब मुकुन्दरा को बचाना है तो व्यवस्थाओं को सुधारते हुए टूरिज़म जल्द से जल्द शुरू करना होगा. एक सुझाव यह भी आया कि एमटी 4 को सेल्जर शिफ्ट किया जाए और 2 नए नर मादा बाघ बाघिन को 28 हेक्टेयर के एनक्लोजर में लाया जाए. एमटी 4 के लिए भी एक नर बाघ लाया जाए तो मुकुन्दरा वापस पटरी पर आ जाएगा. साथ ही प्रे बेस बढ़ाने के लिए कंजरवेशन ब्रीडिंग प्रोग्राम शुरू किया जाए.
 

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