जयपुर VIDEO: जयपुर में भू-माफियाओं को बड़ा झटका, RHB की सक्रियता के चलते लगा झटका

VIDEO: जयपुर में भू-माफियाओं को बड़ा झटका, RHB की सक्रियता के चलते लगा झटका

जयपुर: हाउसिंग बोर्ड की सक्रियता और लगातार प्रयासों से भूमाफियाओं को बड़ा झटका लगा है. शहर में बीटू बाईपास पर स्तिथ करीब 1500 करोड़ बाजार कीमत की जमीन जिसे भूमाफिया हड़पने का प्रयास कर रहे थे वह मामला अब एसीबी तक पहुंच गया है. राजधानी के बीटू बाईपास पर श्रीराम कॉलोनी की बेशकीमती का मामला अब एसीबी तक पहुँच गया है. हाउसिंग बोर्ड की ओर से अवाप्त जमीन को खुर्द बुर्द करने के प्रयासों को लेकर जवाहरपुरी भवन निर्माण सहकारी समिति के पदाधिकारियों और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियमन की प्रक्रिया शुरू करने वाले जेडीए के तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी एसीबी में मुकदमा दर्ज हुआ है. इसके साथ ही अपनी अवाप्तशुदा जमीन की सुरक्षा करने में नाकाम रहे हाउसिंग बोर्ड के तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी मुकदमा दर्ज किया गया है.

फर्जीवाड़े को रोकने के लिए कई बड़े कदम उठाए: 

42 बीघा जिस जमीन को हाउसिंग बोर्ड ने काफी समय पहले अवाप्त किया था उस जमीन को जवाहरपुरी भवन निर्माण सहकारी समिति काफी समय से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खुर्द बुर्द करने के प्रयासों में लगी हुई थी. 2019 में तो सोसायटी के पदाधिकारियों ने जेडीए के अधिकारियों से सांठगांठ कर इस जमीन के नियमन की प्रकिया शुरू कर दी थी,लेकिन जब यह मामला हाउसिंग बोर्ड के कमिश्नर पवन अरोड़ा के संज्ञान में आया तो उन्होंने इस फर्जीवाड़े को रोकने के लिए कई बड़े कदम उठाए. अरोड़ा के निर्देशों के बाद हाउसिंग बोर्ड ने जेडीए की ओर से की जा रही नियमन प्रक्रिया के विरोध में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी. पवन अरोड़ा के दखल के बाद जेडीए बैकफ़ुट पर आ गया और जेडीए ने इस जमीन से जुड़ी नियमन की प्रक्रिया वापस ले ली, ऐसा पहली बार हुआ था जब किसी सरकारी संस्था ने दूसरी संस्था की कार्यवाही के विरोध में कोर्ट में याचिका लगाई हो. हाउसिंग बोर्ड की ओर से जमीन बचाने के प्रयासों के खिलाफ जमीन पर अतिक्रमण करने वाले अतिक्रमियों  में हाउसिंग बोर्ड के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका पेश की थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया.

सोसायटी बना कर लोगों को बांट दिए पट्टे : 

बी टू बाईपास पर इस बेशकीमती जमीन को हाउसिंग बोर्ड ने 1990 में अवाप्त किया था. लेकिन इस जमीन का मामला सुप्रीम कोर्ट पँहुचने के बाद बोर्ड के तत्कालीन अधिकारियों ने इस जमीन को अपने हाल पर छोड़ दिया.जिसका फायदा उठा कर कुछ लोगों ने यहाँ सोसायटी बना कर लोगों को पट्टे भी बांट दिए और निर्माण भी करा दिए,लेकिन जब सोसायटी के पदाधिकारियों ने जेडीए के कुछ अधिकारियों के साथ इस जमीन के नियमन की प्रक्रिया शुरू कराई और यह मामला जैसे ही हाउसिंग बोर्ड कमिश्नर पवन अरोड़ा के संज्ञान में आया इस जमीन की सच्चाई भी सामने आ गयी.

अपनी जमीन को बचाने के लिए हाउसिंग बोर्ड ने क्या क्या प्रयास किये: 

1- जमीन पर की जा रही नियमन की प्रकिया के विरोध में हाउसिंग बोर्ड ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई. बोर्ड की याचिका के बाद जेडीए को बैकफ़ुट पर आना पड़ा,, और नियमन की प्रक्रिया स्थगित हुई.

2- जमीन के नियमन के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने की जानकारी मिलते ही हाउसिंग बोर्ड ने एसओजी में इसका परिवाद दिया. एसओजी ने मामला सांगानेर थाना को भेजा. जिस पर सांगानेर थाने की जांच जारी है.

3- हाउसिंग बोर्ड कमिश्नर पवन अरोड़ा ने फर्जी तरीके से बनी श्रीराम कॉलोनी बी विकास समिति के पंजीयन न
को निरस्त करने के लिए रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव को पत्र लिखा.

4- जमीन की महत्वता को देखते हुए इस प्रकरण की हाईकोर्ट में पैरवी के लिए बोर्ड ने AG को वकील अपॉइंट किया. AG की ओर से इस प्रकरण में पैरवी की जा रही है.

एक समय था जब हाउसिंग बोर्ड अपनी संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं था और काफी संख्या में बोर्ड की संपत्तियों पर कब्जे हुए,लेकिन बतौर कमिश्नर पवन अरोड़ा ने सबसे पहले बोर्ड की जमीनों को कब्जे से मुक्त कराने और कब्जे से बचाने पर फोकस किया. उसी का परिणाम है कि बी 2 बाईपास की करीब 1500 करोड़ की बेशकीमती जमीन ना सिर्फ खुर्द बुर्द होने से बची है बल्कि इस जमीन के हाउसिंग बोर्ड के पास आने की संभावना भी अब बढ़ गयी है.

...फर्स्ट इंडिया के लिए शिवेंद्र परमार की रिपोर्ट 

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