Live News »

VIDEO: पर्यटकों से गुरजार पिंकसिटी, रौनक देख खिले पर्यटन व्यवसायियों के चेहरे

जयपुर: लंबे समय बाद आज राजधानी फिर से पर्यटकों से गुलजार नजर आई. जिस तरफ देखो सैलानी ही सैलानी दिखाई दिए. कनक घाटी से आमेर, नाहरगढ़ और बायोलॉजिकल पार्क तक वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिली. जल महल, जंतर मंतर, हवा महल और झालाना लेपर्ड सफारी में भी पर्यटकों की खासी रौनक दिखाई दी.

खासकर आमेर देखने वालों का हुजूम उमड़ पड़ा: 
बारिश और अवकाश के खुशनुमा संयोग से रविवार को गुलाबी नगर पर्यटकों से गुलजार रहा. गुलाबी नगर पिकनिक मनाते नजर आया. रविवार सुबह से ही जल महल से कनक घाटी और कनक घाटी से आमेर, नाहरगढ़, जयगढ़ और नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क तक पर्यटकों के वाहन दिखाई दिए. खासकर आमेर देखने वालों का हुजूम उमड़ पड़ा. महल में पर्यटकों की आवक से कोरोना संक्रमण का भय दूर होता दिखा और पर्यटकों से महल गुलजार हो गया. 

पर्यटन एक बार फिर मुख्यधारा में तेजी से आगे आ रहा: 
रविवार को कुल 1297 पर्यटकों ने आमेर देखा. हालांकि यह वह संख्या है जिन्होंने टिकट खरीदकर आमेर महल देखा लेकिन जिस तरह से राजधानी में रविवार को सुहावने मौसम के बीच पर्यटकों की भीड़ दिखाई दी उससे साफ नजर आया कि पर्यटन एक बार फिर मुख्यधारा में तेजी से आगे आ रहा है. इन पर्यटकों ने यहां पर इलेक्ट्रिक कार्ट और सैग वे का आनंद उठाया. साथ ही बरसात के मौसम में भुट्टों की भी काफी बिक्री देखने को मिली. मावठे से लेकर हाथी स्टैंड तक वाहनों की लंबी कतारें लगी रही. लोगों ने मानसिंह महल और शीश महल के बाहर जमकर सेल्फ़ी ली.

रविवार को आमेर महल को 57 हजार से ज्यादा की आय भी हुई:
पर्यटकों के आगमन से रविवार को आमेर महल को 57 हजार से ज्यादा की आय भी हुई. आमेर के अलावा नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क और रेस्क्यू सेंटर 500 से ज्यादा पर्यटक पहुंचे. जल महल से लेकर कनक घाटी तक पर्यटक दिनभर पिकनिक मनाते रहे. नाहरगढ़ पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या भी 300 से ज्यादा रही. जंतर मंतर, अल्बर्ट हॉल और हवा महल पर भी पर्यटकों को ज्यादा देखा गया. देखा जाए तो राजस्थान में पर्यटन के लिहाज से अभी ऑफ सीजन चल चल रहा है. लेकिन पिछले 1 सप्ताह में जिस तरह से बारिश हुई है और राजधानी के चारों और हरियाली छाई हुई है उससे पर्यटक गुलाबी नगर की ओर आकर्षित हो रहे हैं. 

पर्यटकों की आवक से ट्रैवल ट्रेड में भी उत्साह का माहौल:
वैसे भी शहर में इस समय हाथी सफारी, लॉयन सफारी और लेपर्ड सफारी कराई जाती है जो जो देश में सिर्फ जयपुर में ही संभव है. झालाना के जंगल हो या नाहरगढ़, कूकस और ढंड की पहाड़ियां हर तरफ पर्यटक पहुंच रहे हैं. पर्यटकों की आवक से ट्रैवल ट्रेड में भी उत्साह का माहौल है और 1 सितंबर से शुरू होने अगले पर्यटन सत्र को लेकर ट्रैवल ट्रेड की आंखों में चमक साफ दिखाई देती है पर्यटन निगम और पर्यटन विभाग को भी पर्यटकों की आवक से उम्मीद है कि आने वाले सत्र में पर्यटकों की संख्या सभी रिकॉर्ड तोड़ देगी. 

और पढ़ें

Most Related Stories

VIDEO: मौजूदा लैंड यूज चेंज रूल्स में होंगे अब व्यापक बदलाव, नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ने दी हरी झंडी

जयपुर: बड़ी जद्दोजहद के बाद तैयार किए गए शहरों के मास्टरप्लान में दर्शाए लैंड यूज में बेतरतीब व बेवजह बदलाव नहीं हो और शहरवासियों की जरूरत के मुताबिक विभिन्न गतिविधियां की अनुमति दी जा सके,इन्हें ध्यान रखते हुए लैंड यूज चेंज रूल्स में व्यापक पैमाने पर बदलाव किए जाएंगे. क्या होंगे ये बदलाव और इनका क्या होगा असर जानने के लिए देखें फर्स्ट इंडिया न्यूज की ये खास रिपोर्ट-

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अक्सर कहते रहे हैं कि बड़ी मेहनत से शहरों के मास्टरप्लान तैयार किए जाते हैं. लेकिन बार-बार लैंड यूज चेंज करके इन्हें बिगाड़ा जाता है. अशोक गहलोत सरकार के पिछले कार्यकाल में मुख्यमंत्री की इसी मंशा के अनुरूप टाउन एंड कंट्री प्लानिंग बिल लाने की कवायद भी शुरू की गई थी. लेकिन यह कवायद तब पूरी नहीं हो पाई. इसके बाद 12 जनवरी 2017 को गुलाब कोठारी प्रकरण में हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण दिए कि बहुत आवश्यक होने पर ही केवल जनहित में ही मास्टरप्लान में दर्शाए लैंड यूज में बदलाव किया जाए. ऐसे में लैंड यूज प्रक्रिया को सख्त बनाने और साथ के साथ आम शहरवासी की रोजमर्रा की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मौजूदा लैंड यूज रूल्स में बदलाव प्रस्तावित किए हैं. इन बदलावों पर नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल अपनी हरी झंडी दे चुके हैं. आपको सबसे पहले बताते हैं कि लैंड यूज रूल्स में प्रस्तावित नए बदलावों में किस प्रकार लैंड यूज चेंज की प्रक्रिया को पहले से सख्त किया गया है.

लैंड यूज चेंज की सख्त प्रक्रिया:

- लैंड यूज चेंज के लिए अब प्रशासनिक शुल्क देना होगा जो 10 रुपए प्रति वर्गमीटर के अनुसार न्यूनतम 5 हजार रुपए और अधिकतम 5 लाख रुपए होगा.

- लैंड यूज चेंज के लिए निर्धारित राशि का दस प्रतिशत और देना होगा.

- निकाय में पदस्थापित वरिष्ठतम नगर नियोजक संबंधित स्थानीय समिति का सदस्य सचिव होगा.

- वर्तमान में नगरपालिकाओं,न्यास और प्राधिकण स्तर की स्थानीय समिति को 3 हजार वर्गमीटर से 6 हजार वर्गमीटर तक आकार की भूमि के लैंड यूज के अधिकार हैं.

- प्रस्तावित बदलाव के अनुसार जिन शहरों में मास्टरप्लान लागू नहीं हैं वहां निकाय की योजना व अनुमोदित अन्य योजना में स्थानीय समितियां 500 से लेकर 4000 वर्गमीटर तक की भूमि का ही लैंड यूज चेंज कर सकेंगी.

- जिन शहरों में मास्टरप्लान लागू हैं वहां कृषि भूमि से मास्टरप्लान के अनुसार लैंड यूज चेंज के आवेदन पर राज्य स्तरीय समिति ही विचार करेगी.

- कृषि भूमि से अकृषि उपयोग के प्रकरणों में कंट्रोल गाइडलाइन्स के अनुसार लैड यूज या एक्टिविटी चाहने पर स्थानीय समितियां 500 से लेकर 4000 वर्गमीटर तक की भूमि का ही लैंड यूज चेंज कर सकेंगी. 

- कृषि भूमि से अकृषि उपयोग के प्रकरणों में मास्टरप्लान या जोनल प्लान या लैंड यूज कंट्रोल गाइडलाइन्स से भिन्न लैंड यूज या एक्टिविटी चाहने पर केवल राज्य स्तरीय समिति की फैसला कर सकेगी.

- पट्टे शुदा भूखण्ड का मास्टरप्लान के अनुसार लैंड यूज चाहे जाने पर स्थानीय समितियां 500 से लेकर 4000 वर्गमीटर तक की भूमि का ही लैंड यूज चेंज कर सकेंगी.  

- पट्टेशुदा  भूखण्ड का मास्टरप्लान या लैंड यूज कंट्रोल गाइडलाइन्स से भिन्न लैंड यूज या एक्टिविटी के आवदेन पर केवल राज्य स्तरीय लैंड यूज चेंज कमेटी ही विचार कर सकेगी. 

- पूर्व मास्टरप्लान में कोई भूमि पेरिफेरल कंट्रोल बेल्ट में थी और उसके अनुसार तब पर्मिसिबल एक्टिविटी के अनुसार पट्टा जारी किया गया है. 

- अब ऐसे प्रकरण में मौजूदा मास्टरप्लान से भिन्न लैंड यूज चाहा गया है तो ऐसे प्रकरणों में केवल राज्य स्तरीय समिति ही विचार कर सकेगी. 

{related}

वर्तमान में लागू लैंड यूज चेंज रूल्स वर्ष 2010 में जारी किए गए थे. इन रूल्स में बदलाव कर पहली बार कैटिगिरी वाइज प्रकरणों के अनुसार स्थानीय समितियों को लैंड यूज चेंज के अधिकार दिया जाना प्रस्तावित है. संवेदनशील व महत्वपूर्ण मामलों में लैंड यूज चेंज पर केवल राज्य स्तरीय समिति ही विचार करेगी. इन रूल्स में लैंड यूज कंट्रोल गाइडलाइन्स भी जोड़े जाना प्रस्तावित है. ताकि स्थानीय निवासियों की जरूरत के अनुसार क्षेत्र में आवश्यक एक्टिविटीज की अनुमति दी जा सके और बार-बार मास्टरप्लान में लैंड यूज चेंज करना नहीं पड़े. आपको बताते हैं किस लैंड यूज में कौन-कौनसी एक्टिविटीज की अनुमति दी जा सकेगी.

लैंड यूज कंट्रोल गाइडलान्स में पर्मिसिबल एक्टविटीज: 

- आवासीय लैंड यूज में डे केयर सेंटर,नर्सरी,स्कूल,डिस्पेंसरी,ओल्ड एज होम,धर्मशाला,हॉस्टल,कन्वेनियंट या इनफॉर्मल शॉप्स, रेस्तरां,लेबोरेट्री,लाईब्रेरी,क्लब, हाउसहोल्ड या सर्विस इंडस्ट्री व एमएसएमई इंडस्ट्रीज व पेट्रोल पम्प संचालित हो सकेंगे. 

- व्यावसायिक लैंड यूज में होटल,मैरिज गार्डन,बैंक,वर्कशॉप,गैस बुकिंग एंड ड्रिस्ट्रीब्यूशन सेंटर,सिनेमाघर,मल्टीप्लैक्स,हॉस्पिटल,ट्रक व बस टर्मिनल आदि संचालित किए जा सकेंगे.

- संस्थानिक लैंड यूज में उद्योग, एग्रोबेस इडस्ट्रीज, गैस गोदाम सहित सभी आवश्यक गतिविधियों के संचालन की अनुमति मिल सकेगी. 

लैंड यूज कंट्रोल गाइडलाइन्स में पर्मिसिबल एक्टिविटी में कुछ एक्टिविटीज की अनुमति देने पर स्थानीय समितियां तो कुछ के लिए राज्य स्तरीय समिति अधिकृत होगी. इन एक्टिविटीज के संचालन के लिए सड़क की न्यूनतम चौड़ाई और अन्य तकनीकी मापदंड भी लैंड यूज कंट्राेल गाइडलाइन्स में शामिल किए हैं. लैंड यूज चेंज रूल्स में प्रस्तावित इन बदलावों का खाका मंजूरी के लिए नगरीय विकास विभाग ने विधि विभाग को भेज दिया है. विधि विभाग की मंजूरी के बाद नगरीय विकास विभाग की ओर से इस बारे में जल्द अधिसूचना जारी की जाएगी.

अब विप्रो और फोर्टम मिलकर देखेगीं मार्केट, 5 साल का एग्रीमेंट किया साइन

अब विप्रो और फोर्टम  मिलकर देखेगीं मार्केट, 5 साल का एग्रीमेंट किया साइन

नयी दिल्ली: विप्रो लि. को फोर्टम से ऐप्लिकेशन प्रबंधन (एएमएस) तथा सेवा एकीकरण एवं प्रबंधन (एसआईएम) का पांच साल का अनुबंध  साइन किया है. आपको बता दे कि फिनलैंड मुख्यालय वाली फोर्टम दुनिया की प्रमुख स्वच्छ ऊर्जा कंपनियों में से है. 

विप्रो ने मंगलवार को बयान में कहा कि पांच साल के अनुबंध के तहत वह 18 देशों में 11,500 प्रयोगकर्ताओं के लिए फोर्टम के ऐप्लिकेशन पोर्टफोलियो का प्रबंधन करेगी.  इसके अलावा वह कारोबार की दृष्टि से महत्वपूर्ण ऐप के लिए चौबीसों घंटे समर्थन उपलब्ध कराएगी. 

सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी ने कहा कि वह अपने कृत्रिम मेधा (एआई) तथा ऑटोमेशन मंच विप्रो होल्म्स के जरिये प्रोसेस ऑटोमेशन से अंतिम प्रयोगकर्ताओं के लिए अनुभव को बेहतर बनाएगी. इस करार के वित्तीय पक्ष का खुलासा नहीं किया गया है. 

घोषणा के बाद फोर्टम के उपाध्यक्ष  तुओमास सलोसारी ने कहा है कि हमने विप्रो के लचीले और दक्ष समाधान उपलब्ध कराने के अनुभव और क्षमता को देखते हुए उसे अपना भागीदारी चुना है. कोरोना त्रासदी के बीच ये जोड़ कितना कारगर होगा ये तो वक्त ही बताएगा. (सोर्स-भाषा)

{related}

सरोवर होटल्स चेन के MD अजय के. बकाया की घोषणा, 2021 तक होगा 15 नए होटल्स का इजाफा

सरोवर होटल्स चेन के MD अजय के. बकाया की घोषणा, 2021 तक होगा 15 नए होटल्स का इजाफा

नई दिल्ली: आतिथ्य क्षेत्र की कंपनी सरोवर होटल्स एंड रिजॉर्ट्स की 2021 अंक तक करीब 15 नई संपत्तियां (होटल) जोड़ने की योजना बनाई गई है.  सरोवर होटल एंड रिजॉर्ट्स के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि विस्तार योजना के तहत कंपनी मुख्य रूप से दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में नई संपत्तियां जोड़ेगी.कंपनी फिलहाल भारत और अफ्रीका के 55 गंतव्यों में 93 होटलों का प्रबंधन करती है. इन होटलों में कमरों की संख्या 6,900 है. 

सरोवर होटल्स एंड रिजॉर्ट्स के प्रबंध निदेशक अजय के. बकाया ने कहा कि 2021 की रणनीतिक विस्तार योजना के तहत हम दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में 15 नए होटल जोड़ेंगे. ये होटल पानीपत, मोरबी, डलहौजी, कटरा, डिब्रूगढ़, लातूर, मसूरी, धमतरी, उदयपुर और जालंधर आदि शहरों में जोड़े जाएंगे. उन्होंने कहा कि ये नए होटल सरोवर प्रीमियर, सरोवर पोर्टिकों और गोल्डन ट्यूलिप ब्रांड के तहत खोले जाएंगे. 

इस अवधि में अंतरराष्ट्रीय विस्तार के बारे में बकाया ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय विस्तार की योजना के तहत सरोवर अपने पोर्टिका ब्रांड का विस्तार करेगी. इसके तहत तंजानिया के दार-उस-सलाम में होटल खोला जाएगा. उन्होंने कहा कि आगे भी कंपनी प्रबंधन अनुबंध मॉडल के हिसाब से काम करेगा.हम फ्रेंचाइजी मॉडल के जरिये गोल्डन ट्यूलिप ब्रांड के भी तेजी से विस्तार की तैयारी कर रहे हैं.

कोविड-19 के प्रभाव के बारे में उन्होंने कहा कि इसका उद्योग पर काफी असर पड़ा है. अभी इसका पूरा अनुमान नहीं लगाया जा सकता. उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति के हिसाब से यदि दिसंबर, 2020 तक होटलों की बुकिंग 50 प्रतिशत भी पहुंचती है, तो ज्यादातर होटल मालिकों के लिए अच्छी स्थिति होगी. (सोर्स-भाषा)

{related}

2022 तक 10,000 करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य लेकर मार्केट में उतरेगी Parle Agro

2022 तक 10,000 करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य लेकर मार्केट में  उतरेगी Parle Agro

नई दिल्ली: फेमस कंपनी पारले एग्रो ने 2022 तक 10,000 करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य रखा है. बेवरेजेज क्षेत्र की कंपनी के लोकप्रिय ब्रांड में फ्रूटी और एप्पी फिज जैसे बड़े प्रॉडक्ट्स शामिल हैं. कंपनी की एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि अपने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हम एक नया संयंत्र लगाएंगे तथा एक या अधिक नए प्रमुख उत्पाद पेश करेंगे मगर ये उत्पाद क्या होगें ये हमारे ग्राहको के लिए सरप्राइज होगा. 

आपको बता दे की कंपनी ने 2019 में 6,500 करोड़ रुपये का कारोबार किया था. चालू साल में कंपनी को कारोबार में 10 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद है.  कंपनी ने हाल में नया उत्पाद बी-फिज पेश किया है, जो कि जौ के स्वाद वाला फ्रूट जूस आधारित पेय है. पारले एग्रो की संयुक्त प्रबंध निदेशक एवं मुख्य विपणन अधिकारी (सीएमओ) नादिया चौहान ने कहा है कि सामान्य रूप से एक कंपनी के रूप में हम बड़ी संख्या में नए उत्पाद पेश नहीं करते हैं. हम चुनिंदा नए उत्पाद ही पेश करते हैं और उन्हें आगे बढ़ाने पर ध्यान देते हैं. 2022 तक हम संभवत: एक और नई श्रेणी में उतरेंगे. 

विस्तार के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हम सिर्फ मौजूदा कारखानों का ही विस्तार नहीं करते है.  हम नए गंतव्यों पर नई कारखाना परियोजनाओं के जरिये भी विस्ताार करते हैं.  मौजूदा वृद्धि के हिसाब से हम सामान्य रूप से हर साल एक नया कारखाना लगाते हैं. चौहान ने कहा कि समूची एप्पी फिज और बी-फिज श्रेणी में कंपनी ने अधिकतम वृद्धि हासिल की है और विस्तार किया है.

आपको बता दे की कंपनी फिलहाल आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में नई विनिर्माण इकाई लगाने के लिए परिस्थितियों का आकलन कर रही है और इतना ही नहीं कंपनी इससे पहले  उत्तराखंड के सितारगंज तथा कर्नाटक के मैसूर में पहले ही नई विनिर्माण इकाइयां लगा चुकी है. फिलहाल नया उत्पाद क्या हो सकता है इसकी कोई जानकारी नहीं है.  (सोर्स-भाषा)

{related}

कर्ज लेने के लिए अब किसानों को नहीं होगी परेशानी, महिंद्रा एंड महिंद्रा ने इस बैंक से किया MOU

कर्ज लेने के लिए अब किसानों को नहीं होगी परेशानी, महिंद्रा एंड महिंद्रा ने इस बैंक से किया MOU

नयी दिल्लीः  सरकारी बैंक, बैंक आफ बड़ौदा (बीओबी) ने शुक्रवार को कहा कि कृषि क्षेत्र में वित्तपोषण को बढ़ावा देने के मकसद से उसने टैक्टर के कर्ज उपलब्ध कराने के वास्ते महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के साथ करार किया है. बीओबी अपने 5,000 से अधिक ग्रामीण और अर्ध-शहरी शाखा नेटवर्क के माध्यम से महिंद्रा एंड महिंद्रा के ग्राहकों को ट्रैक्टर ऋण की सुविधा प्रदान करेगा.

{related}

एमओयू कृषि व्यवसाय को देगा बढ़ावाः
बीओबी के कार्यकारी निदेशक विक्रमादित्य सिंह खिंची ने कहा कि समझौता ज्ञापन (एमओयू) कृषि व्यवसाय को बढ़ावा देगा और किसानों को ट्रैक्टर खरीदने में परेशानी मुक्त ऋण सुविधा प्रदान करेगा. उन्होंने कहा कि ट्रैक्टर वित्तपोषण योजना पहली बार प्रायोगिक तौर पर एक वर्ष के लिए उ.प्र. क्षेत्र में शुरू की गई थी और यह सफल रही. उन्होंने कहा कि अब इसे बैंक के 11 क्षेत्रों में विस्तारित किया जा रहा है. इसके अलावा, उन्होंने कहा, बैंक कृषि वित्त पोर्टफोलियो के विस्तार के लिए डेयरी क्षेत्र के स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है.
सोर्स भाषा
 

समाचार एजेंसियों, डिजिटल मीडिया, न्यूज एग्रीगेटर्स 26 प्रतिशत एफडीआई नियम का अनुपालन करें: सरकार

समाचार एजेंसियों, डिजिटल मीडिया, न्यूज एग्रीगेटर्स 26 प्रतिशत एफडीआई नियम का अनुपालन करें: सरकार

नई दिल्ली: डिजिटल मीडिया या वेबसाइट पर सूचनाएं देने वाली कंपनियों या मीडिया समूहों को समाचार उपलब्ध कराने वाली समाचार एजेंसियों, समाचार संग्राहकों को 26 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) सीमा नियमों का पालन करने की जरूरत है. सरकार ने शुक्रवार को यह कहा है.

एफडीआई निवेश को 26 प्रतिशत तक करने की जरूरत:  
उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने कहा कि ‘‘इन कंपनियों को इस स्पष्टीकरण के जारी होने के एक साल के भीतर अपनी एफडीआई निवेश को केंद्र सरकार की अनुमति के साथ 26 प्रतिशत तक करने की जरूरत है.’’

पिछले साल अगस्त में मिली थी अनुमति:
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले साल अगस्त में प्रिंट मीडिया की तरह ही डिजिटल मीडिया के माध्यम से समाचार या सूचनाएं अपलोडिंग या स्ट्रीमिंग के क्षेत्र में सरकारी मंजूरी मार्ग से 26 प्रतिशत एफडीआई निवेश की अनुमति दे दी थी.

इस नियम को लेकर स्पष्टीकरण की मांग की थी:
मीडिया उद्योग के एक वर्ग और विशेषज्ञों ने सरकार के इस इस नियम को लेकर स्पष्टीकरण की मांग की थी. उनका कहना था कि डिजिटल मीडिया में एफडीआई को 26 प्रतिशत पर सीमित रखने से सवाल खड़ा होता है इसे स्पष्ट करने की जरूरत है.

{related}

सरकार की मंजूरी से 26 प्रतिशत एफडीआई निवेश की अनुमति होगी:
विभाग ने कहा कि उसे विभिन्न हितधारकों से इस निर्णय पर स्पष्टीकरण देने का आग्रह मिला था. विभाग ने कहा कि भारत में पंजीकृत और काम कर रही कुछ विशेष श्रेणी की भारतीय मीडिया इकाइयों में सरकार की मंजूरी से 26 प्रतिशत एफडीआई निवेश की अनुमति होगी.

डिजिटल मीडिया इकाइयों शामिल:
इन श्रेणियों में वेबसाइट, ऐप, अन्य मंच पर समाचार और दैनिक जानकारी अपलोड और स्ट्रीम करने वाली इकाइयां, समाचार एजेंसियां जो कि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर डिजिटल मीडिया इकाइयों को समाचार प्रेषित करती हैं और न्यूज एग्रीगेटर्स शामिल हैं.

कंपनी को कुछ और शर्तों का भी पालन करना होगा:
विभाग ने कहा है कि एफडीआई नीति का अनुपालन उस इकाई की जिम्मेदारी होगी जिसमें निवेश किया जाना है. ऐसी कंपनी को कुछ और शर्तों का भी पालन करना होगा. ऐसी कंपनी के निदेशक मंडल में अधिसंख्य निदेशक भारतीय नागरिक होने चाहिये और उसका मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी भारतीय होना चाहिये.

फूड एवं पैकेजिंग कंपनी हल्दीराम का डेटा हुआ लिक, शिकायत दर्ज

फूड एवं पैकेजिंग कंपनी हल्दीराम का डेटा हुआ लिक, शिकायत दर्ज

नोएडा: देश की नामी फूड एवं पैकेजिंग कंपनी हल्दीराम पर साइबर हमले का मामला सामने आया है. इस मामले में कंपनी की तरफ से थाना सेक्टर 58 में शिकायत की गयी है. साइबर अपराधियो ने कंपनी के कई विभाग का डेटा डिलीट कर दिया है, जिसकी वजह से कंपनी को काफी नुकसान उठाना पड़ा रहा है. डेटा वापस करने के एवज में साइबर अपराधियों ने सात लाख रुपये की रंगदारी मांगी है.

पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह के मीडिया प्रभारी अभिनेंद्र सिंह ने बताया कि फूड एवं पैकेजिंग कंपनी हल्दीराम का नोएडा के सेक्टर 62 के सी-ब्लॉक में कॉरपोरेट ऑफिस है. यहां से कंपनी का आईटी विभाग संचालित होता है. हल्दीराम कंपनी के डीजीएम आईटी अजीज खान ने पुलिस को बताया कि 12 और 13 जुलाई की रात में कंपनी पर वायरस अटैक किया गया था. यह अटैक कंपनी के सेक्टर 62 स्थित कॉरपोरेट ऑफिस के सर्वर पर हुआ था. इस अटैक के कारण कंपनी के मार्केटिंग बिजनेस से लेकर अन्य विभाग के डेटा गायब हो गए और कई विभागों का डेटा डिलीट भी कर दिया गया.

{related}

शिकायत के मुताबिक कंपनी की कई महत्वपूर्ण फाइलें भी गायब हो गई. जब इसकी जानकारी कंपनी के उच्च अधिकारियों को हुई तो पहले आंतरिक जांच की गयी. इसके बाद कंपनी अधिकारियों और साइबर अटैक करने वाले अपराधियों के बीच चैट हुई, तो साइबर अपराधियों ने कंपनी से सात लाख रुपए की मांग की.

जानकारी के मुताबिक कोविड-19 संक्रमण काल में जुलाई महीने में दुनिया भर की कई कंपनियों पर वायरस अटैक हुआ था. इसी दौरान देश की बड़ी फूड एंड पैकेजिंग कंपनी हल्दीराम भी इसका शिकार हो गयी. साइबर जगत के विशेषज्ञों के मुताबिक दुनिया भर में फैले एक समूह ने इन कंपनियों पर वायरस अटैक किया था. इस मामले में कंपनी के डीजीएम आईटी अजीज खान की शिकायत पर पुलिस मामले की जांच कर रही है फिलहाल मामले की जांच पड़ताल जारी है. (सोर्स-भाषा)
 

प्रधानमंत्री मोदी की पहल आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया के साथ है इजरायल: इजरायली राजदूत 

प्रधानमंत्री मोदी की पहल आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया के साथ है इजरायल: इजरायली राजदूत 

नयी दिल्ली: भारत सरकार द्वारा इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए एक इजरायली कंपनी का चयन करने की तारीफ करते हुए इजरायल के राजदूत रॉन माल्का ने कहा कि उनका देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के साथ है. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना तथा प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने विनिर्माण आधारित प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) के तहत 16 योग्य आवेदकों को मंजूरी दी है. बड़े स्तर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई के तहत पांच साल के लिए चुनिंदा कंपनियों को भारत में विनिर्मित होने वाले सामानों पर कुछ शर्तों के साथ चार प्रतिशत से छह प्रतिशत तक प्रोत्साहन राशि दी जाती है. 

मोदी सरकार के फैसले का स्वागत: 
सरकार के ताजा फैसले का स्वागत करते हुए माल्का ने ट्वीट किया कि खुशी है कि इजराइल की एक कंपनी नियोलिंक, जो यूटीएल-नियोलिंक का हिस्सा है, उसे भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए भारत सरकार द्वारा चुना गया है. ये भारतीय प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया, निर्यात और आत्मनिर्भर भारत पहल में सक्रिय भागीदारी करने वाली इजरायली कंपनियों की सूची में एक और महत्वपूर्ण वृद्धि है. उन्होंने इस कंपनी के चयन पर पीटीआई-भाषा से कहा कि इससे पता चलता है कि उनका देश भारत की योजनाओं के साथ किस कदर जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच गठजोड़ न सिर्फ सरकारों के बीच, बल्कि व्यापारों के बीच भी है.
सोर्स भाषा