जयपुर Rajasthan: बीस सूत्रीय कार्यक्रम में तय लक्ष्यों को पूरा करने में पिछड़ा जयपुर, सिरोही-जैसलमेर सबसे निचले पायदान पर

Rajasthan: बीस सूत्रीय कार्यक्रम में तय लक्ष्यों को पूरा करने में पिछड़ा जयपुर, सिरोही-जैसलमेर सबसे निचले पायदान पर

जयपुर: बीस सूत्रीय कार्यक्रम (Twenty point programme) में तय लक्ष्यों को पूरा करने में राजधानी जयपुर खासा पिछड़ गया है. नीति आयोग के राज्यों को भेजे लक्ष्यों के आधार पर राज्य की ओर से जारी रैंकिंग (Ranking) में जयपुर की 19 वीं रैंक आई है तो सिरोही और जैसलमेर सबसे निचले 32 वें पायदान पर हैं. 

राज्यों में विकास का पैमाना या मानक का अंदाजा लगाने के लिए बीस सूत्रीय कार्यक्रम में उसके प्रदर्शन को बड़ा आधार माना जाता है. नीति आयोग ने अप्रैल 2021 से मार्च 2022 तक राज्य सरकारों को लक्ष्य दिए थे और उसके अनुसार पूरे वर्ष को चार तिमाही में बांटकर जिलों को उनके प्रदर्शन के आधार पर रैंकिंग जारी की गई है. 

आइए जानते हैं कि इस रैंकिंग के अनुसार कौन से जिले हैं टॉप पर और कौन से जिले पहुंचे निचले पायदान पर...

- जिलों की रैंकिंग ए, बी, सी, डी इन चार श्रेणियों में बांटकर की गई है.

- इसके तहत 36 में से 32 अंक हासिल करके अलवर, भीलवाड़ा, चूरू, झुंझुनूं और सीकर पहले पायदान पर आने में सफल हुए हैं. इन जिलों ने 88.89 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया है. 

- भरतपुर 86.11 प्रतिशत लक्ष्य हासिल करके छठे स्थान पर आया है. 

- इसी तरह बारां और पाली को सातवां स्थान मिला है.

- अजमेर, दौसा, जोधपुर और टोंक 80 प्रतिशत से ज्यादा लक्ष्य हासिल करके संयुक्त रूप से नौवें स्थान पर हैं. 

- बाड़मेर, धौलपुर, डूंगरपुर और हनुमानगढ़ और कोटा को 77 प्रतिशत से ज्यादा लक्ष्य हासिल करने पर 13 वां स्थान मिला है. 

- बीकानेर 75 प्रतिशत लक्ष्य हासिल करके 18 वां स्थान पाने में सफल रहा है. 

- वहीं राजधानी जयपुर सहित जालोर,करौली,नागौर,राजसमंद ये पांच जिलों को 19 वां स्थान मिला है. 

- इन लक्ष्यों को पाने में सिरोही सबसे फिसड्डी रहा है और 36 में से 22 अंकों और 61.11 प्रतिशत हासिल करके उसने जैसलमेर के साथ सबसे निचला 32 वां पायदान ही पाया है. 

नीति आयोग की ओर से राज्यों को कई मानकों के आधार पर लक्ष्य दिए जाते हैं. इनमें ग्रामीण विकास, वन क्षेत्र और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े अलग-अलग बिंदु होते हैं. राज्य सरकार अपनी सुविधा अनुसार इन लक्ष्यों को तिमाही में बांटकर जिलों की रैंकिंग तय करती है. इन लक्ष्यों को पूरा करने और जिलों की रैंकिंग के आधार पर केन्द्र की ओर से योजनावार राशि दी जाती है. 

देरी की वजह से जिले पूरी गंभीरता से लक्ष्यों को पूरा करने में ध्यान नहीं दे पाते:
वहीं बीस सूत्रीय कार्यक्रम उपाध्यक्ष डॉक्टर चंद्रभान का कहना है कि  2022-23 के लिए केन्द्र ने लक्ष्य पूरी एक तिमाही गुजर जाने के बाद दिए हैं. इस देरी की वजह से जिले पूरी गंभीरता से लक्ष्यों को पूरा करने में ध्यान नहीं दे पाते जिससे उनका प्रदर्शन प्रभावित होता है. बीस सूत्रीय कार्यक्रम के तहत लक्ष्य के आधार पर जिलों का प्रदर्शन राज्य के सारे विकास का पैमाना होता है और इसी के चलते इन्हें पूरा करने पर जोर दिया जाता है. 

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