VIDEO: जयपुर को होगी नए एयरपोर्ट की दरकार, अगले 1 दशक में सैचुरेट हो जाएगा जयपुर एयरपोर्ट, देखिए खास रिपोर्ट

VIDEO: जयपुर को होगी नए एयरपोर्ट की दरकार, अगले 1 दशक में सैचुरेट हो जाएगा जयपुर एयरपोर्ट, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुर: कोरोना काल में जयपुर एयरपोर्ट अब फिर से आबाद होने लगा है. हवाई यात्रियों का आवागमन प्री कोविड की स्थिति में पहुंच चुका है. यदि इसी रफ्तार से जयपुर एयरपोर्ट पर एयर ट्रैफिक बढ़ता रहा तो आने वाले 1 दशक में ही जयपुर एयरपोर्ट फ्लाइट संचालन के लिए छोटा पड़ जाएगा. अडानी समूह को जयपुर एयरपोर्ट का संचालन अगले 5 दशक के लिए मिला है, ऐसे में जयपुर शहर में एक नए एयरपोर्ट का विकास करने की जरूरत होगी. 

करीब 2 माह पूर्व जयपुर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का संचालन अडानी समूह ने संभाल लिया है. कोरोना के बाद अब पहली बार फ्लाइट संचालन कोविड से पहले के समकक्ष होने लगा है. बढ़ते हुए यात्रीभार की तुलना में जयपुर एयरपोर्ट पर वर्तमान में सीमित सुविधाएं ही उपलब्ध हैं. वर्तमान एयर ट्रैफिक को देखते हुए तो जयपुर एयरपोर्ट की सुविधाएं संतोषजनक कही जा सकती हैं, लेकिन आने वाले वर्षों में जब इकोनॉमी में सुधार होगा और एयर ट्रैफिक बढ़ेगा, तो उसके लिए एयरपोर्ट बिल्डिंग छोटी पड़ सकती हैं. वर्तमान में जयपुर एयरपोर्ट के 2 टर्मिनल मौजूद हैं. फिलहाल टर्मिनल-1 से फ्लाइट्स संचालित नहीं हो रही हैं. जयपुर एयरपोर्ट के टर्मिनल-2 से वर्तमान में रोजाना 57 फ्लाइट्स का संचालन हो रहा है. हालात ठीक रहने पर अगले 1 दशक में ही फ्लाइट्स की संख्या 150 के पार हो सकती है. वहीं अगले ढाई दशक में फ्लाइट संचालन 500 तक पहुंच सकता है. यानी कि तब जयपुर एयरपोर्ट से सालाना यात्रीभार करीब साढ़े 4 करोड़ हो सकता है. एयरपोर्ट प्रशासन से जुड़े सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2009 में जब एयरपोर्ट टर्मिनल-2 तैयार हुआ था, तब इसे अधिकतम 20 लाख सालाना यात्रीभार क्षमता के लिहाज से बनाया गया था. लेकिन मार्च 2020 में खत्म हुए वित्तीय वर्ष में यात्रीभार 50 लाख से ज्यादा था. यानी एयरपोर्ट टर्मिनल अपनी क्षमता से ढाई गुना अधिक यात्रीभार वहन कर रहा था. हालांकि इस दौरान एयरपोर्ट अथॉरिटी ने डिपार्चर में नया भवन बनाया है, लेकिन यहां भी सिटिंग एरिया में बढ़ोतरी नहीं की जा सकी है.

हालात सुधर रहे, अब ये चुनौतियां जल्द आएंगी 

- टर्मिनल- 2 की बिल्डिंग 23 हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल में है

- 20 लाख सालाना यात्रीभार की क्षमता, जबकि कोरोना से पहले यात्रीभार 50 लाख था

- एयरपोर्ट अथॉरिटी ने वर्ष 2016 में नई टर्मिनल बिल्डिंग का प्लान तैयार किया था

- 1 लाख 25 हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल में 2 नए टर्मिनल भवन निर्माण की थी योजना

- निर्माण इसलिए जरूरी, क्योंकि वर्ष 2018-19 में 54.84 लाख यात्री थे

- अगले 25 वर्षों में जयपुर एयरपोर्ट पर सालाना यात्री भार साढ़े 4 करोड़ हो सकता है

- अभी रोज 57 फ्लाइट संचालित, 25 वर्षों में 500 तक पहुंच सकती है फ्लाइट संख्या

- हालांकि 500 फ्लाइट्स का संचालन जयपुर एयरपोर्ट से संभव नहीं हो सकेगा

- चूंकि 1 रनवे है, ऐसे में 24 घंटे में अधिकतम 250 फ्लाइट ही संचालित हो सकेंगी

जयपुर एयरपोर्ट पर यात्रीभार और फ्लाइट संचालन लगातार बढ़ रहा है. एक दशक पूर्व की तुलना में यात्रीभार और फ्लाइट संचालन 3 गुना बढ़ चुका है. जिस रफ्तार से एयरलाइंस नए विमानों की खरीद कर रही हैं, उससे लगता है कि विमानन क्षेत्र में प्रगति की रफ्तार और ज्यादा बढ़ेगी. ऐसे में अगले 1 दशक में ही जयपुर एयरपोर्ट पर फ्लाइट संचालन पीक पर पहुंच जाएगा. दरअसल जयपुर एयरपोर्ट पर सबसे बड़ी समस्या रनवे की है. जयपुर एयरपोर्ट पर केवल एक ही रनवे है और दूसरे रनवे का निर्माण करने लायक जगह नहीं है. एयरपोर्ट आबादी के बीचों बीच है, ऐसे में विस्तार की गुंजाइश भी नहीं है. एक रनवे से 24 घंटे में अधिकतम 250 फ्लाइट ही संचालित हो सकती हैं. ऐसे में 250 से ज्यादा फ्लाइट होने पर दूसरा एयरपोर्ट बनाना ही होगा. देश के सभी प्रमुख बड़े एयरपोर्ट्स पर 2-2 रनवे हैं. दिल्ली एयरपोर्ट पर 3 रनवे हैं, जबकि मुम्बई, बेंगलूरु,

हैदराबाद, कोलकाता, चेन्नई आदि एयरपोर्ट्स पर दो-दो रनवे हैं. 

10 साल में 3 गुना बढ़ा यात्रीभार, फ्लाइट भी 3 गुना बढ़ी

वर्ष 2010-11 : 16.62 लाख यात्री

वर्ष 2011-12 : 18.62 लाख यात्री

वर्ष 2012-13 : 18.43 लाख यात्री

वर्ष 2013-14 : 19.87 लाख यात्री

वर्ष 2014-15 : 22.04 लाख यात्री

वर्ष 2015-16 : 29.03 लाख यात्री

वर्ष 2016-17 : 38.05 लाख यात्री

वर्ष 2017-18 : 47.57 लाख यात्री

वर्ष 2018-19 : 54.84 लाख यात्री

वर्ष 2019-20 : 50.31 लाख यात्री

वर्ष 2020-21 : 18.50 लाख यात्री (कोरोना से घटा यात्रीभार)

- वर्ष 2010-11 में रोज 20 फ्लाइट थीं, कोरोना से पूर्व 64 फ्लाइट थी

कुल मिलाकर आने वाले समय में जब फिर से हवाई यात्रा बूम पर होगी तो अडानी समूह को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा. सबसे ज्यादा विचार करने की जरूरत राज्य सरकार को है. जेडीए शिवदासपुरा में प्रस्तावित दूसरे एयरपोर्ट का विचार नकार चुका है. लेकिन विमानन विशेषज्ञों की मानें तो दूसरे एयरपोर्ट को लेकर तैयारी अभी से शुरू करनी होगी. शिवदासपुरा या फिर अजमेर रोड पर महला, आगरा रोड पर बस्सी आदि इलाकों में नए अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का विचार अमल में लाना होगा. नए एयरपोर्ट के निर्माण में देरी हवाई यात्रियों के लिए ही परेशानियां बढ़ाएगी.
 

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