Jaisalmer: भारत-पाक सीमा पर शाह, सरहद से पाकिस्तान को देंगे कड़ा सन्देश

Jaisalmer: भारत-पाक सीमा पर शाह, सरहद से पाकिस्तान को देंगे कड़ा सन्देश

Jaisalmer: भारत-पाक सीमा पर शाह, सरहद से पाकिस्तान को देंगे कड़ा सन्देश

जैसलमेर: देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज एक रात भारत-पाकिस्तान सीमा के पास बिताएंगे. बीएसएफ के 57वें स्थापना दिवस के अवसर पर देश के गृहमंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत करेंगे. वे शनिवार को दोपहर जैसलमेर पहुंच जाएंगे. इसके बाद वे तनोट माता के दर्शन के लिए जाएंगे. वहां से वे सरहद पर अग्रिम सीमा चौकी का निरीक्षण करेंगे. जहां जवानों से बात करेंगे. इसके बाद गृहमंत्री रात्रि विश्राम के लिए रोहिताश चौकी पर जाएंगे. इसके बाद रविवार को शहर के शहीद पूनम सिंह स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे. कार्यक्रम में गृहमंत्री सरहद से जवानों के नाम संदेश देंगे. वे अपने भाषण से जवानों का हौंसला बढ़ाएंगे. 

जैसलमेर पहुंचने के बाद शाह पश्चिमी सीमा पर सुरक्षा की समीक्षा करेंगे. वह बीएसएफ अधिकारियों की ओर से की जाने वाली रात्रि पेट्रोलिंग भी देखेंगे. वह क्षेत्र की एक सीमा चौकी पर बीएसएफ अधिकारियों के साथ एक रात्रि व्यतीत करेंगे. यह पहली बार होगा जब गृह मंत्री सीमा के पास बीएसएफ अधिकारियों के साथ रात गुजारेंगे. वह पांच दिसंबर को जैसलमेर में पहली बार हो रहे बीएसएफ के स्थापना दिवस में भी शामिल होंगे. इस इलाके की मुख्य समस्या शिफ्टिंग सेंड ड्यून्स से सीमा सुरक्षा बल गृहमंत्री को रूबरू करवाएंगे ताकि सरहद की सुरक्षा और मजबूती प्रदान की जा सके. 

पानी का इंतजाम भी इस इलाके में करना मुश्किल:
आपको बता दें कि शाहगंज में तूफानी हवाएं चलने से धोरे भी खिसक जाते हैं और तापमान में गर्मियों में 50 डिग्री पार और सर्दी में 2 डिग्री तक आ जाता है पानी का इंतजाम भी इस इलाके में करना मुश्किल है. धूल भरी आंधियों के लिए अभिशापित सरहदी जैसलमेर जिले के शाहगढ़ बल्ज क्षेत्र में शिफ्टिंग सैंड ड्यून्स की वजह से करीब 30 किमी तक की तारबंदी के क्षेत्र पर घुसपैठ की आशंका बनी रहती है. कहीं रेत के टीले तो कहीं सपाट जमीन तो कभी टीला यहां तो कभी कहीं ओर, सुरक्षा प्रहरियों को छकाती यह कुदरती प्रक्रिया लंबे समय से घुसपैठ की आशंका की वजह बनी हुई है. 

अब नई तकनीक का सहारा लिया जा रहा:
शाहगढ़क्षेत्र में तीस किलोमीटर की लंबाई में आंधी चलने के समय रेत के विशाल टीले एक स्थान से दूसरे स्थान पर चले जाते हैं. ऐसे में नीचे से मिट्‌टी निकल जाने के कारण यहां पर तारबंदी के पोल नीचे गिर जाते है. इन पोल को रोके रखने के लिए अब तक किए गए सभी प्रयास नाकाम रहे हैं. इस कारण अब नई तकनीक का सहारा लिया जा रहा है, ताकि मिट्‌टी खिसकने के बावजूद तारबंदी फ्लड लाइट्स के पोल सीधे खड़े रह सकें. 

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