जैसलमेर Jaisalmer: पशु चिकित्सालयों में आधे से ज्यादा पद खाली, लंबे समय से उपकेंद्र बंद

Jaisalmer: पशु चिकित्सालयों में आधे से ज्यादा पद खाली, लंबे समय से उपकेंद्र बंद

Jaisalmer: पशु चिकित्सालयों में आधे से ज्यादा पद खाली, लंबे समय से उपकेंद्र बंद

जैसलमेर: पशुपालन व्यवसाय पर आधारित सरहदी जिले में पशुओं का उपचार पशुपालकों के लिए चुनौती साबित हो रहा है. पशुओं की चिकित्सा व्यवस्था को लेकर बेहतर प्रबंध न होने और चिकित्सकीय सुविधाओं का टोटा रहने के चलते हालत यह है कि पशुपालन विभाग में कुल स्वीकृत पदों की तुलना में आधे पद रिक्त होने के कारण लंबे पशु चिकित्सालय उप केन्द्र पर ताले लटके हुए हैं. जिले में चिकित्सकों और कर्मियों के स्वीकृत 272 पदों में 180 पद रिक्त चल रहे हैं. हालात यह है कि जिले में कई पशु स्वास्थ्य केन्द्रों पर ना तो चिकित्साकर्मी है और ना यहां दवाइयां.

सीमावर्ती जिले जैसलमेर (Jaisalmer) में गायों में फैली लंपी स्किन डिजीज (lumpy skin disease) बीमारी से पशुपालकों को राहत नहीं मिल रही है. वहीं गायों के मरने का सिलसिला लगातार जारी है. धरातल पर हालात चौंकाने वाले है. 10 हजार से अधिक गायें इस बीमारी की चपेट में आ चुकी है. वहीं 1 हजार से अधिक गायें बीमारी से ग्रसित होकर काल का ग्रास बन चुकी है. बीमारी की शुरुआत अप्रैल के पहले सप्ताह से हुई थी. शुरुआत में कई जिलों की टीमें जैसलमेर पहुंची थी. जिसके बाद सर्वे और उपचार का काम शुरु किया गया. 

इस संबंध में न तो सरकार ध्यान दे रही है और न ही स्थानीय जनप्रतिनिधि. हालात यह है कि जिले में स्वीकृत 124 पशु चिकित्सा केंद्र में से 75 केंद्रों पर ताला लगा हुआ है. जिससे पशुपालकों का झोलाछापों से पशुओं का उपचार कराना पड़ रहा है. जैसलमेर में अधिकांश लोग कृषि व्यवसाय है. ऐसें में पर्याप्त मात्रा में पशुधन भी है. लेकिन इनके स्वास्थ्य का जिम्मा पशुपालन विभाग के जिम्मे है. ऐसे में गायों में फैली बीमारी से पशुपालक चिंतित है. गायों के मरने का सिलसिला थम नहीं रहा है. पशुपालक गाय पालन कर अपनी आजीविका चला रहे हैं.

1 लाख 92 हजार गायों का सर्वे किया गया:

ऐसे में कई पशुपालकों की गायें मर चुकी है. अब उनका रोजगार भी छीन गया है. परिवार का लालन पोषण करना भी भारी पड़ रहा है. जिले में करीब 5 लाख से अधिक गायें है. अभी तक 1 लाख 92 हजार गायों का सर्वे किया गया है. सरकार और पशुपालन विभाग (Department of Animal Husbandry) द्वारा वायरस जनित इस बीमारी की रोकथाम को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं. ऎसे मे यह अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है कि जिले के पशुपालक को पशुओं के उपचार को लेकर कितनी परेशानियां झेलनी पड़ रही है.

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