एक बार फिर एनर्जी हब बनेगी स्वर्ण नगरी, अडानी व अमेरिका की ईडन कंपनी ने बनाई निवेश की योजना

एक बार फिर एनर्जी हब बनेगी स्वर्ण नगरी, अडानी व अमेरिका की ईडन कंपनी ने बनाई निवेश की योजना

जैसलमेर: साल 1998 में जैसलमेर में पहली विंड मील स्थापित की गई थी. उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि हजारों की संख्या में विंड मील यहां लगेगी और कई कंपनियां आकर निवेश करेगी. देखते ही देखते जिले भर में विंड मील का जाल बिछ गया और देश विदेश की बड़ी कंपनियों ने यहां निवेश किया. उसके बाद सौर ऊर्जा के लिए भी प्रयास हुए और सोलर प्लांट भी लगे. लेकिन पिछले कुछ सालों से कंपनियों को यहां की विंड व सौर ऊर्जा पॉलिसी रास नहीं आ रही थी जिससे बड़ी कंपनियों का आकर्षण अन्य राज्यों की तरफ बढ़ गया. 

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10 से 15 हजार करोड़ के निवेश की संभावना:
एक बार फिर सरकार ने विंड व सौर एनर्जी की नई पॉलिसी लागू की है और इसका असर यह हुआ कि पॉलिसी लागू होने के 10 दिन बाद ही अडानी व अमेरिका की ईडन कंपनी ने विंड व सौर क्षेत्र में यहां 2 हजार करोड़ निवेश की योजना बना ली. इस संबंध में उन्हें जमीन भी आवंटित कर दी गई है. इसके अलावा कई अन्य कंपनियों ने भी यहां विंड व सौर ऊर्जा प्लांट लगाने की मंशा जताई है और जमीन आवंटन की प्रक्रिया चल रही है. जानकारों के अनुसार नई पॉलिसी यदि कंपनियों को रास आती है तो आगामी दो साल के भीतर जैसलमेर में 10 से 15 हजार करोड़ का निवेश होगा. सरकार के इस कदम से सीधे तौर पर जैसलमेर जिले को फायदा मिलेगा. 

बड़ी संख्या में प्रोजेक्ट लगने की संभावना: 
गौरतलब है कि प्रदेश भर में विंड व सौर ऊर्जा के सर्वाधिक प्रोजेक्ट जैसलमेर में ही है. ऐसे में यह पॉलिसी सीधे तौर पर जैसलमेर पर असर करेगी. कंपनियों को यदि पॉलिसी रास आ गई तो जैसलमेर विकास की ओर अग्रसर होगा. कुछ साल पहले तक जैसलमेर में लगातार विंड मील व सोलर प्रोजेक्ट आ रहे थे. जैसलमेर एनर्जी हब बनने की ओर आगे बढ़ा ही था कि कुछ समस्याओं के चलते कंपनियों का रूख डायवर्ट हो गया. लेकिन अब नई पॉलिसी बनने से एक बार फिर जैसलमेर एनर्जी अब बनने की ओर अग्रसर होगा. बड़ी संख्या में प्रोजेक्ट यहां लगने की संभावना है. पूर्व में 5 से 10 हजार के प्रोजेक्ट वापस जा चुके हैं. कुछ साल पहले स्थानीय समस्याओं के साथ पॉलिसी भी नहीं होने से कंपनियों ने रूख मोड़ लिया और हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट यहां आने के बाद वापस मध्यप्रदेश व गुजरात की तरफ डायवर्ट हो गए थे. जिससे जिले को भारी नुकसान हुआ था. लेकिन अब फिर से कंपनियों को आकर्षित करने के लिए सरकार ने नई पॉलिसी बनाई है और उन्हें अच्छी खासी राहत देने का प्रयास किया गया है. 

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एक बार फिर रोजगार के अवसर खुलेंगे:
जैसलमेर जिले में विंड व सौर क्षेत्र में हजारों करोड़ का निवेश होने से एक बार फिर रोजगार के अवसर खुलेंगे. गौरतलब है कि 1998 के बाद जब विंड क्षेत्र में यहां निवेश हुआ तो कई युवाओं को रोजगार मिला. साथ ही करोड़ों के निवेश के दौरान जैसलमेर के कई व्यावसायों को भी काम मिला. कुल मिलाकर हर तरह से जैसलमेर के लोगों को फायदा पहुंचा था. अब फिर से कंपनियों के यहां आने पर रोजगार के अवसर खुलेंगे. जानकारों के अनुसार जैसलमेर की हवा विंड एनर्जी के सबसे ज्यादा उपयुक्त है. इसी वजह से यहां 2500 से 3 हजार मेगावाट विंड एनर्जी से उत्पादन हो रहा है. वहीं पोकरण की जमीन पर सोलर एनर्जी के लिए बेहतर है. पूर्व में भी पोकरण क्षेत्र में सौर ऊर्जा के कई प्लांट लगे हुए हैं. 

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