VIDEO: मोदी कैबिनेट में दोबारा शपथ लेने के बाद जितेंद्र सिंह का पहला टेलीविजन इंटरव्यू

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/06/11 09:43

जयपुर: हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में एनडीए को मिले प्रचंड बहुमत के बाद पीएम मोदी ने लगातार दूसरी बार देश की बागडोर संभाली है. मोदी सरकार में जम्मू-कश्मीर से इकलौते मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का पदभार ग्रहण करने के बाद पहली बार फर्स्ट इंडिया के स्पेशल शो The New JC Show में सरकार के पिछले और आगे के कामों को लेकर चर्चा की. जानिए चैनल हैड जगदीश चंद्र की केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से खास बातचीत के मुख्य अंश:

सवाल-अभी आपने लोकसभा का चुनाव उधमपुर से 3 लाख 57 हजार के रिकॉर्ड अंतर से जीता. जो जम्मू कश्मीर की हिस्ट्री में सबसे ज्यादा है. ये चमत्कार कैसे हुआ. 

जवाब-आपकी बहुत बहुत शुभकामनाएं और आशीर्वाद. मैं समझता हूं ये लोगों का स्नेह प्रेम है और सबसे ज्यादा तो धन्यवाद के पात्र और नमन उन वोटरों को जिन्होंने भारी संख्या में मतदान किया. दिल से मतदान किया और जो विकास के कार्य उनके लिए किए गए, उनको उन्होंने सराहा, स्वीकार किया. उन्हें स्वीकार किया, उन्हें पुरस्कृत किया. हालांकि हमारे विपक्ष ने काफी प्रचार किया कि मोदी जी की स्कीमों का कोई लाभ नहीं पहुंचा. विकास के कार्य जमीन पर दिख नहीं रहे, लेकिन जब मैं सोचता हूं, उसका विश्लेषण करता हूं. तो मैं सोचता हूं कि हमें इतनी बड़ी संख्या में वोट मिले. तो निश्चय ही उन लोगों ने भी वोट डाला होगा. जिन तक शायद हमारा कार्यकर्ता कभी पहुंच भी नहीं पाया होगा. जिनके साथ शायद हमारा सीधा सीधा संपर्क नहीं रहा हो. जो शायद बीजेपी के विधिवत सदस्य भी नहीं हों, लेकिन मोदी जी की जनहित की जितनी योजनाएं हैं. उनसे वे प्रभावित थे. और मोदी जी के आशीर्वाद से इस संसदीय क्षेत्र में विकास के जो कार्य हुए हैं. वे अद्भुत हैं.  क्रांतिकारी हैं. जो 70 सालों में कभी नहीं हुए. उनके ये लोग लाभार्थी थे. चूंकि 70 प्रतिशत वोटरों की संख्या 40 वर्ष की आयु से कम की है. भले ही विपक्षियों द्वारा प्रचार कैसा भी किया गया हो. या कहीं कहीं मीडिया भी बहकावे में आ जाता है. लेकिन जिन्होंने वोट देकर हमें जिताना था. उनको विकास दिखा. उनको मोदी जी की योजनाओं का लाभ पहुंचा. भले ही दूसरों को दिखा कि नहीं दिखा. जैसे मैनें अगले दिन कहा. VOTERS COULD SEE THE VIKAS, OTHERS COULD NOT SEE. और इतनी बड़ी जीत इन साइलेंट वोटर्स की वजह से ही है. मुझे लगता है कि ये एक दिशा बदलने वाला चुनाव है. जिससे हमें ये भी सीखने को मिला. कि यदि काम किया जाएगा. और ईमानदारी से लोगों के प्रति समर्पण होगा. निस्वार्थ भाव से. तो आपको लोग समर्थन देंगे. क्योंकि ये युवाओं का देश है. लेकिन जब छल कपट की राजनीति आई. उसमे आपको उसके लिए जवाबदेही भी देनी पड़ेगी. और वो सबक भी सिखाएंगे. दूसरे शब्दों में मैं कह सकता हैं. कि जो पिछले चुनाव की चतुराइयां थीं. अब अगले चुनाव में नहीं चलने वाली. 

सवाल-46 TO 61. इतना वोट शेयर. MIRACLE

जवाब-ये समझने वाली बात है . कि हमारा चुनावी क्षेत्र है. ये बहुमुखी चुनावी क्षेत्र है. इसमें 35 से 40 प्रतिशत लोग मुस्लिम समुदाय के हैं. वो धारणा भी जाती रही. कि MINOTRITIES . MUSLIMS. बीजेपी को वोट देने में संकोच करते हैं. क्योंकि भारी संख्या में हमें उन एसेंबली सेग्मेंट से समर्थन मिला. जो मुस्लिम प्रधान थीं. मैं समझता हूं वो इसलिए. कि मोदी जी ने हमें एक सुंदर मंत्र दिया. सबका साथ सबका विकास. उस पर ईमानदारी से अमल करते हुए. हमें 2014 में जिन क्षेत्रों में पिछड़ना पड़ा था. या जो मुस्लिम बहुल थे. हमनें वहां भी विकास कार्यों में कोई कसर नहीं छोड़ी. उन लोगों के  बीच में हमने जाकर कहा. कि ये आपके ऊपर निर्भर है. कि आपको ईमानदारी से काम करने वाली. विकास के नए नए प्रोजेक्ट्स लाने वाली सरकार या प्रतिनिधित्व चाहिए. या फिर कोई यहां आकर मजहब के नाम पर कान में फूंक डाले. आप उसके बहकावे में आ जाएं. और उन्होंने एक नई तरह की सूझ बूझ का प्रदर्शन किया. कि मजहब धर्म एक जगह. लेकिन जो हमारी आकांक्षाओं को पूरा करने वाला है. उसके साथ अपना पक्ष रखना है. मैं समझता हूं ये जो नया ASPIRATIONAL INDIA है. उसका भी एक संकते है. 

सवाल-महबूबा की पार्टी कैसे साफ हो गई. इसी का नतीजा है. तीनों सीटें. 

जवाब-अब वो जमाना जाता रहा कि लोग भाषण से वोट दे दें. हो सकता है कि आने वाले चुनावों में जनसभाओं का चलन भी जाता रहे.  लोग अपना मन बनाते हैं. ये जो 40 वर्ष से कम आयु के युवा वोटर है. ये अपना मन स्वयं बनाते हैं. अपने माता पिता के कहने पर भी नहीं आते. माता पिता के दृष्टिकोण से भी ये तभी सहमत होंगे, जब ये CONVINCED होंगे. प्रतिनिधि भी वो सफल होगा , जो इनको अपना बच्चा समझेगा. अपने माता पिता की तरह सरकार से भी ये अपेक्षा इन  बच्चों में है. जो राजनेता उस कसौटी पर पूरे नहीं होते. जैसा आपने इशारा किया. जो पुराने जमाने की चतुराइयों से चल रहे हैं. कि मजहब के नाम पर भड़काने का काम किया. जात पात के नाम पर विभाजित करने का काम किया. वो राजनीति पर धीरे धीरे असफल होती दिख रही है. 

सवाल-303 और 353 का जो मिरेकल हुआ है. इसका मैसेज क्या है कंट्री के लिए. 

जवाब-सबसे पहले तो ये है कि जो शायद हमारे विपक्षी नहीं समझ सके. हमारे विश्लेषक नहीं समझ सके. और मीडिया में भी कुछ मित्र नहीं समझ सके. कि इस देश की 130 करोड़ जनता ने चुनाव से पहले ही ये मन बना लिया था. कि इस देश का भविष्य यदि सुरक्षित है , यदि प्रगतिशील है. तो उस नेतृत्व का नाम है नरेन्द्र मोदी. उनसे बढ़कर , उनसे बेहतर ना कोई विकल्प है. ना दिखता है. दूसरी ओर जिस प्रकार की विश्वसनीयता मोदी जी के लिए पिछले 5 वर्षों में पैदा हुई. 2014 में हम आए थे. हमें परखा नहीं गया था. बहुत सारी योजनाएं सामने रखी थीं. मोदी जी ने पहले दिन आते ही ये कहा था. मेरी सरकार गरीब को समर्पित है. मुझे नहीं लगता कि कितनी गंभीरता से इस बात को समझा गया होगा. उस समय. क्योंकि नेता आते हैं, जाते रहते हैं. आप जब 5 वर्ष पीछे मुड़कर देखते हैं. कोई भी ऐसी योजना नहीं है. जो आखिरी कतार में खड़े आखिरी व्यक्ति तक नहीं पहुंची. बिना किसी भेदभाव के. भले ही आप उज्ज्वला की बात कीजिए. घर घर में गैस पहुंची. ये नहीं पूछा गया, कि ये हिंदू का घर है या मुस्लिम का. ये भी नहीं पूछा गया कि आपने वोट बीजेपी को डाला था. या किसी और पार्टी को. जरूरतमंद है तो पहुंचा. बिजली , 19 हजार गांव ऐसे थे. मोदी जी की परिकल्पना थी कि,,,21वीं शताब्दी में वो बिजली से क्यों वंचित रहें. वहां बिजली पहुंची. ये नहीं पूछा कि वहां किसका घर था. प्रधानमंत्री आवास योजना 2022 तक पूरी तरह से मुकम्मल हो जाएगी.  लोगों में एक विश्वसनीयता पैदा हुई. कि ऐसा नेतृत्व ऐसा प्रधानमंत्री जो कह रहा है वो उस पर अमल कर रहा है. और इसी बात का हमने भी अनुसरण किया है. अपने क्षेत्र में.  सबका साथ सबका विकास का मंत्र आगे बढ़ाते हुए. जहां हम 2014 में पिछड़े थे. वहां भी विकास कार्यों की गति को कम नहीं होने दिया. और वहां से भी लोगों ने हमें समर्थन दिया. यही कारण है 2014 में जो समर्थन मोदी जी को मिला था. उससे भी बढ़कर 2019 में मोदी जी को मिला. ये आम विश्लेशकों की समझ से बाहर इसलिए है. कि विश्लेषण करने के मापदंड और क्राइटेरिया भी अब बदल चुके हैं. वो अब लागू नहीं होते, जो पिछले चुनाव में होते थे. 

सवाल-तो ये लहर 2014 के चुनाव से पड़ी थी

जवाब-2014 में मोदी जा का एक मॉडल था. जो गुजरात में दिखा था. और देश परेशान था. जिस तरह से वंशवाद का प्रशासन चल रहा था. भ्रष्टाचार बहुत बढ़ गया था. युवा यहां से कूच कर रहे थे, विदेश जा रहे थे. बाहर रहने वालों को ये कहने में भी शर्मिंदगी महसूस होती थी. कि हम भारत मूल के थे. देश निजाद चाहता था. और नरेन्द्र मोदी के नाम पर एक EXPERIMENT उनके सामने आया. क्योंकि उन्होंने गुजरात का मॉडल देखा था. और उन्हें लगा कि गुजरात मॉडल की REPLICATION देश भर में हो. तो देश का भविष्य बदले. तो चुनौती के तौर पर मोदी जी ने बागडोर संभाली. लेकिन 5 वर्ष में वो उन्होंने कर दिखाया. जिसकी अपेक्षा लोगों को थी. और आशा की लहर विश्वास की लहर बन गई. 2014 में मोदी जी के प्रति श्रद्धा थी. वो कई गुना वोटों में बढ़ गई. 

सवाल-क्या आपको लगता है कि पुलवामा और एयर स्ट्राइक गेम चेंजर थे. 

जवाब-जहां तक मोदी जी की और उनकी सरकार का संबंध है. पहले ही दिन से कहा गया था. ZERO TOLERANCE TOWARDS TERRORISM. लोगों में ये बात घर कर गई थी. कि नेता बड़ी बातें करते हैं काम कोई नहीं करता. लेकिन पहली बार किसी नेता ने इस पर अमल करके दिखाया है. मेरे चुनावी क्षेत्र का बहुत बड़ा हिस्सा INTERNATION BORDER से जुड़ा है. वहां के गांव में आप जाइए. लोग स्वयं इस बात के साक्षी हैं. भले ही वो बीजेपी से इससे पहले जुड़े कि नहीं जुड़े. लेकिन वो ये कहते हैं कि जिस प्रकार से जवाबी कार्रवाई पाकिस्तान के खिलाफ इस बार हुई है. ऐसी हमें दशकों में देखने को नहीं मिली. पुलवामा के बाद जिस प्रकार की कार्रवाई की गई. मुझे लगता है कि NARRATIVE OF RETALIATION बदल गया. पहले ही चोर के घर जाकर उसे ध्वस्त करने का नया अध्याय आरंभ किया मोदी जी ने. 

सवाल-ATOMIC THREAT जो धमकी थी पाकिस्तान की. उसे आपने RULE OUT कर दिया. 

जवाब-मोदी जी ने ये कर दिखाया. जो उन्होंने कहा था 2014 में. इसलिए उनकी विश्वसनीयता बढ़ी. उनके प्रति जो आशा थी वो विश्वास में बदल गई. लोगों में ये विश्वास पैदा हुआ कि अब हम सुरक्षित हैं मोदी जी के हाथो में. ये देश सुरक्षित है. 

सवाल-CAST FACTOR भी टूट गया इस चुनाव में. ऐसा लगा. 

जवाब-यदि कास्ट फैक्टर होता . जैसा पहले होता था. तो हमें इतनी बड़ी जीत नहीं हासिल होती. हमारे क्षेत्र में 3 लाख 57 हजार से ज्यादा की जीत मिली है. जो जम्मू कश्मीर के इतिहास में सबसे बड़ी है. उसका एक कारण ये भी है , कि उन वर्गों ने , जो कास्ट के भय या PREJUDICE के कारण हमें वोट नहीं देते थे. उन्होंने भी हमें वोट दिया. उसमें सबसे प्रमुख है मुस्लिम समुदाय. बढ़चढ़ करके वोट दिया गया. जिन पोलिंग बूथ में हम जीरो रहते थे. वहां 20-30 प्रतिशत वोट मिले. इसी प्रकार शेड्यूल कास्ट. जिनके बारे में कहा जाता था कि उनकी नेचुरल CHOICE कांग्रेस है. उन्होंने हमें वोट दिया. कांग्रेस उनके साथ बहलावा किया करती थी. उस पर अमल नहीं किया. वो भारतीय जनता पार्टी और मोदी जी ने कर दिखाया. उदाहरण के तौर पर 10 PERCENT RESERVATION IN PROMOTION.बहुत साहसी ये निर्णय था. कई बार लोग हमें चेतावनी देते थे. कि दूसरे वर्ग नाराज हो जाएंगे. लेकिन मोदी जी ने कहा कि न्याय के लिए जो निर्णय लेना पड़ेगा वो निर्णय लेंगे. क्योंकि हम यहां समाज चलाने आए हैं. देश चलान आए हैं. सरकार चलाने नहीं आए हैं. कि हम वोट की CONSIDERATION से कोई फैसला लेने में संकोच करें. 

सवाल-क्या आपको नहीं लगता है कि नरेन्द्र मोदी बदल रहे हैं. पहले से और बढ़े हो रहे हैं. अभी उन्होंने कहा जिनका विश्वास हमारे साथ नहीं था, उनका विश्वास हमें जीतना है. केरल में कहा जिन्होंने दिया ठीक है. जिन्होंने नहीं दिया उनका भी हम भला सोचते हैं. 

जवाब-सबका साथ. सबका विकास में अब मोदी जी ने जोड़ दिया सबका विश्वास. मुझे लगता है 21वीं शताब्दी में  भारत में यही मूल मंत्र रहने वाला है. और इस मंत्र जन्मदाता मोदी जी इतिहास में याद किए जाएंगे. 

सवाल-पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. इस घटना को आप कैसे देखते हैं. 

जवाब-उसमें बहुत ज्यादा टिप्पणी करना हमारे लिए बहुत ज्यादा उचित नहीं है. ये प्रधानमंत्री जी का प्रेरोगेटिव रहता है. मोदी जी हर व्यक्ति की क्षमता और केपेसिटी को इतनी अच्छी तरह समझते हैं. मैं ईमानदारी से कहता हूं. कि इंसान को अपनी केपेसिटी का इतना अंदाजा नहीं होगा, जितना मोदी जी को उसकी केपेसिटी के बारे में पता होगा. उन्होंने संगठन में काम किया. जमीनी कार्यकर्ता के रूप में काम किया. संगठन से बड़े करीब से वो वाकिफ रहे. उनके अंदर INTUTIVE SENSE है. कि किस कार्यकर्ता या व्यक्ति में क्या कार्य करने की क्षमता है. किस तरह का काम पहले नहीं लिया गया. वो ये कर सकता है. इसी को समझते हुए उन्होंने दायित्वों का विभाजन किया है. 

सवाल-HOW IS HE DIFFERENT THANT OTHER PARTY PRESIDENTS. आपका तो उनके साथ अनुभव है काम करने का. 

जवाब- आपने बहुत अच्छा प्रश्न किया. अमति शाह जी ने किसी भी राजनैतिक दल के अध्यक्ष की कार्यशैली को बदल दिया. कार्य संस्कृति को इसलिए बदल दिया. इतना बदल दिया कि दूसरे दलों के लिए परेशानी बन जाएगी. THEY WILL HAVE TO AMULATE THE WORK STYLE OF AMIT SHAH AS A PARTY PRESIDENT. चाहे वो कोई भी राजनैतिक दल हो. एक जमाना था जब किसी भी पार्टी के अध्यक्ष का CEREMONIAL सा दायित्व रहता था. समापन भाषण दिया. स्वागत भाषण दिया.  इन्होंने माइक्रो लेवल तक मैनेजमेंट किया. एक-एक लोकसभा क्षेत्र का. एक-एक असेंबली सेगमेंट का. परिश्रम और मेहनत का तो आप अनुमान ही नहीं लगा सकते. सुबह से लेकर के देर रात आधी रात तक काम करना है. देश भर में प्रवास करना. और उस प्रवास के दौरान टेलीफोन पर उपलब्ध रहना. मल्टी टास्किंग करना. मैं तो समझता हूं कि अद्भुत क्षमता के धनी हैं वो. राष्ट्रीय अध्यक्ष की तो कार्यशैली वे लाए हैं, इसकी किसी को कल्पना तक नहीं थी. .और अब अगर किसी और राजनीतिक दल को सर्वाइव करना होगा. तो उन्होंने अमित शाह की कार्यशैली का अनुसरण करने वाला कार्यकर्ता ढूंढना पड़ेगा. अमित शाह तो दूसरे हो नहीं सकते. 

सवाल-मैं सुना कि उनका विकल्प फिलहाल नहीं मिल रहा है. इसलिए दिसंबर तक. महाराष्ट्र , झारखंड के चुनाव हो जाएं. तब तक पार्टी चीफ वही रहेंगे. ऐसा सुनने में आ रहा है. 

जवाब-संगठन में हमारी एक प्रक्रिया है. वहां सामूहिक निर्णय लिया जाता है. जो व्यापक हित में होता है. वो सदा सबके हित में ही साबित होता है. 

सवाल-क्या आपको लगता है कि अमित शाह के गृहमंत्री बनने से जम्मू कश्मीर के जो मसले हैं. तो जल्दी सुलझेंगे. 

जवाब-मुझे तो ये विश्वास है कि अब अमित शाह जिस दायित्व में होंगे. वो मसला जल्द सुलझेगा. क्योंकि उनमें DECISIVENESS है. PROMPTNESS है. QUICK COMPREHENSION है. हर विषय को वे तुरंत समझ जाते हैं. और तुरंत उसका समाधान भी उनके ध्यान में आ जाता है. 

सवाल- दिसंबर में चुनाव होने की बात है जम्मू कश्मीर में. क्या लगता है आप सरकार बनाने जा रहे हैं अपने बूते पर. 

जवाब-मुझे विश्वास है पहले से हमारी परफॉर्मेंस  बेहतर रहेगी. हम सबसे बड़ा दल बनकर उभरेंगे. सरकार हमारी बनेगी. यदि हमारी अपने दम पर सरकारी नहीं बनती है. तो कोई और दल भी हमारे बिना सरकार नहीं बना पाएगा. जिस प्रकार हमारा विस्तार हुआ है. हमारी स्वीकृति हुई है. कश्मीर घाटी में भी. उन क्षेत्रों में भी जहां पर कभी बीजेपी की झंडा लहराया भी नहीं जाता था. वहां पर बीजेपी का गुणगान है. ये बहुत बड़ी उपलब्धि है. ना केवल संगठन की दृष्टि से. बल्कि राष्ट्रवाद की दृष्टि से. लोगों को ये समझ आ गया है कि जम्मू कश्मीर में भी जिस प्रकार की सकारात्मक भूमिका बीजेपी की पार्टी बीजेपी की सरकार निभा सकती है. उस प्रकार की क्षमता दूसरे राजनीतिक दलों में नहीं है. नेशनल कॉन्फ्रेस और पीडीपी जैसे दल . THEY HAVE OUT LIVED THIR LIFE TIME. क्योंकि वंशवाद का जमाना जाता रहा. ये सारे दल आतंकवाद के माहौल में पनपे हैं. 10 प्रतिशत मतदान हुआ तो पिताजी एमपी बन गए. 10-15 प्रतिशत मतदान हुआ तो साहबजादे मुख्यमंत्री  बन गए. और इसी तरह इन्होंने 25-30-40 साल निकाल दिए. आज भी मैं दावे के साथ कहता हूं. अगर खुला मतदान कश्मीर घाटी में हो. तो बीजेपी बाकी दलों से कहीं आगे होगी. 

सवाल-तो हो सकता है कि किसी दिन श्रीनगर में हिंदू मुख्यमंत्री बैठे 

जवाब-वो मैं नहीं कहना चाहूंगा. हिंदू मुस्लिम हो. लेकिन किसी को इसलिए दरकिनार ना किया जाए. कि उसका मजहब क्या है. या उसका मूल क्षेत्र क्या है. LET THE MOST CAPABLE BE THE CHIEF MINISTER, AND THEN CONSIDER WHETHER HE IS FROM KASHMIR OR JAMMU. लेकिन जो पहले एक स्वभाव बन गया. कि कश्मीर घाटी से ही हो और एक धर्म विशेष से हो वो रिवायत और परंपरा स्थापित करने का भी इलजाम जाता है. तो इन्हीं दलों पर जाता है. चाहे तो नेशनल कॉन्फ्रेंस हो, चाहे वो पीडीपी हो. चाहे वो कांग्रेस की इकाई हो. जिन्होंने क्षेत्र के नाम पर राजनीति की. धर्म के नाम पर राजनीति की. समाज को विभाजित कर अपना वोट बैंक  CONSOLIDATE किया. बीजेपी का मूलमंत्र है. JUSTICE TO ALL, APPEASEMENT TO NONE. और आज मैं दावे से कहता हूं कि कश्मीर घाटी में भी 60-70 प्रतिशत मतदान हो, जैसा देश में होता है, तो यहां वंशवाद का खात्मा हो जाएगा. सिवाए बीजेपी के कोई और VIABLE पार्टी वहां देखने को नहीं मिलेगी. 

सवाल-वहां DELIMITATION की संभावना. 

जवाब- इसका संबंधित एजेंसिया समय समय पर इसका अध्ययन करके फैसला करेंगी. चाहे डि-लिमिटेशन हो, या एसेंबली का कार्यकाल 6 साल का हो. ये सब नेशनल कॉन्फ्रेंस की दोहरी राजनाति का एक प्रमाण है. NATIONAL CONFERENCE ALWAYS MANIPULATED THE INDIAN CONSTITUTION FOR HIS CONVENIENCE. उसका सबसे छोटा उदाहरण मैं आपको देता हूं. ये वैसे तो भारत के संविधान को गाली देते हैं. जब इनको लाभ होता है तो संविधान से बड़ा प्रेम हो जाता है. शेख अबदुल्ला मुख्यमंत्री थी, इंदिरा जी ने इमरजेंसी घोषित की. जिसे आज भी BLACK ERA OF INDIAN DEMOCRACY. उसमें इंदिरा जी ने एक ऐसा एमेंडमेंट लाया 43-44.जिसकी बाद में बड़ी आलोचना हुई. जिसमें विधानसभाओं और संसद के कार्यकाल को 5 वर्ष से बढ़ाकर 6 वर्ष किया. वो असंवैधानिक भी था. गैर लोकतांत्रिक भी था. IT IS CONSIDERED TO BE ONE OF THE DARKEST AMENDMENT OF THE CONSTITUTION. उस समय शेख अब्दुल्ला को भारतीय संविधान से बड़ा प्रेम हो गया. और वफादारी निभाते हुए तुरंत उस प्रावधान को अपनी विधानसभा में पास करवा दिया. और अपनी असेंबली के कार्यकाल को 5 साल से बढ़ाकर 6 साल कर दिया. अब 2-3 साल बाद जब मोरार जी भाई प्रधानमंत्री बने. जनता पार्टी की सरकार बनी. तो ये अमेंडमेंट रिवर्स कर दिए गए. 2-3 सालों में ही देशभर में विधानसभाओं का कार्यकाल 6 से फिर 5 साल होता है. जम्मू कश्मीर में मुख्यमंत्री उस समय भी शेख अब्दुल्ला थे. लेकिन उस समय उनकी संविधान के प्रति वफादारी नहीं जागी. उस समय वो अलग हो गए. कि हमारा तो अलग संविधान है. हम वो अपनाते हैं जो हमारे हित में होता है. ये जनता के हित में तो हो नहीं सकता. हां उस परिवार और उस व्यक्ति विशेष के हित में जरूर रहा होगा. तो भारत में सिर्फ जम्मू कश्मीर में एसेंबली का कार्यकाल 6 वर्ष का है. तो  BLACK ERA OF EMERGENCY में बने काले कानून को अपनाने में इन्होंने कोई विलंब नहीं किया. लेकिन जो उसमें सुधार लाने का कानून बनाया गया. उसको इन्होंने आंखे बंद करके दरकिनार कर दिया. और वहीं डि-लिमिटेशन के संबंध में. 2026 तक उसको फ्रीज कर दो. ताकि जैसा है वैसा चलता रहे. एक दो राजनीतिक दलों की प्रभूसत्ता बनी रहे. 

सवाल-धारा 370 में भी कहते हैं ऐसा हुआ. गुलजारी लाल नंदा के समय बात उठी थी, कि इसे बदल दो. 

जवाब-आने वाले समय में क्या है, उस पर टिप्पणी करना मेरे लिए उचित नहीं होगा. लेकिन कांग्रेस वाले भी समझते हैं कि हम भूल गए. नेशनल कॉन्फ्रेंस वाले भी समझते हैं कि हम भूल गए. अब तीन पीढ़ियां बदल गईं. और पत्रकारिता में भी नए लोग आ गए. लेकिन हम भूलने वाले नहीं हैं, और हम लोगों को भूलने नहीं देंगे.  370 की सबसे ज्यादा पैरवी करने वाले जवाहर लाल नेहरू थे. नेहरू भी ये मानते थे कि ये TEMPORAY प्रावधान है. ये प्रोसीडिंग में लिखा हुआ है. एक उनका प्रसिद्ध वाकया रहा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी वहां थे. मसूदी वहां थे. उनसे ये कहा कि साहब इसपर पुनर्विचार करना चाहिेए. तो उनके सांत्वना देने हुए पंडित नेहरू ने कहा था . कि आप इस पर विचार ना करें,. ये तो ऐसे ही है. RC है . अस्थायी है . घिसते घिसते घिस जाएगी. अब देखिए. जो जन्मदाता था उसने ये कहा. आपका कहना ठीक है. जब गुलजारी लाल नंदा गृहमंत्री थे. इस पर डिबेट हुई. एक डिबेट हुई थी जब नेहरू जी जिंदा थे. लगभग 1963 में. 1964 में उनका स्वर्गवास हुआ. उसके बाद शास्त्री जी के समय में भी डिबेट हुई. उस समय भी गुलजारी लाल नंदा ने कहा कि हमें लगता है. कि इसका जाने का समय आ गया. कुछ समय दिया जाए. कि इस पर कैसे आगे बढ़ा जाए. फिर उनकी सरकार बदल गई. लगभग 60-65 के बाद जो सरकारें आई हैं. इनमें एक VESTED INTEREST DEVELOP हो गया. कि हम विभाजन की राजनीति करते रहें. और वोट बैंक को SEPRATIST या  SEMI-SEPRATIST ऑर्गन से CONSOLIDATE करें. और इस कारण जो संविधान भारत का जम्मू कश्मीर के हर तरह से हित में लागू हो चुका है. वो भी इन्होंने करवाया. जब शेख अब्दुल्ला ने 1975 में EYEWASH के तौर पर कमीशन बैठाया. और पता चला कि करीब 200 संविधान ऐसे हैं भारत के जो लागू हो चुके हैं. तो उन्होंने कहा कि ठीक है जनहित में हैं. कहने का अर्थ ये है कि इनका कोई अपना स्टैंड नहीं है. .बीजेपी का जो स्टैंड था. श्यामाप्रसाद मुखर्जी से लेकर आज तक वही है. 

सवाल- 35A पर क्या विचार है

जवाब-इस पर तो कानूनी विशेषज्ञ बात करेंगे. एक जनरल राय ये है कि ये IT IS A CONSTITUTIONAL एब्रेशन. जिस तरह से लाया गया. वो प्रक्रिया भी उतनी अनुकूल नहीं थी. 

सवाल-कश्मीरी पंडियों को लेकर अब कोई उम्मीद. क्या लगता है 2-4-6 महीनों में. 

जवाब- कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए आज तक किसी ने कुछ किया है तो वो बीजेपी ने किया है. आगे भी कुछ करेगी बीजेपी ही करेगी. सन 89-90-91 के दौरान जब उनका वहां से विस्थापन हुआ. तो उस समय जहां जहां बीजेपी की सरकारें थीं. वहां पर इनके लिए विशेष प्रावधान किए गए थे. इनके बच्चों के लिए शिक्षा संस्थानों में एडमिशन के लिए प्रावाधन था. नौकरियों में प्रावधान था. उस समय भी कांग्रेस ने सिर्फ लिप सर्विस का काम किया. और आज भी बीजेपी सरकार आने के बाद ही इस प्रकार की परिस्थितियां बनाने का प्रयास हो रहा है कि ईमानदारी से पहली बार . क्योंकि हम चाहते हैं कि साथ ही साथ एक ऐसा वातावरण बने जहां कश्मीरी पंडित अपनी इच्छा से बाइज्जत वापस लौट सकें. 

सवाल-कहते हैं कि यश अपयश विधि हाथ. लेकिन मेहनत से भी कभी यश मिलता है. आपको नॉर्थ ईस्ट में मिला था. 5 साल आप इंचार्ज थे. कायाकल्प कर दिया सारा आपने. कैसे किया ये सब. 

जवाब-नहीं, ये तो आपका आशीर्वाद है. मैं ये कहूंगा. इसमें कोई शक नहीं कि 5 साल में नॉर्थ ईस्ट में क्रांतिकारी बदलाव आया है. सबसे ज्यादा श्रेय जाता है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को. मैं ये इसलिए नहीं कह रहा हूं कि उनकी टोली का हिस्सा हूं. 5 साल में 30 बार से ज्यादा मोदी ने दौरा किया. 

सवाल-एयर कनेक्टिविटी सब. 

जवाब-मोदी जी की पर्नसल OUTREACH देखिए. एक-एक प्रदेश में 3-4 बार उन्होंने दौरा किया. जो प्रधानमंत्री वहां से राज्यसभा से चुनकर आते थे. वो भी इतने दौरे नहीं करते थे. उनकी स्वीकृति मान्यता हर प्रदेश में. जहां बीजेपी का पहले इतना अस्तित्व नहीं था. एक डोर में बांधने वाली. जब वे पहली बार मेघायल आए. तो हमे लगा कि हमें जनसभा का आयोजन करना है. थोड़ा सा प्रयास करेंगे मेहनत करेंगे. लेकिन आप अंदाज नहीं लगा सकते . IT IS SEEM TO BE BELIEVED . एयरपोर्ट से राजभवन तक दोनों ओर छोटे छोटे बच्चे एक दूसरे की अंगुली पकड़कर स्वागत के लिए खड़े थे. प्रधानमंत्री जी इतने भावुक हुए कि सिक्योरिटी को दरकिनार करते हुए बच्चों से मिलने आए. इस प्रकार की उनकी पर्नसल आउटरीच रही. कि लोगों को लगा कि हमारे यहां बदलाव आ सकता है तो यही प्रधानमंत्री ला सकता है. .जब हम आए 2014 में तो मेघालव और अरुणाचल प्रदेश में  लोगों ने रेलगाड़ी देखी नहीं थी. आज वहां डबल गॉच रेल ट्रेक है. ईटानगर से अरुणाचल एक्सप्रेस दिल्ली के लिए चलती है. कनेक्टिविटी की बात देख लीजिए. गुवाहाटी से इंटरनेशनल फ्लाइट्स चल रही हैं. ईटानगर में हवाई अड्डा नहीं था. आज वहां काम जारी है. सिक्किम में एयरपोर्ट बनाने का काम मोदी सरकार ने शुरु किया. सड़कों का जाल बिछ गया. एक नया प्रयोग हुआ है. INLAND WATER WAYS. या WATER WAYS HIGHWAYS. ब्रह्मपुत्र नदी से लेकर के बंगाल की खाड़ी तक समुद्री जहाज INLAND WATER TRANSPORT के माध्यम से सामान लाई जाए. चार गुना कम लागत लगती है. साथ में एक ALTERNATIVE MODE OF TRANSPORT. डोनर के बजट से ही पहली बार बांग्लादेश के लिए ट्रेन चालू होने वाली है. अगरतला त्रिपुरा से. जैसे खुशवंत सिंह ने किताब लिखी थी. TRAIN TO PAKISTAN . ये TRAIN TO BANGLADESH है. और उस किताब का जन्म त्रिपुरा अगरतला से होने वाला है. IIT'S का जाल बिछ गया. मेडिकल कॉलेजेज का जाल बिछ गया. ब्रह्मपुत्र पर सबसे बड़ा पुल . जो कनेक्ट कर रहा है आसाम को अरुणाचल को. भूपेन हजारिका के नाम पर रखा गया. मोदी जी ने START UP INDIA. STAND UP INDIA  जैसे कार्यक्रम चलाए, उसे हमें DONOR MINISTRY के माध्यम से थोड़ा और एड ऑन किया. VENTURE FUND. अर्थात जो कोई नवयुक रोजगार के लिए नया काम शुरु करना चाहता है. पूर्वोत्तर में. उसके लिए INITIAL FUND. DONAR मंत्रालय देगा. .उसे अपने माता पिता के ऊपर कोई बोझ नहीं डालना पड़ेगा. उसी का परिणा है कि पिछले 2 सालों में देखते ही देखते ना सिर्फ पूर्वोत्तर बल्कि दूसरे प्रदेशों से गुजरात से कर्नाटक से युवाओं के ग्रुप STARTUP GROUP पूर्वोत्तर आ रहे हैं. अब जाकर के देखिए  5 सालों में जमीन आसमान का अंतर आ गया है पूर्वोत्तर में . वहां के लोगों को ये लग रहा है . दिल्ली में ही पिछले 3 वर्षों में 3 हॉस्टल बनाने का काम शुरु किया. .JNU में हमारा हॉस्टल बन रहा है. वहां लगभग पूर्वोत्र के एक हजार बच्चे पढ़ते हैं. दिल्ली में रोहिणी में हमने जमीन ले ली है. यूनिवर्सिटी के लिए वहां पर एक हॉस्टल बनाएंगे. द्वारिका में हमने प्राइम लैंड लिया है. जहां पर CONVENTION CUM COMMUNITY CENTRE बनाएंगे.  DELHI INTERNATION CENTRE की तर्ज पर. बंग्लौर यूनिवर्सिटी के अंदर हमारा हॉस्टल है. काम करना चालू हो गया है. वो लड़कियों के लिए हॉस्टल सबसे पहले है. पूना में हम बनाने जा रहे हैं. DESTINATION NORTH EAST के नाम से हमने देश भर में नॉर्थ ईस्ट के पेवेलियन लगाने का काम शुरु किया है. मोदी जी के निर्देश पर पहली बार एक नई परंपरा स्थापिक करने का काम शुरु हुआ. हर 15 दिन में केन्द्र से 8 मंत्री पूर्वोत्तर का दौरा करेंगे. .एक ना एक केन्द्रीय मंत्री हर प्रदेश में रहेगा. हर 15 दिन में. एक जमाना था जब 15 महीने में एक केन्द्रीय मंत्री पूर्वोत्तर जाता था. 

सवाल-CBI का इनिशियल चार्ज भी आपके पास है. HOW YOU LIKE TO RESTORE THE CREDIBILITY OF . 

जवाब- ये आपका कहना सही है. सीबीआई में कुछ ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हुई हैं. जिससे उसकी प्रतिष्ठा पर थोड़ी सी ठेस पहुंची. लेकिन जहां तक मोदी सरकार का संबंध है. हमने सभी संवैधानिक संस्थाओं को पूरा सम्मान दिया है. पूरी स्वतंत्रता दी है. भेल ही वो CBI हो. NIA हो . सुप्रीम कोर्ट हो. कभी उनके कामकाज में हस्तक्षेप नहीं किया. जब एक्शन भी लेना पड़ा सरकार को, तो इसलिए लेना पड़ा कि उसकी क्रेडिबिलिटी और प्रतिष्ठा को RESTORE किया जा सके. 

सवाल-मोदी सरकार में चार ब्यूरोक्रेट मंत्री बन गए. कैसा लगता है. आप ब्यूरोक्रेट्स के इंचार्ज हैं. 

जवाब-ये तो पीएम का प्रेरोगेटिव होता है. मोदी जी की खूबी ये है कि वो आदमी की शिनाख्त करना जानते हैं. और आदमी भीतर की केपेसिटी को पहचानते हैं. और कभी कभी उस व्यक्ति को स्वयं भी अहसास नहीं होता. कि मैं ये काम कर सकता हूं. लेकिन  उनको अहसास हो जाता है. उनकी परख इतनी तीखी है. क्योंकि उन्होंने जमीन से लेकर विभिन्न स्तरों पर काम किया है. उनको परख है कि किस व्यक्ति से क्या काम लिया जा सकता है. इसलिए जो भी उनका चयन होता है वो सबके हित में होता है. 

सवाल-सेन्ट्रल GOVERNMENT में आपने EXPERTS को TECHNOCRATES को लिया है. 

जवाब-वो LATERAL ENTRY का पहले भी था. उसको थोड़ा स्ट्रीम लाइन करने का हमने प्रयास किया. SO THAT WE HAVE THE BEST OF THE MERIT IN ADMINISTRATION AND IN GOVERNMENT.कुछ हमारे डेफिसिट भी थे. हमारे पास ब्यूरोक्रेट्स का अभाव भी था. उसकी भी पूर्ति होती है. कुछ एक ऐसे पद जहां पर विशेष प्रकार की प्रशितक्षण की आवश्यकता रहती है. EXPERTISE की आवश्यकता रहती है. यदी उस तरह का उचित व्यक्ति मिलता है तो क्यों ना उसका लाभ लिया जाए. और ये एक सफल प्रयोग साबित हुआ है. 

सवाल-IAS सिलेबल में कोई चेंज करने की सोच रहे हैं. TO BE MORE PRACTICAL MORE RELEVANT

जवाब-एक कमेटी बनाई थी हमने. उसकी रिपोर्ट आई है. उसका भी अध्ययन किया जा रहा है. समय समय पर इन बातों का संज्ञान लिया जाता है. क्योंकि जैसे जैसे देश आगे  बढ़ता है. देश के तकाजे बदलते हैं उसकी जरूरतें बदलती हैं. उसके आयाम  बदलते हैं. अंतरराष्ट्रीय दृश्य बदलता है. उसी हिसाब से हमें अपनी SERVICES में बदलाव लाना पड़ता है. WE ARE AMONG THE BEST CIVIL SERVICES IN THE WORLD.आज ये परिस्थिति है कि हमारे पास विदेशों से सिविल सर्विसेज के बच्चे प्रोबेशनर्स इंटर्न के लिए आते हैं. कुछ एक तो मसूरी में आकर अध्ययन करते हैं. जैसे भूटान की सिविल सर्विसेज की ट्रेनिंग हम ही देते हैं. अपने आईएएस वालों के साथ. 

सवाल-HOW RAHUL GANDHI FAILED TO CONVERT THIS RAFFEL CAMPAIGN. INTO SOMETHING LIKE BOFORS. 

जवाब-दो बाते हैं, आने वाले जमाने में झूठ की राजनीति नहीं चलेगी. 100 बार झूठ बोलो वाली कहावत अब काम नहीं करती. अब लोगों की जेब में गूगल है. जो मैं कह रहा हूं. वो झूठ कह रहा हूं. तो उसका पता तुरंत लग सकता है. इसलिए राफेल में सिर से पांव तक झूठ ही झूठ था. उसने किसी को प्रभावित नहीं किया. .दूसरा वंशवाद की राजनीति समाप्त हो गई है. मोदी जी के आने के बाद प्रजातंत्र में एक नया अध्याय सामने आया है. मोदी जी उसका प्रतीक हैं. कि रेलवे प्लेटफॉर्म से एक बालक ने अपने जीवन की यात्रा प्रारंभ की. धीरे धीरे अपनी प्रतिभा अपनी मेहनत के बलबूते पर इतने ऊंच पद पर आसीन हुआ. कांग्रेस के राज में पैदाइश से पहले ये निश्चित हो जाता था. कौन प्रधानमंत्री बनेगा. तो प्रजातंत्र की आड़ में जो वंशवाद पनप रहा था. उसकी रिजेक्शन हुई है. और वो कांग्रेस पार्टी तक ही सीमित नहीं रही है. दूसरी पार्टियों में भी रहेगी. 

सवाल-अमेठी के बारे में क्या कहना है. 

जवाब-अमेठी में भी ऐसा ही हुआ.  वो कई सालों तक परिवार के नाम पर अपना एजेंडा निभाते रहे. लेकिन धीरे धीरे जब लोगों में बदलाव आया. और उन्होंने देखा. कि जो निर्वाचित प्रतिनिधि था. वो इतना प्रवास नहीं करता था. जितना कि बीजेपी के नेता करते थे. चाहे वो स्मृति ईरानी थीं. या उनके सहयोगी . और वो निर्वाचित नेता . भले ही वो खुद को भावी प्रधानमंत्री कहते हैं. उनके माध्यम से इतने विकास कार्य नहीं हुए. जितने की बीजेपी के माध्यम से हुए हैं. तो लोगों ने अपना मन बदल लिया. 

सवाल-आपको क्या लगता है. अगले 5 सालों में मोदी सरकार में क्या बीड़ी बात होने वाली है. 

जवाब-5 साल खत्म होने से पहले 2022 तक लगभग भारत विश्वमूर्ति बनकर सामने उभरेगा. विजिबल ढंग से. मैं अंतरिक्ष के विभाग को देखा हूं. स्पेस को. 2022 जब देश की स्वतंत्रता के 75 वर्ष होंगे. ON THE EVE OF THAT या उससे पहले हम पहला मानव अंतरिक्ष में भेज चुके होंगे. इसी तरह हर क्षेत्र में हम विश्व से आगे बढ़ चुके होंगे. कभी  किसी ने सोचा था. अंतरिक्ष में हमारी यात्रा कितनी बाद में शुरु हुई. जब रूस अमेरिका अपने रॉकेट अंतरिक्ष में  भेजते थे, तो हम केवल कविता करते थे. आज वो हमसे चित्र लेते हैं. चंद्रमा पर पानी के वजूद का सबूत हमारा चंद्रयान देता है. और नासा को चौंका देता है. हालांकि उनका एक व्यक्ति वहां पर पहुंचा था. लेकिन पानी हमने पहले देखा. अब चंद्रयान-2 अगस्त में जाने वाला है. अगले चार सालों में हम दुनिया में प्रथम श्रेणी में आकर खड़े होंगे. ये कुदरत की इच्छा थी. विधि का ऐसा विधान था कि इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को जाएगा. 

सवाल-तो IT WILL DIFFERENT INDIA . 

जवाब-NEW INDIA. MODI' S INDIA . 


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