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कलराज मिश्र को मिली राजस्थान की जिम्मेदारी, राज्यपाल कल्याण सिंह की जगह संभालेंगे पदभार 

कलराज मिश्र को मिली राजस्थान की जिम्मेदारी, राज्यपाल कल्याण सिंह की जगह संभालेंगे पदभार 

जयपुर: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कलराज मिश्र समेत 5 राज्यपालों के नियुक्तियों/तबादलों पर मुहर लगाई है. राष्ट्रपति भवन से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कलराज मिश्र का तबादला राजस्थान कर दिया गया है. वह इससे पहले हिमाचल के राज्यपाल के तौर पर कार्य कर रहे थे. वे अब राजस्थान के वर्तमान राज्यपाल कल्याण सिंह की जगह पदभार संभालेंगे.

कल पूरा होगा कल्याण सिंह का कार्यकाल:
दरअसल राज्यपाल कल्याण सिंह कल यानि 2 सितम्बर को अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे. वहीं 78 वर्षीय कलराज मिश्र बीजेपी के बड़े नेता माने जाते हैं. कलराज मिश्र भी संघ पृष्ठभूमि से जड़े हुए हैं. कलराज मिश्र ने 75 वर्ष से अधिक उम्र होने के कारण 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ने से मना कर दिया था, तभी से राज्यपाल बनाए जाने के कयास लगाए जा रहे थे. कलराज मिश्र अपने मधुर स्वभाव, आत्मीयता पूर्ण व्यवहार के लिए जाने जाते हैं. 

भाजपा के बड़े नेता:
बता दें कि कलराज मिश्र साल 1991, 1993, 1995 और 2000 में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं. साल 2003 में वे उत्तर प्रदेश और साल 2004 में राजस्थान और दिल्ली के प्रभारी बने. साल 2010 में बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष घोषित किए गए. साल 2012 के विधानसभा चुनाव में विधायक चुने गए. साल 2014 में देवरिया लोकसभा सीट से सांसद बने. अब उन्हें राजस्थान का राज्यपाल बनाया गया है.

कलराज मिश्र का राजनीतिक सफर:
—1977 के चुनाव में पूर्व उप्र के जनता पार्टी के चुनाव संयोजक बने. 
—1978 में कलराज मिश्र को राज्य सभा का सदस्य बनाया. 
—एक जनवरी 1979 को राष्ट्रीय युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए. 
—11 अगस्त 1979 को राष्ट्रीय युवा समन्वयक समिति के संयोजक बने. 
—1980 में भाजपा के निर्माण के बाद भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए. 
—1982-83 में लोकतांत्रिक मोर्चा का गठन. मुलायम सिंह यादव अध्यक्ष व कलराज मिश्र महासचिव घोषित हुए.  
—1986 में उप्र विधान परिषद सदस्य बनाए गए. 
—1991 तक भाजपा के उप्र के महामंत्री संगठन रहे. 
—अयोध्या राम मंदिर कारसेवा आंदोलन से जुड़े रहे. 
—1991, 1993, 1995 व 2000 में भाजपा के चार बार प्रदेश अध्यक्ष रहे. 
—21 मार्च से 17 अगस्त 2000 तक लोक निर्माण, पर्यटन, चिकित्सा शिक्षा मंत्री रहे. 
—12 अप्रैल 2002 के उपचुनाव में निर्विरोध राज्य सभा सदस्य निर्वाचित हुए. 
—2003 में उप्र, 2004 में राजस्थान व दिल्ली के प्रभारी बने. 
—2006 में राज्य सभा सदस्य निर्वाचित. 
—2008 के लोकसभा चुनाव में उप्र के चुनाव प्रभारी. 
—2010 में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने. 
—2012 में विधायक चुने गए. 
—2014 में देवरिया लोकसभा सीट से सांसद बने व केंद्रीय मंत्री बने. 
—2019 के लोकसभा चुनाव में हरियाणा के प्रभारी बनाने गए. 

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Rajasthan Panchayati Raj Election: तीसरे चरण में 63.80 फीसदी वोटिंग, सर्वाधिक मतदान प्रतापगढ़ जिले की पीपलखूंट पंचायत समिति में हुआ

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जयपुर: राजस्थान के 21 जिलों में जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्यों के लिए तीसरे चरण का चुनाव स्वतंत्र-निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हो गया. तीसरे चरण में कुल 63.80 फीसद मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. सर्वाधिक मतदान प्रतापगढ़ जिले की पीपलखूंट पंचायत समिति में हुआ, जहां 82.09 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाले. 

तीसरे चरण का चुनाव सम्पन्न: 
आयुक्त पीएस मेहरा ने बताया कि कोविड महामारी को ध्यान में रखते हुए केंद्र, राज्य, मेडिकल, स्थानीय प्रशासन और राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कोविड संबंधी दिशा-निर्देशों की कडाई से पालना के साथ तीसरे चरण के चुनाव सम्पन्न करवाए गए हैं. उन्होंने बताया कि प्रथम चरण में 61.80, द्वितीय चरण में 63.18 और तीसरे चरण में 63.80 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. उन्होंने मतदाताओं से चतुर्थ और अंतिम चरण में ज्यादा से ज्यादा संख्या में मतदान करने की अपील की है.

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35 लाख 47 हजार 333 मतदाताओं ने किया मताधिकार का प्रयोग:
मेहरा ने बताया कि तीसरे चरण में 55  लाख 59 हजार 791 मतदाताओं में से 35 लाख 47 हजार 333 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. मेहरा ने कोरोना के सभी प्रोटोकॉल की पालना करते हुए मतदान के लिए मतदाताओं का आभार जताया है. उन्होंने कहा कि मतदाताओं के सहयोग और संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और निर्वाचन कार्य से जुड़े समस्त कार्मिकों के समर्पण की भावना से तृतीय चरण के चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न हो सके हैं. उन्होंने सकारात्मक सहयोग के लिए मीडिया के प्रति भी हार्दिक आभार व्यक्त किया.

सोशल डिस्टेंसिंग और कोरोना प्रोटोकॉल की पालना:
मेहरा ने बताया कि सभी जगह सोशल डिस्टेंसिंग और कोरोना प्रोटोकॉल के साथ मतदान प्रारंभ हुआ. सुबह 10 बजे तक 11.60 प्रतिशत मतदान हुआ. दोपहर 12 बजे मतदान का प्रतिशत 27.42 तक पहुंच गया. दोपहर 3 बजे तक प्रतिशत 49.66 तक जा पहुंचा और शाम 5 बजे 61.55 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाले. मतदान समाप्ति के बाद कुल 63.80 फीसद मतदान दर्ज हुआ. गौरतलब है कि जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्यों के चतुर्थ और अंतिम चरण के लिए 5 दिसंबर को मतदान करवाया जाएगा. मतगणना 8 दिसंबर को प्रातः 9 बजे से सभी जिला मुख्यालयों पर होगी.

VIDEO: लंबे वक्त से सियासी नियुक्तियों का इंतजार, निकाय-पंचायत चुनाव बाद होंगी कांग्रेस में नियुक्तियां

VIDEO: लंबे वक्त से सियासी नियुक्तियों का इंतजार, निकाय-पंचायत चुनाव बाद होंगी कांग्रेस में नियुक्तियां

जयपुर: लंबे समय से राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार कर रहे नेताओं को अभी थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है, शेष बचे नगर निकाय और पंचायतों के बाद कांग्रेस राजनीतिक नियुक्तियों का पिटारा खोलेगी. जनवरी और फरवरी माह में अजमेर नगर निगम सहित कई निकायों में चुनाव होने हैं. हालांकि राजनीतिक नियुक्तियों की उम्मीद पाले बैठे कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को झटका भी लगने वाला है. दरअसल चुनाव लड़ चुके नेताओं को यह राजनीतिक नियुक्तियों से दूर रखने की तैयारी की जा रही है. अगर संभव हुआ तो चुनाव लड़कर हारे नेताओं के लिए ये किसी बड़े झटके से कम नहीं होगा. राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर सत्ता और संगठन में कवायद शुरू हो चुकी है. मल मास शुरू होने से पहले कुछ अच्छी खबरें सुनने को मिल सकती है.

राजनीतिक नियुक्तियों के लिए बन रहे नए मापदंड:
पार्टी के  विश्वस्त सूत्रों की माने तो राजनीतिक नियुक्तियों के लिए पार्टी में नए मापदंड तैयार किए जा रहे हैं, पार्टी के विश्वस्त नेताओं ने भी इसके संकेत दिए हैं. बताया जाता है कि नए मापदंडों के मुताबिक विधानसभा, लोकसभा, नगर निकाय और पंचायत चुनावों में पार्टी का टिकट पा चुके नेताओं और कार्यकर्ताओं को राजनीतिक नियुक्तियों में एडजस्ट नहीं किया जाएगा. चाहें फिर वो चुनाव जीते हों या फिर चुनाव हार गए हों. बताया जाता है कि राजनीतिक नियुक्तियों के लिए नए मापदंड बनाना पार्टी की अहम रणनीति है, ये मापदंड लागू करने के पीछे वजह यही है कि  राजनीतिक नियुक्तियों के लिए कार्यकर्ताओं और नेताओं की छंटनी करना है. राजनीतिक नियुक्तियों में लगातार की जा रही देरी भी इसी रणनीति का हिस्सा है.

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प्रदेश में होनी हैं 10 हजार से ज्यादा राजनीतिक नियुक्तियां:
सूत्रों की माने तो विधानसभा, लोकसभा,  नगर निकाय और पंचायत चुनावों में टिकट पा चुके नेताओं और कार्यकर्ताओं का रिकॉर्ड तैयार है. बताया जाता है कि जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक प्रदेश में 10 हजार से ज्यादा राजनीतिक नियुक्तियां होनी हैं जबकि पार्टी के पास लाखों कार्यकर्ताओं की फौज हैं, ऐसे में किसे एडजस्ट किया जाए किसे नहीं, यहीं चिंता सत्ता लेकर संगठन को खाये जा रही थी, जिसके बाद राजनीतिक नियुक्तियों में एडजस्ट होने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं की छंटनी करने के लिए पार्टी में नए मापदंड तैयार किए गए है. अजमेर नगर  निगम सहित कई निकायों और पंचायतों के चुनाव अभी शेष हैं, पार्टी की रणनीति है कि शेष निकायों और पंचायत चुनावों में नेताओं और कार्यकर्ताओं को खपाने के बाद ही राजनीतिक नियुक्तियां की जाए, ऐसे में माना जा रहा है कि नए साल में मार्च के बाद राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला शुरू हो सकता है. राजनीतिक नियुक्तियों में उन कार्यकर्ताओं और नेताओं को एडजस्ट करने की तैयारी हैं, जिन्होंने पार्टी के लिए खूब मेहनत की है लेकिन उन्हें किसी भी चुनाव में टिकट नहीं मिल पाया.

राजनीतिक नियुक्तियों में एडजस्ट करने की तैयारी:
इन प्रमुख बोर्ड, निगम, आयोगों में होंगी राजनीतिक नियुक्तियां होनी है. महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग, अल्पसंख्यक आयोग, ओबीसी आयोग, एससी-एसटी आयोग, किसान आयोग, गौ सेवा आयोग, निशक्तजन आयोग, समाज कल्याण बोर्ड, मदरसा बोर्ड, देवस्थान विभाग, हज कमेटी, अल्पसंख्यक वित्त निगम, राजस्थान पर्यटन विकास निगम, हाउसिंग बोर्ड, माटी कला-केश कला बोर्ड, घूमंतु बोर्ड, बीज निगम,जन अभाव अभियोग निराकरण समिति और  यूआईटी में प्रदेश स्तरीय नियुक्तियां होनी हैं, जबकि इसके इसके अतिरिक्त जिला स्तरीय समितियों में भी राजनीतिक नियुक्तियां होनी हैं. विधायकों को भी राजनीतिक नियुक्तियों में एडजस्ट करने की तैयारी चल रही है. बड़ी संख्या में होने वाली यूआईटी में विधायकों को भी अवसर दिए जा सकते है उन्हे प्रमुख सियासी नियुक्तियों में तरजीह मिलेगी.

...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट

3 दिसंबर शाम को जयपुर में नहीं होगी पानी सप्लाई, सालाना मेंटीनेंस के चलते नहीं हो पाएगा सप्लाई का काम

3 दिसंबर शाम को जयपुर में नहीं होगी पानी सप्लाई, सालाना मेंटीनेंस के चलते नहीं हो पाएगा सप्लाई का काम

जयपुर: मेंटेनेंस कार्य के कारण पंप स्टेशन बंद रहने के चलते 3 दिसंबर गुरुवार को जयपुर शहर में शाम की पानी सप्लाई नहीं होगी. बीसलपुर जयपुर पेयजल योजना के अंतर्गत बालावाला पंपिंग स्टेशन पर पंप मशीनरी एवं इलेक्ट्रिकल सिस्टम की सालाना रखरखाव के दौरान सभी पंप मोटर के एलाइनमेंट, ग्लैंड पैकिंग व ग्रीसिंग कार्य किया जाएगा. 

पंपिंग बंद होने की वजह से नहीं होगी पानी की सप्लाई:
इसी दौरान जवाहर सर्किल रामनिवास बाग, मानसरोवर, सेंट्रल पार्क, अमानीशाह पंप हाउस पर भी सालाना रखरखाव किया जाएगा.इस कारण बीसलपुर जयपुर परियोजना के अंतर्गत सेंट्रल, ईस्टर्न, वेस्टर्न फीडर में पंपिंग सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक बंद रहेगी. अतिरिक्त मुख्य अभियंता देवराज सोलंकी ने बताया कि पंपिंग बंद होने के कारण जयपुर शहर में शाम की पानी सप्लाई नहीं हो पाएगी. 

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जलदाय विभाग ने की उपभोक्ताओं से अपील:
मुख्य रूप से प्रताप नगर, सांगानेर, दुर्गापुरा, मालवीय नगर, बापू नगर, महेश नगर, बरकत नगर, सिविल लाइन, ज्योति नगर, शांति नगर, सिंधी कॉलोनी, आदर्श नगर, जवाहर नगर, संपूर्ण चारदीवारी क्षेत्र, मानसरोवर, श्याम नगर, विद्युत नगर, संजय नगर, झोटवाड़ा ,वीकेआई, विद्याधर नगर, मुरलीपुरा, शास्त्री नगर, सुभाष नगर, ब्रह्मपुरी, आमेर, गोपालवाड़ी, बनी पार्क, अंबाबाड़ी, जगतपुरा, खोनागोरियां, इंदिरा गांधी नगर, मुहाना रोड क्षेत्रों में गुरुवार शाम को सप्लाई नहीं होगी. जलदाय विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे समुचित मात्रा में पेयजल का भंडारण कर ले.

जयपुर की झालाना लेपर्ड सफारी से बड़ी खबर, अंधाधुंध जिप्सी चलाने के चक्कर में जिप्सी नंबर दो पलटी

जयपुर की झालाना लेपर्ड सफारी से बड़ी खबर, अंधाधुंध जिप्सी चलाने के चक्कर में जिप्सी नंबर दो पलटी

जयपुर: लेपर्ड को नजदीक से दिखाने की होड़ में जयपुर झालाना लेपर्ड सफारी क्षेत्र में जिप्सियों की अंधी दौड़ होती है, ऐसा नजारा एक बार नहीं कई बार देखा गया हैं, फिर भी जिप्सी संचालकों पर लेपर्ड सफारी प्रबंधन का नियंत्रण नहीं हैं. जिसकी वजह से हादसे होने का डर रहता हैं. 

जिप्सी में बैठा एक पर्यटक आ गया जिप्सी के नीचे:
ताजा मामला मंगलवार का हैं, झालाना लेपर्ड सफारी पर अंधाधुंध जिप्सी चलाने के चक्कर में जिप्सी नंबर दो पलट गई. जिसकी वजह से जिप्सी में बैठा एक पर्यटक जिप्सी के नीचे आ गया. घायल अवस्था में पर्यटक को अपेक्स अस्पताल पहुंचाया गया.

तेंदुओं के लिए लोकप्रिय सफारी:

आपको बता दें कि झालाना सफारी जयपुर के मध्य में स्थित एक प्राकृतिक क्षेत्र है जो अपने तेंदुओं के लिए लोकप्रिय है. अरावली पहाडि़यों की तलहटी में स्थित झालाना सफारी पार्क अपने आप में एक आदिम जंगल है.

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PCC टीम काउंटडाउन! गोविंद सिंह डोटासरा ने दिए संकेत, दिसंबर में पीसीसी टीम आ जाएगी सामने

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जयपुर: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने दावा किया है कि इसी माह के अंत तक प्रदेश कांग्रेस की कार्यकारिणी सामने आ जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि जिन्हें किसी कारण से निकाय या पंचायत चुनाव में टिकट नहीं मिल पाए उन्हें संगठन में एडजस्ट किया जाएगा.पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह से विवाद की खबरों को भी उन्होंने निराधार बताया.

कांग्रेस कार्यकारिणी को लेकर अटकलें तेज:
प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी को लेकर अटकलें तेज हो गई है. प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने दिसंबर में अपनी टीम के ऐलान की बात कही. मीडिया से बातचीत में उन्होंने यह जानकारी दी.डोटासरा ने कहा कि कोरोना के कारण संगठनात्मक कामों में देरी हुई है,लेकिन पीसीसी कार्यकारिणी बनाने की कवायद अब अंतिम दौर में है इसी माह के अंत तक कार्यकारिणी सामने आ जाएगी.

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जिन कार्यकर्ताओं को नहीं मिला टिकट, उन्हे मिलेगी संगठन में जगह:
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया है कि पंचायत चुनाव में भारी संख्या में कांग्रेस के उम्मीदवार चुनाव जीतेंगे, प्रधान और प्रमुख बनेंगे. निकायों में चेयरमैन बनेंगे प्रदेशभर से अच्छी रिपोर्ट सामने आ रही है डोटासरा ने यह भी कहा कि जिन कार्यकर्ताओं को किन्ही कारणों से टिकट नहीं मिल पाया है उन्हें संगठन में स्थान मिलेगा. भरतपुर के डीग और कुम्हेर में पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह को सिंबल दिए जाने से जुड़े विवादों पर पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि पर्यवेक्षक को इस बारे में संज्ञान है और जानकारी में रखकर ही हुआ हैं. पर्यवेक्षक इस मामले में अपनी ओर से रिपोर्ट भी देंगे, कोई विवाद नहीं है.

बीते कुछ वक्त से पीसीसी टीम का इंतजार:
बीते कुछ समय से पीसीसी टीम का इंतजार हो रहा है. 100 से भी अधिक दिन गोविंद डोटासरा को अपने पद पर बैठे हुए बीत चुके हैं , टीम नहीं बनने से संगठन के कामकाज पर भी असर पड़ रहा है, यही कारण है कि जल्द से जल्द टीम बनाने की कवायद हो रही है. राजनीतिक नियुक्तियों और मंत्री परिषद फेरबदल -विस्तार से जुड़े सवालों पर डोटासरा ने यह कहने से इंकार कर दिया कि यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है.

...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट

डिजिटल बाल मेला में 1 से 15 दिसंबर तक लगेगा दिग्गजों का मेला, एक्टिंग के सितारे बच्चों से होंगे रुबरु 

डिजिटल बाल मेला में 1 से 15 दिसंबर तक लगेगा दिग्गजों का मेला, एक्टिंग के सितारे बच्चों से होंगे रुबरु 

जयपुर: डिजिटल बाल मेला में 1 से 15 दिसंबर तक दिग्गज़ों का मेला लगेगा.  मोटिवेशन के सरताज़ संजय बियानी से लेकर एक्टिंग के सितारे बच्चों से रुबरु होंगे. बच्चों के मन को पढ़ने वाले मोटिवेशन गुरु संजय बियानी क्यों कहते हैं बच्चों की सुनो? तो क्या है पेंटिंग की बारीकियां और एक्टिंग के गुर सब कुछ जानने को मिलेगा आपको बच्चों के पसंदिदा प्लेटफार्म डिजिटल बाल मेला में.

बच्चों के उत्साह को देखते हुए ही ये ऑनलाइन अवसर मुहैया कराया जाया रहा है, ताकि घर बैठे बच्चे और उनके मम्मी पापा जाने कि कोरोना टाइम को कैसे उपयोगी बनाए. इस श्रृंखला में हर दिन अलग अलग क्षेत्र के विशेषज्ञों को जोड़ा जाएगा ताकि बच्चे अपने अपने क्षेत्र का चयन कर सकें और उस बारे में ज़्यादा जानकारी हासिल कर सके.

डॉ संजय बियानी जाने शिक्षाविद, मोटीवेशनल स्पीकर और करीयर काउंसलर है. बचपन को कैसे सुंदर बनाया जाये इसको लेकर संजय बियानी को सुनकर माता पिता निश्चित ही नई बातें सीख सकते हैं. आज के दौर में बच्चों को सबसे ज़्यादा ज़रुरत है माता पिता के वक्त की और सही मार्गदर्शन की. बच्चे भविष्य की नींव को मज़बूत करने वाले बीज हैं. उन्हें जितना अच्छा पोषण मिलेगा भविष्य उतना ही प्रफुल्लित होगा.

बाल मेला में राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र सहित दिल्ली और हिमाचल प्रदेश के बच्चे  भाग ले चुके हैं. अभी भी बच्चों के वीडियो बनाकर भेजने का सिलसिला जारी है. बच्चे घर से एक्टिंग, डांसिंग, फैंसी ड्रैस और निबंध लेखन जैसी 10 प्रतियोगिताओं में भाग ले सकते हैं. डिजिटल बाल मेला में भाग लेना बेहद आसान है. अपना वीडियो बनाकर भेजना है. इस बाल मेला का मकसद है बच्चों की रचनात्मकता को ज़िदा रखना. बच्चों को दबाव से मुक्त रखना.

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बच्चों को व्यस्त रखना वो भी उन कामों में जो उन्हें करना बेहद पसंद है.  अभी तक बाल मेला में सैंकड़ों एंट्री आ चुकी है. हर दिन इसके प्रति उत्साह बढ़ रहा है, जहां एक तरफ बच्चों को ये अपनी स्किल दिखाने का मौका दे रहा है वहीं दिसंबर में हर दिन बच्चों के लिये नये नये मेहमानों को जोड़ा जाएगा. इस क्रम में शुरुआत 1 दिसंबर से संजय बियानी बच्चों से बात करेंगे तो बुधवार दिसंबर 2 को डांसिंग राक स्टार संजय ढ़ाका से जानेंगे डांसिग के टिप्स.

3 दिसंबर को जाने माने कलाकार श्वेत गोयल बच्चों को रंगों की बारिकियां समझायेंगे. जूम मीटिंग के ज़रिए बच्चे देश के किसी भी हिस्से से इन सभी सेशन को ज्वाइन कर सकते हैं. बच्चों के साथ उनके मम्मी पापा भी इसका फायदा उठा सकते हैं. कोरोना पेंडमिक ने बच्चों को घर में कैद कर दिया है. माता पिता के पास भी ज़्यादा वक्त नहीं है.

इस मुश्किल वक्त को कैसे अच्छा बनाए, यही इन सभी सेशन का मकसद है. शिक्षाविदों से लेकर कलाकारों और हुनरबाजों से समझा जा सकता है कि कैसे इस मुश्किल वक्त को आसान बनाया जाये. कैसे बच्चों को तनाव मुक्त रखा जाये. कैसे बच्चों को रचनात्मक बनाया जाये. कैसे बच्चों को नयी विधा सीखायी जाए.

Rajasthan: नए मापदंडों की चर्चा, चुनाव लड़ने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं को नहीं मिलेंगी राजनीतिक नियुक्तियों में तरजीह

Rajasthan: नए मापदंडों की चर्चा, चुनाव लड़ने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं को नहीं मिलेंगी राजनीतिक नियुक्तियों में तरजीह

जयपुर: राजनीतिक नियुक्तियों का इतंजार कर रहे कांग्रेस नेताओं को निकाय और पंचायत चुनावों के बाद तोहफा मिलने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि राजनीतिक नियुक्तियों की उम्मीद पाले बैठे कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को झटका भी लगने वाला है. नए मापदंड़ों की चल रही चर्चा के अनुसार जिसे लोकसभा-विधानसभा चुनाव में टिकट मिला है उन्हें शायद ही राजनीतिक नियुक्तियों में तरजीह मिले. विशेष परिस्थिति में ही किसी नेता को वरीयता मिलेगी. 

यह मापदंड कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को परेशान कर सकता है:
वहीं यह भी माना जा रहा है कि जिन नेताओं और कार्यकर्ताओं को निकाय और पंचायत चुनाव में टिकट मिल चुका है उन्हें भी राजनीतिक नियुक्तियां नहीं मिलेंगी. इस फार्मूले पर लगभग सहमति बन गई है. यह मापदंड कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को परेशान कर सकता है. चुनाव जीतने वाले तो इस दौड़ से बाहर हो ही जायेंगे. लेकिन चुनाव हारने वालों के सामने इससे बड़ा संकट पैदा हो जायेगा. वे न तो जनप्रतिनिधि बन पायेंगे और ना ही उन्हें कोई राजनीतिक नियुक्ति मिल पायेगी. बता दें कि राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर सत्ता और संगठन में कवायद शुरू हो चुकी है.

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राजनीतिक नियुक्तियों में एडजस्ट नहीं किया जाएगा:
पार्टी के विश्वस्त सूत्रों की माने तो नए मापदंडों के मुताबिक विधानसभा, लोकसभा, नगर निकाय और पंचायत चुनावों में पार्टी का टिकट पा चुके नेताओं और कार्यकर्ताओं को राजनीतिक नियुक्तियों में एडजस्ट नहीं किया जाएगा. चाहें फिर वो चुनाव जीते हों या फिर चुनाव हार गए हों. 

राजनीतिक नियुक्तियों के लिए कार्यकर्ताओं की छंटनी हो जाएगी:
ऐसे में पार्टी की इस रणनीति से यह साफ हो रहा है कि ये मापदंड लागू होने से राजनीतिक नियुक्तियों के लिए कार्यकर्ताओं की छंटनी हो जाएगी. राजनीतिक नियुक्तियों में लगातार की जा रही देरी की वजह भी यही मानी जा रही है. 

PCC कार्यकारिणी और राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार, पूर्व राज्य मंत्री ने CM गहलोत को पत्र लिखकर रखी ये मांग

PCC कार्यकारिणी और राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार, पूर्व राज्य मंत्री ने CM गहलोत को पत्र लिखकर रखी ये मांग

जयपुर: प्रदेश में PCC की कार्यकारिणी और राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार लगातार लंबा हो जा रहा है. पीसीसी करीब 4 माह से  बिना संगठन के ही काम कर रही है. वहीं कार्यकर्ताओं को राजनीतिक नियुक्तियों में बड़े पदों की घोषणाओं का भी 2 साल से इंतजार है. अब ओबीसी, मुस्लिम समाज और दलित वर्ग के नेताओं द्वारा प्रतिनिधित्व देने की मांग करने लगे हैं. 

पिछले 70 साल से घुमंतु अर्ध घुमंतु जातियां कांग्रेस की समर्थक रही: 
पूर्व राज्य मंत्री गोपाल केसावत ने डीएनटी जातियों को राजनीतिक नियुक्तियां और पीसीसी की कार्यकारिणी में जगह देने की मांग की है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को लिखे पत्र में गोपाल केसावत ने बताया है कि पिछले 70 साल से घुमंतु अर्ध घुमंतु जातियां कांग्रेस की समर्थक रही है. 

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पिछले 7 साल में पीसीसी की टीम में कोई जगह नहीं:
केसावत ने पत्र में लिखा कि राजस्थान में 60 लाख की संख्या में इन जातियों के किसी सदस्य को पिछले 7 साल में पीसीसी की टीम में कोई जगह नहीं दी गई है. राजनीतिक नियुक्तियों में भी ये जातियां हाशिए पर है. केसावत लगातार इन जातियों की मांगों को उठाते आये है.