नई दिल्ली लखीमपुर मामले का स्वत: संज्ञान लेने पर कपिल सिब्बल ने चीफ जस्टिस को दिया धन्यवाद

लखीमपुर मामले का स्वत: संज्ञान लेने पर कपिल सिब्बल ने चीफ जस्टिस को दिया धन्यवाद

लखीमपुर मामले का स्वत: संज्ञान लेने पर कपिल सिब्बल ने चीफ जस्टिस को दिया धन्यवाद

नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने उच्चतम न्यायालय द्वारा लखीमपुर खीरी हिंसा मामले का स्वत: संज्ञान लिए जाने के बाद प्रधान न्यायाधीश को बुधवार को धन्यवाद दिया और कहा कि भारत की अदालतें न्याय का मंदिर हैं जो बेजुबान लोगों का विश्वास बहाल कर सकती हैं. उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई घटना का स्वत: संज्ञान लिया है. अदालत ने इस मामले पर गुरुवार को सुनवाई करने का फैसला किया है. उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के लखीमपुर दौरे से पहले किसानों के प्रदर्शन के दौरान तीन अक्टूबर को भड़की हिंसा में आठ लोग मारे गए थे. आरोप है कि घटना में एक एसयूवी ने चार किसानों को कुचल दिया जो तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे. 

बाद में गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर भाजपा के दो कार्यकर्ताओं और एक चालक को पीट-पीटकर मार डाला जबकि हिंसा के दौरान एक स्थानीय पत्रकार की भी जान चली गई. सिब्बल ने ट्वीट किया कि मामले का स्वत: संज्ञान लेने के लिए प्रधान न्यायाधीश का धन्यवाद. यह समय की आवश्यकता है. यह और भारत की अदालतें न्याय का मंदिर हैं, जो अक्सर अनाथ महसूस करने वाले बेजुबान लोगों का विश्वास बहाल कर सकती हैं. सिब्बल के ट्वीट के जवाब में कांग्रेस नेता एवं वकील विवेक तन्खा ने कहा कि हां, कपिल जी. इस तरह की बर्बरता के बाद अगर कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो यह हमारे लोकतंत्र और न्याय वितरण प्रणाली पर धब्बा है. 

उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय इस प्रकार के स्वतंत्र फैसले लेकर लोगों का भरोसा जीत रहा है. इससे पहले दिन में, सिब्बल ने उच्चतम न्यायालय से इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेने का आग्रह किया था उन्होंने ट्वीट किया था कि एक ऐसा समय था जब यूट्यूब, कोई सोशल मीडिया नहीं था, तब उच्चतम न्यायालय प्रिंट मीडिया की खबरों के आधार पर स्वत: संज्ञान लेते हुए कदम उठाता था. उसने उन लोगों की आवाज सुनी, जिनकी कोई नहीं सुन रहा था. वरिष्ठ वकील सिब्बल ने कहा कि आज हमारे नागरिकों पर गाड़ी चढ़ाई जाती है और उनकी हत्या कर दी जाती है. उच्चतम न्यायालय से आग्रह है कि वह इस पर कदम उठाए. सोर्स- भाषा

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