इश्क का भूत चढ़ा तो कलयुगी मां प्रेमी संग हुई फरार...दो बच्चों का भविष्य लगा दांव पर

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/11/01 09:46

कुराबड़(उदयपुर)। कहते है ईश्क न जाने इंसान को क्या क्या करवा देता है । लेकिन उदयपुर जिले में इश्क के चक्कर में दो बच्चों का भविष्य दांव पर लग गया है । जन्म के छः महीने में ही माँ प्रेमी संग फरार तो बाप शराब का आदि और किसी प्रेमिका के फेर में बच्चों को भूल गया । अब जिंदगी की जंग में दादी पोते संघर्ष करते हुए जी रहे है । जिले के नेशनल हाइवे से सटे नाल ग्राम पंचायत में खेरकी गांव में एक पहाड़ी की तलहटी में एक परिवार गुजर बसर कर रहा है । यदि आप वहां एक चार दीवारीनुमा चारो ओर कच्ची दीवार और उसके उपर तरपाल डाला हुआ उसमे दुःखद जिंदगी जी रहे है दादी और पोते ।  

हालात यह है कि गांव में भीख मांग कर या फिर 80 वर्षिय दादी गांव में मजदूरी करके जीवन चला रही है । जबकि इस उम्र में दादी की सेवा और आराम का समय है लेकिन करे भी तो क्या मजबूरी की जिंदगी में मेहनत या मांग कर खाना ही जिंदगी बन गयी है।  

मिथुन, अजय और दादी केसी बाकी सब पराये :- 
इस परिवार में सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था । मिथुन के जन्म के बाद उसकी माँ की कोख से अजय का जन्म हुआ लेकिन महज 6 माह में माँ को इश्क की क्या लत लगी और अपने जिगर के टुकड़े को छोड़ प्रेम में पागल होकर प्रेमी संग फरार हो गयी । उसके बाद पिता उनको लेकर खेरकी नाल ले आया और यही रहने लगे गए । अब पिता माना राम मीणा ,दादी केसी बाई , अजय और मिथुन की जिंदगी पेट पालकर चल रही थी । बाप ट्रको का खलासी है और शराब का आदि था अब न तो बेटो को खिला रहा था न अपनी माँ का भरण पोषन कर रहा था । दादी मजबुरन गांव में छोटा मोटा काम करती है और गांव से जो दिहाड़ी मिलती उससे उनका भरण पोषण करने लगी । बारिश आरम्भ के बाद जब पानी का टपकना आरम्भ हुआ तो पिता ने भी अपनी माँ और बेटो का साथ छोड़कर चला गया । हालात ये है कि बीते 5 महीने से बाप ने भी इस ओर मुड़ कर नही देखा । अब 80 वर्षिय दादी अपने पोतो को सम्भाले या अपने जीवन के अंतिम पड़ाव को सम्भाले हुए है । जिन्होंने जन्म दिया वो छोड़कर चले गए इसलिए उनके लिए सब पराये हो गए।

कैसे मिले सहायता खुद की पहचान तक नही :- 
बताया गया न तो दादी के पास आधार है न पहचान पत्र , न बच्चे स्कूल जाते है न उनके पास भी कोई पहचान ऐसे में बूढ़ी दादी को सरकार की पेंशन योजना का लाभ मिल रहा न ही बच्चों को कोई शिक्षा दे रहा । दिनभर उस पहाड़ी की तलहटी ओर उसकी गोद मे मकान यही है उनका संसार।

तरस तो सबको आता है ,लेकिन रोज रोज नही खिला सकते :- 
आसपड़ोस वालो ने बताया कि इस बुढिया को कोई वृद्धाश्रम में ले जाये और इन बच्चों को कोई शेल्टर में ले जाये तो इनका भविष्य बन सकता है। न तो बच्चे खा सक रहे है न माँ का प्यार मिल रहा , न पिता का दुलार मिल रहा , न ही बूढ़ी दादी के गोद मे खेल पा रहे। सोचनीय बात हो गयी।

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in

नीरव मोदी लंदन में गिरफ़्तार, अदालत में पेश होंगे

GOOD LUCK TIPS
जानिए लोकसभा चुनाव को लेकर क्या है कोटा की जनता का मूड | Janta Ka Mood
Big Fight Live | मिलेगा टिकट या गिरेगा विकेट? | 15 March, 2019
GST कौंसिल की बैठक
चाणक्य के साथ BJP कोर कमेटी ने किया मंथन
Goa Gets a New CM in the Wee Hours; BJP’s Pramod Sawant Takes Oath
Big Fight Live : मिलेगा टिकट या गिरेगा विकेट?