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जानिए मेकअप से जुड़े मिथक और वास्तविक तथ्य

जानिए मेकअप से जुड़े मिथक और वास्तविक तथ्य

नई दिल्ली। सुंदर और आकर्षक दिखने की चाह हर किसी को होती है, चाहे लड़कियां हों या महिलाएं। कई बार मेकअप की सही जानकारी के अभाव में नुकसान उठाना पड़ जाता है। मेकअप से जुड़े विभिन्न मिथक हैं, जिनका पालन हम अपने रोजमर्रा के जीवन में करते हैं। आज हम आपको ऐसे ही मिथकों और तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं। 

1. मिथकः मेकअप प्रोडक्ट्स की एक्सपायरी डेट नहीं होती है

तथ्यः क्या आप कॉस्मेटिक्स खरीदने के लिए एक्सपायरी डेट चेक करते हैं? हममें से अधिकांश लोग इसकी जांच नहीं करते हैं, क्योंकि हम मानते हैं कि मेकअप उत्पादों के उपयोग की कोई समय सीमा नहीं होती है। लेकिन सच्चाई यह है कि सभी कॉस्मेटिक उत्पादों की एक एक्सपायरी डेट होती है और सभी कॉस्मेटिक उत्पादों पर इसका उल्लेख होता है।

2. मिथकः महंगे उत्पाद बेहतर हैं

तथ्यः सभी ब्रांडों में अच्छे और बुरे उत्पाद हैं। यह जरूरी नहीं है कि महंगे उत्पाद अच्छे गुणवत्ता मानकों वाले होंगे। आपको काॅस्मेटिक्स चुनते समय उनकी निर्माण सामग्री के बारे में भी जानने की जरूरत है।

3. मिथकः अपने माथे और गाल के साथ मेल करके अपनी फाउंडेशन चुनें

तथ्यः परफेक्ट फाउंडेशन ढूंढना मेकअप के लिए सबसे मुश्किल हिस्सा है। एक तरफ पूरी तरह से मैचिंग फाउंडेशन आपके लुक को निखार सकता है जबकि दूसरी तरफ फाउंडेशन का बुरा विकल्प वास्तव में आपके लुक को खराब कर सकता है। ऐसे में सलाह दी जाती है कि वह चुनें जो आपकी गर्दन और चेहरे की रंगत से मेल खाता हो। इसके अलावा, यह भी ध्यान रखें कि कृत्रिम प्रकाश की तुलना में प्राकृतिक प्रकाश में फाउंडेशन का चयन करना काफी बेहतर रहता
है।

4. मिथकः फाउंडेशन की ब्लेंडिंग के लिए अंगुलियां सबसे बेहतर टूल हैं

तथ्यः फाउंडेशन की ब्लेंडिंग के लिए अंगुलियों का उपयोग करने से फाउंडेशन की कवरेज अनियमित होती है। इसके अलावा, जब आप इसे अंगुलियों से मिलाते हैं तो यह लंबे समय तक नहीं रहती है। अंगुलियों का उपयोग करने से आप जरूरत से तीन गुणा अधिक फाउंडेशन को खराब करते हैं। न्यूनतम मात्रा में बेहतर कवरेज प्रदान करने वाली ब्लेंडिंग के लिए ब्रश और स्पंज सर्वश्रेष्ठ हैं।

5. मिथकः पाउडर तैलीय (ऑयली) त्वचा के लिए अच्छा है

तथ्यः लंबे समय तक पाउडर का उपयोग करने से त्वचा की सतह डीहाइड्रेट होने लगती है। इसके अलावा पाउडर का उपयोग करने के बाद चेहरे को गहराई से साफ करना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह छिद्रों में विस्तार कर सकता है। शाइन को मैटीफाइ करने के लिए पाउडर की बजाए आधुनिक प्राइमरों का उपयोग किया जा सकता है।

6. मिथकः मॉइस्चराइजर प्राइमर का विकल्प है

तथ्यः मॉइस्चराइजर और प्राइमर, फार्मूला और उपयोग के लिहाज से दो अलग-अलग चीजें हैं। मॉइस्चराइज़र त्वचा को हाइड्रेट करता है जबकि प्राइमर स्मूथ त्वचा के लिए आधार बनाता है, फाइन लाइंस को भरता है और फाउंडेशन के लिए एक सतह बनाता है। यह मेकअप को लंबे समय तक बनाए रखता है। श्री यशु जैन, एमडी, मैटलुक कॉस्मेटिक्स ने कहा कि “हमेशा मेकअप के आधार के रूप में प्राइमर का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।“

7. मिथकः अगर आपकी फाउंडेशन में सनस्क्रीन है तो आपको इसकी अलग से जरूरत नहीं है

तथ्यः चूंकि अधिकांश कॉस्मेटिक कंपनियों का दावा है कि उनकी फाउंडेशन में एसपीएफ़ शामिल है, जबकि सच्चाई यह है कि उनमें आपकी त्वचा की सुरक्षा के लिए पर्याप्त सनस्क्रीन सामग्री नहीं है। अगर आप दिन में मेकअप कर रही हैं तो हमारी सलाह है कि हमेशा सनस्क्रीन लगाएं।

8. मिथकः मस्कारा को केवल तभी फेंकना चाहिए जब वह सूख जाए

तथ्यः मस्कारा का उपयोग पहले उपयोग के तीन महीने तक की अवधि के लिए ही होता है। इस अवधि के बाद यह बैक्टीरिया के लिए एक सही ब्रीडिंग ग्राउंड के रूप में कार्य करता है। इससे आंखों को संक्रमण भी हो सकता है।

9. मिथकः यदि आप ही अपने काॅस्मेटिक्स की एकमात्र उपयोगकर्ता हैं तो आप ब्रश धोने से बच सकते हैं

तथ्यः मेकअप ब्रश विभिन्न उत्पादों के संपर्क में आते हैं और इस तरह उन्हें धोना एक नियमित स्वच्छता की तरह है। ब्रश धोने से परहेज करने से बैक्टीरिया का जमाव होता है जो त्वचा के लिए खतरनाक होता है और उसके उपयोग करने की अवधि भी कम हो जाती है।

10. मिथकः कंसीलर को फाउंडेशन से पहले लगाया जाता है

तथ्यः कई बार फाउंडेशन से पहले कंसीलर लगाने से कंसीलर का असर पूरी तरह से हट जाता है। इसके अलावा फाउंडेशन के बाद कंसीलर लगाने से डार्क सर्कल और फाइन लाइंस जैसी खामियों को छिपाने में मदद मिलती है।
 

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जयपुर: दुनियाभर में इस समय कोरोना वायरस की दहशत फैली हुई है. कोरोना वायरस से बचने के लिए सरकार बार बार एडवाइजरी जारी कर साबुन से हाथ धोना और सैनिटाइजर से हाथ को विसंक्रमित करने की अपील कर रही है. ऐसे में इस समय लोग बाजार में उपलब्ध कई तरह के सैनिटाइजर का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन इस बीच सबसे बड़ा सवाल तो यह खड़ा होता है कि हम जो सैनिटाइजर इस्तेमाल कर रहे हैं वो असली है या नकली. तो ऐसे में हम आपको असली सैनिटाइजर की पहचान के बारें में बता रहे हैं...

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सैनिटाइजर चिपचिपा भी नहीं होता:
आपको बता दें कि जो सैनिटाइजर सही होगा वह थोड़ा हाथ पर ठंडा सा लगेगा और जल्द ही सूख भी जाएगा. इसके साथ ही वह चिपचिपा भी नहीं होगा. वायरस वैक्टीरिया को मारने के लिए ज्यादातर अल्कोहल से तैयार सैनिटाइजर अच्छे होते हैं. 

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आप साबुन से भी हाथ धो सकते हैं:
वहीं अगर आपकों बाजारा में सैनिटाइजर नहीं भी मिल रहा तो घबराने की आवश्यकता नहीं है. आप साबुन से भी हाथ धो सकते हैं. बस हाथ धोते समय यह सावधानी रखें की हाथ पूरी तरह से रगड़ कर साबुन से साफ करना है. 


 

गर्म पानी पीने से दूर होंगी कई बीमारियां, नियमित करें सेवन

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जयपुर: सुबह उठते ही गर्म पानी पीने से हम कई बीमारियों से बच सकते हैं. इस समय महामारी बन चुका कोरोना वायरस से बचने के लिए भी डॉक्टर यही सलाह दे रहे हैं. डॉक्टरों के अनुसार गर्म पानी पीने के कई फायदे होते हैं. गर्म पानी पीने से मूत्र के जरिए जहरीले तत्व बाहर निकल जाते हैं. नींबू और शहद मिलाकर भी इस पानी का सेवन किया जा सकता है. तो आइए हम आपको गर्म पानी पीने के कुछ फायदें बता रहे हैं...

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- गर्म पानी पीने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि पेट आसानी से साफ हो जाता है.

- गर्म पानी पाचन क्रिया को आसान बनाता है.

- गर्म पानी का नियमित सेवन किया जाए तो नाक और मुंह पर होने वाले किसी भी अटैक से बचा जा सकता है.

-  वजन कम करने का बेहतरीन उपाय है गर्म पानी में नींबू और शहद मिलाकर सेवन करना.

- गर्म पानी महिलाओं को पीरियड्स में होने वाली ऐंठन का भी इलाज करता है. 

- गर्म पानी का सेवन करने से मोटोपा कम होता है. 

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बेहद गुणकारी है बादाम, अगर करेंगे सेवन तो होगा वजन कंट्रोल 

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जयपुर: हमारी सेहत के बादाम बेहद गुणकारी होते है, अगर हम बादाम का हर रोज सेवन करेंगे तो इससे शरीर को कई सारे फायदे मिलते है. आप हर रोज सुबह खाली पेट बादाम खाएंगे. तो इससे आपका दिमाग, सेहत और त्वचा ठीक रहेगी. इनमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट तत्व शरीर के लिए बहुत तरीके से फायदेमंद हैं. चलिए जानते है बादाम खाने के सेहत लाभ के बारे में...

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होगा वजन कंट्रोल: 
अगर आप भी वजन कंट्रोल करने की सोच रहे है तो आप बादाम का सेवन कीजिए. लेकिन ध्यान रखे आप दिन में नहीं, बल्कि रात्रि विश्राम से पहले एक गिलास दूध और 5 से 6 बादाम का सेवन कीजिए. आप बादाम के साथ-साथ 3-4 अखरोट भी खा सकते हैं. अगर आपको खाना खाने के बाद भी भूख सताए तो आप ओर कुछ खाने की बजाए बादाम का सेवन कीजिए. इससे आपका वजन कंट्रोल होगा. 

आएंगी अच्छी नींद:
अगर आपको भी रात को नींद नहीं आती है, तो आप बादाम का सेवन कीजिए, इससे अच्छी नींद आएंगी. आप रात को सोने से पहले 4-5 बादाम जरुर खाएं, ऐसा करने से आपको नींद बहुत अच्छी आएगी.

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शुगर होगा कंट्रोल:
इसके अलावा शुगर कंट्रोल करने के लिए भी सोने से पहले बादाम खाना फायदेमंद माना जाता है. जिन लोगों को बादाम नहीं पचते, वो उसका छिलका उतारकर खाएं, फिर परेशानी नहीं होगी. मगर यदि ऐसी कोई परेशानी नहीं है तो छिलके के साथ ही बादाम खाएं, बादाम के छिलके में फाइबर काफी मात्रा में पाया जाता है.वैसे तो बादाम के बहुत सारे सेहत फायदे है, अगर आप इस्तेमाल करेंगे तो सेहत को कई फायदे मिलेंगे.

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कोटड़ा(उदयपुर): उदयपुर जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र कोटड़ा में राजीविका से जुड़ी महिलाएं अभी हर्बल गुलाल बनाने में लगी हुई है. होली के त्योहार को देखते हुए इन महिलाओं ने रोजाना एक क्विंटल से अधिक हर्बल गुलाल बनाया. इस गुलाल को बाजार में दो सौ रुपये किलो की दर से बेचा जा रहा है. कोटड़ा तहसील के गोगरुद में राजीविका महिला सर्वांगीण सहकारी समिति लिमिटेड की महिलाएं आगामी होली के त्योहार को लेकर फूलों से हर्बल गुलाल बना रही है.

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स्वंय सहायता समूह की साठ महिलाये पिछले माह 27 फरवरी से यह हर्बल गुलाल बना रही है और प्रतिदिन एक क्विंटल से अधिक मात्रा में गुलाल का निर्माण कर रही है. वर्तमान में यह महिलाएं एक हजार किलो से अधिक गुलाल का निर्माण कर चुकी है. इस गुलाल को समिति द्वारा बाजार में दो सौ रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है. महिलाओं द्वारा बनाये गए इस गुलाल की डिमांड हिमाचल प्रदेश,दिल्ली,कोलकाता,बिहार,महाराष्ट्र सहित राजस्थान के विभिन्न जिलों से आ चुकी है. 

ऐसे बनता है हर्बल गुलाल..
हर्बल गुलाल बनाने के लिए महिलाएं आस पास के जंगल से पलाश के फूल,रजके के पत्ते व अन्य फूलों की पत्तियां इकट्ठा करके लाती है. इसके बाद इनको साफ पानी से धोया जाता है और पानी में उबाला जाता है. इस मिश्रण को छानकर ठंडा करते है फिर इनमें अरारोट मिलाकर सुखाया जाता है और गुलाल का स्वरूप दिया जाता है. तीन दिन की इस प्रक्रिया में एक दिन फूल व पत्तियां बीनने में लगता है दूसरे दिन इन्हें पानी मे उबालकर तैयार करने में और तीसरा दिन इसे सुखाने में. यह गुलाल पूर्णतः प्राकृतिक होता है जो कि शरीर पर किसी प्रकार का नुकसान नही पहुंचाता है, जबकि बाजार में मिलने वाला गुलाल केमिकल युक्त होता है जो कि शरीर के लिए हानिकारक होता है.

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गुलाल की लागत सौ रुपये प्रति किलो:
स्वय सहायता समूह द्वारा बनाए गए इस गुलाल की लागत सौ रुपये प्रति किलो  आती है. वहीं इस गुलाल को समिति द्वारा बाजार में दो सौ रुपये किलो की दर से बेचा जा रहा है. इस प्रकार प्रति किलो सौ रुपये की आय होती है. यह आय प्रगति महिला सर्वांगीण सहकारी समिति लिमिटेड गोगरुद में जमा होगी, जिसे सभी सदस्यों में समान भाग में विभाजित कर दिया जाएगा. वहीं फूल बीनने वाली महिलाओं को ढाई सौ से तीन सौ रुपए तक मजदूरी दी जाती है.

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माउंटआबू: पुष्य नक्षत्र के मौके पर राजस्थान आयुर्वेद विभाग द्वारा नन्हे बच्चों के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए इन दिनों कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें स्वर्ण प्राशन एक आयुर्वेदिक रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का उपाय है. जिसमें शुद्ध स्वर्ण भस्म वह दूध शहद ब्राह्मी शंखपुष्पी आदि औषधि का मिश्रण होता है. बच्चों को पिलाने पर यह विशेष उपयोगी होता है वही प्रतिमाह पुष्प नक्षत्र के दिन इसे पिलाने से विशेष लाभ होता है. 

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टीकाकरण अभियान का आगाज:
इसी कड़ी में आज माउंट आबू के अंबेडकर कॉलोनी स्थित राजकीय विद्यालय में टीकाकरण अभियान का आगाज किया गया, जिसमें प्रधान चिकित्सा प्रभारी अंजू वाधवा के अनुसार चिकित्सा बैंक में पद स्थापित चिकित्सा अधिकारी कांतिलाल माली एवं अन्य कर्मचारियों ने मिलकर माउंट आबू के इस विद्यालय में शिविर का आयोजन किया गया. 

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बच्चों को पिलाई औषधि:
कार्यक्रम में बच्चों को औषधि पिलाई गई, वहीं राजकीय चिकित्सालय में भामाशाह मणि भाई एवं भामाशाह के सहयोग से आज सुवर्णप्राशन टीकाकरण औषधि पिलाई जिससे बच्चों का बौद्धिक विकास हो सके इसी उद्देश्य के साथ इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया. 

भरतपुर में ऑर्गेनिक अबीर और गुलाल तैयार, महिलाओं को दी जा रही है ट्रेनिंग

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भरतपुर: रंगों के बिना होली का मजा अधूरा ही रहता है, लेकिन कई बार यह रंग आपके शरीर और जीवन को बदरंग भी कर देते हैं और अधिकांश लोग तो होली खेलने से इसलिए बचते हैं कि कहीं केमिकल से बने गुलाल व रंग से उनकी त्वचा खराब न हो जाए. इसी बात को देखते हुए अब भरतपुर में फल और सब्जियों से बने ऑर्गेनिक गुलाल और रंगों की बहार दिखाई दे रही है.

ऑर्गेनिक गुलाल रंग बनाने की ट्रेनिंग:
स्वयं सहायता समूह वर्ग द्वारा महिलाओं को ऑर्गेनिक अबीर व गुलाल बनाना सिखाया है, जो फलों और सब्जियों से तैयार किए जाते हैं. स्वयम सहायता समूहों की महिलाओं को विशेष कर होली के त्यौहार को देखते हुए ऑर्गेनिक गुलाल रंग बनाने की ट्रेनिंग दी गई है.

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केमिकल रहित गुलाल और रंग:
स्वर्ग संस्था के प्रबंधक बलवीर सिंह ने फर्स्ट इंडिया न्यूज़ को बताया इस बार उनकी संस्था ने होली के लिए रिसर्च किया है और केमिकल रहित गुलाल और रंग तैयार कराया है. उन्होंने कहा कि उन महिलाओं को रंग गुलाल बनाने की ट्रेनिंग दी है जो बेरोजगार हैं. उन्होंने बताया कि पालक से हरा चुकंदर से लाल हल्दी और चंदन से पीला गुलाल व रंग बनाया जा रहा है जिसमें केमिकल की मात्रा लेश मात्र भी नहीं है.

त्वचा पर नहीं होगा कोई नुकसान:
सिर्फ अरारोट का उपयोग इसमें किया गया है. प्रबंधक बलवीर सिंह ने बताया कि लोगों को अब होली खेलने से डरने की आवश्यकता नहीं है अगर वे ऑर्गेनिक गुलाल रंग से होली खेलेगे तो इससे उनकी त्वचा पर कोई नुकसान नहीं होगा.

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...फर्स्ट इंडिया न्यूज संवाददाता दीपक लवानिया की रिपोर्ट

ये घरेलू नुस्खे अपनाएं, दूर भगाएं एसिडिटी

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जयपुर: एसिडिटी की समस्या ओवर इटिंग या फिर ज्यादा ऑयली खाने की वजह से होती है. इसी वजह से सीने में जलन होने लगती है.लेकिन इससे डरने की कोई जरूरत नहीं यह आम बात है. इसके अलावा अधिक दवाइयों का सेवन भी एसिडिटी का कारण है। वैसे बदलती जीवन शैली की वजह से एसिडिटी होना आम बात है. क्योंकि खाना सही वक्त पर ना खाने की वजह से भी कई बार एसिडिटी की समस्या उत्पन्न हो जाती है. चलिए आज हम आपको कुछ घरेलू टिप्स बताते है जिनकी सहायता से आप एसिडिटी की समस्या को दूर कर सकते है...

नियमित करेंगे लहसुन का सेवन, तो होगा कोलेस्ट्रॉल लेवल कम

कीजिए सौंफ का सेवन: 
अगर आप सौंफ का सेवन करेंगे तो इससे एसिडिटी की समस्या से छूटकारा पा सकते है. क्यों​कि सौंफ भोजन को पचाने में सहायता करती है. ऐसे में हर दोपहर और रात का खाना खाने के बाद एक चम्मच सौंफ जरुर खाना चाहिए. 

कीजिए दालचीनी का सेवन:
क्या आप एसिडिटी की समस्या से परेशान है. तो आप दालचीनी का सेवन कीजिए. इससे एसिडिटी की समस्या दूर हो जाएगी. अगर आपको एसिडिटी की बहुत ज्यादा समस्या है तो खाने के 1 घंटे बाद आधे गिलास गुनगुने पानी में 1 चुटकी दालचीनी पाउडर मिलाकर पिएं. एसिडिटी के साथ-साथ दालचीनी का पानी आपके ब्लड शुगर लेवल को भी बैलेंस करने में सहायता करता है.

जितना नारियल पानी स्वादिष्ट, उतना ही सेहत के लिए फायदेमंद

एसिडिटी दूर भगाए गुड़: 
वैसे तो गुड़ हमारी सेहत के लिए बेहद लाभकारी होता है. अगर आप खाने के बाद गुड़ खाएंगे तो इससे खाना जल्दी पच जाता है. गुड़ का सेवन जहां आपके खाने को पचाने में आपकी सहायता करता है, वहीं एसिडिटी, पेट में दर्द और जलन जैसी समस्याओं से भी आपको बचाकर रखता है. खाने के बाद गुड़ का सेवन शरीर में खून की मात्रा ठीक बनाए रखता है. जिन बच्चों को भूख नहीं लगती उन्हें दिन में 1-2 बार गुड़ जरुर खिलाना चाहिए. इससे उन्हें भूख लगने लग जाएगी.

नियमित करेंगे लहसुन का सेवन, तो होगा कोलेस्ट्रॉल लेवल कम

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जयपुर: हमारी सेहत के लिए लहसुन बेहद उपयोगी होता है. अगर इसका आप रोजाना यूज करेंगे तो सेहत को कई फायदे मिलेंगे. लहसुन से इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत बनता है. अगर लहसुन का नियमित रूप से सेवन किया जाए तो हमारे शरीर के आसपास कई बीमारियां नहीं भटकेगी. लहसुन एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है. इसमें एंटी फंगल गुण भी पाए जाते है. चलिए जानते हैं लहसुन के सेहत लाभ के बारे में....

होगा कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल:
अगर आप नियमित रूप से लहसुन का सेवन करेंगे तो इससे कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम होता है. साथ ही हार्ट से जुड़ी समस्याएं भी दूर होती है. इसका सेवन करने से शरीर का फैट तेजी से बर्न होता है जिससे आपका वजन कम होने लगता है. 

बढ़ेगा स्टेमिना:
वैसे तो लहसुन के कई फायदे है, अगर आप रात को सोने से पहले एक कच्चा लहसुन खाएंगे तो इससे आपके शरीर में स्टेमिना बढ़ता है.जिससे आपकी बॉडी की तमाम कमजोरी दूर होगी. 

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निकलेंगे विषाक्त तत्व:
अगर आप रात को सोने से पहले भुने हुए लहसुन का सेवन करेंगे तो इससे   यूरिन के माध्यम से शरीर के मौजूद विषाक्त तत्व बाहर निकलते हैं.

हड्डियां होगी मजबूत:
आप हर रोज लहसुन का सेवन करेंगे तो इससे हड्डियां मजबूत बनेगी. अगर आप रात को सोने से पहले लहसुन खाएंगे तो इससे शरीर की हड्डियां मजबूत बनती है. साथ ही जोड़ों और घुटनों का दर्द दूर होगा. 

कीजिए लहसुन और शहद का यूज:
अगर आप लहसुन की कली और शहद का सेवन करेंगे. तो इससे कैंसर से बचाव हो सकता है. लहसुन और शहद विशेष रूप से व्यक्ति के पेट में होने वाले कैंसर के खतरों को कम करने का काम करता है.

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