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जानिए मानवेन्द्र सिंह की सियासी ताकत और उनके खिलाफ बीजेपी का एंजेड़ा

जानिए मानवेन्द्र सिंह की सियासी ताकत और उनके खिलाफ बीजेपी का एंजेड़ा

जयपुर। सीमावर्ती इलाके की राजपूत राजनीति मौजूदा चुनाव में काफी अहम हो गई है। कारण साफ है मानवेन्द्र सिंह का बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट से कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ना। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सभा ने मानवेन्द्र को मजबूती देने का काम किया साथ ही दिशा भी दिखाई। वहीं डैमेज कंट्रोल के लिये बीजेपी नई राजपूत नीति पर काम कर रही है। मानवेन्द्र को रोकने के लिये भाजपाई राजपूत क्षत्रप सामने लाये जाएंगे। खास रिपोर्ट:

बाड़मेर से मानवेन्द्र सिंह के कांग्रेस उम्मीदवार बनने के बाद से ही बार्डर की सियासत में जातीय हलचल तेज है। खासतौर पर सीमावर्ती इलाके की राजपूत सियासत में उबाल आया है। उनके कांग्रेस में जाने के बाद सीमावर्ती इलाके के सियासी हालात बदले है। कभी बीजेपी का वोट बैंक रहा राजपूत आज कांग्रेस के साथ यहां खड़ा नजर आता दिख रहा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की बाड़मेर सभा में राजपूत समाज की बढ़ चढ़कर भागीदारी यही संकेत देती नजर आई। कांग्रेस में बड़े राजपूत क्षत्रप की एंट्री के तौर पर मानवेन्द्र को देखा जा रहा है। कांग्रेस को उम्मीद है कि जसंवत सिंह की तरह मानवेन्द्र सिंह मारवाड़ में सेकुलर राजनीति के नये चेहरे होंगे। 

मानवेन्द्र सिंह की सियासी ताकत:

—कद्दावर राजपूत नेता जसवंत सिंह जसोल के पुत्र
—जसवंत सिंह देश के वित्त, विदेश, रक्षा मंत्री रहे थे
—जसवंत की सियासी विरासत का मानवेन्द्र को लाभ
—सीमावर्ती इलाके की मुस्लिम बेल्ट पर जसवंत का असर
—जसवंत भले ही बीजेपी में रहे लेकिन उनकी छवि सेकुलर
—सीमावर्ती राजपूत वोटों पर जसोल परिवार का असर
—जसवंत की तर्ज पर मानवेन्द्र करते है खांटी राजनीति 
—भले ही अंग्रेजी शैक्षणिक संस्थानों में पढ़े है लेकिन है देसी

मानवेन्द्र सिंह की सियासत की नई पारी के बाद बीजेपी मारवाड़ में अब पॉलिटिक्स की दिशा को बदलेगी। ऐसे में जसोल परिवार के माइनस पाइंटस को सामने रखा जायेगा। यूं कहे जसोल परिवार की सेकुलर पॉलिटिक्स के प्रति उत्तर में बीजेपी हार्डकोर हिन्दुत्व एंजेडे पर सीमावर्ती क्षेत्र में नजर आ सकते हैं। यही कारण है कि बीजेपी ने हिन्दू कार्ड चलते हुये कैलाश चौधरी को मानवेन्द्र सिंह के सामने उतारा है। राजपूत वर्ग के लिये सम्मानीय माने जाने वाले प्रताप पुरी का साथ उन्हें मजबूती दे सकता है। हनुमान बेनीवाल यहां कैलाश चौधरी के लिये प्रचार करते नजर आएंगे जिससे किसान कौम को साधा जा सके। 

मानवेन्द्र के खिलाफ बीजेपी का एंजेड़ा:

—नये राजपूत क्षत्रपों को बीजेपी ने कांग्रेस को घेरने के दिये आदेश 
—स्थानीय राजपरिवार, ठिकानों के नये चेहरों को उतारा
—प्रताप पुरी और बाबू सिंह राठौड़ के कंधो पर होगा दारोमदार 
—सीमावर्ती क्षेत्र में सेकुलर के खिलाफ हिन्दुत्व कार्ड चलेगा 
—शिव, पोकरण, सिवाना में सियासत बदली-बदली दिखेगी
—बीजेपी यह भी बतायेगी हमने राजपूतों को कितना प्रतिनिधित्व दिया

जाट पॉलिटिक्स का रुख:

—मानवेन्द्र एपिसोड से जाट राजनीति पर असर पड़ा है
—मारवाड़ में जाट राजनीति से बीजेपी को लाभ संभव! 
—कर्नल सोनाराम साथ आये तो कैलाश चौधरी को फायदा होगा
—हनुमान बेनीवाल के कारण कैलाश को मजबूती मिल सकती है
—मानवेन्द्र के खिलाफ नया जाट फ्रंट सामने आ सकता है, इसमें दलित भी शुमार हो सकते है 

बाड़मेर-जैसलमेर की सियासत को जाट, राजपूत, मुस्लिम, मेघवाल और जैन प्रभावित करते है। ब्राह्मण, माली-प्रजापत, पुरुषार्थी और विश्नोई यहां ट्रंप कार्ड साबित होते है। लिहाजा मानवेन्द्र सिंह और कैलाश चौधरी की कोशिश यही रहेगी कि परम्परागत वोटों को साधा जाए। अशोक गहलोत यहां की सियासी नब्ज से वाकिफ है उनका मार्गदर्शन मानवेन्द्र के लिये मारक साबित हो सकता है। 

... संवाददाता योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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