VIDEO: जानिए कौन हैं ओम बिरला और उन्हें क्यों चुना गया लोकसभा स्पीकर

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/06/19 09:26

कोटा: ओम बिरला का नाम आज किसी पहचान का मोहताज नहीं है. शिक्षा नगरी कोटा के एक सरकारी स्कूल से शुरु हुआ बिरला का राजनीति का सफर आज देश की सबसे बडी पंचायत के अध्यक्ष पद तक पहुंच गया. राजनीति में अपने नवाचार और सबको साथ लेकर चलने रणनीति के लिए अलग पहचान रखने वाले लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने शिक्षा नगरी कोटा ही नहीं राजस्थान का गौरव बढाया है. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के राजनैतिक जीवन पर एक खास रिपोर्ट:

छात्रसंघ अध्यक्ष से हुई शुरुआत:
बिरला का जन्म 4 दिसंबर 1962 को कोटा में श्रीकृष्ण बिरला के घर हुआ. नौ भाई-बहनो के परिवार में ओम पांचवे नम्बर पर है. शुरु से पढाई में होशियार बिरला की रुचि बचपन से नेता बनने में थी. बिरला का राजनैतिक सफऱ वर्ष 1977 में गुमानपुरा के मल्टीपरपज स्कूल से शुरु हुआ, जहां वह युवा शक्ति की नब्ज को पकड़कर छात्रसंघ अध्यक्ष बने. शपथ ग्रहण के दौरान बिरला द्वारा दिए गए जोशीले भाषण ने उन्हे युवा दिलो की धड़कन बना दिया और बिरला लगातार राजनीति के क्षेत्र में सफलता के सीढियो को चढ़ते चले गए. 

छात्र राजनीति के बाद सहकारिता के क्षेत्र में सक्रिय:
छात्र राजनीति के बाद बिरला सहकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हुए और बिरला  वर्ष 1989 में कोटा सहकारी उपभोक्ता होलसेल भण्डार के अध्यक्ष बने और कुशल प्रबंधन से घाटे में चल रहे भण्डार को मुनाफे में ला दिया. इसके बाद राजस्थान सहकारी उपभोक्ता भण्डार, राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ नई दिल्ली के वाइस चैयरमेन पद की जिम्मेदारी संभाली. बिरला को भाजपा युवा मोर्चा में पहले जिलाध्यक्ष, फिर प्रदेशाध्य़क्ष और बाद में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पदों पर रहकर उन्होने पार्टी से युवाओं को जोड़ा. 

मोदी-शाह के करीबी:
प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के करीबियों में गिने जाने वाले बिरला ने पहला चुनाव वर्ष 2003 में कोटा विधानसभा सीट से लड़ा और कांग्रेस के दिग्गज नेता शांति धारीवाल को हराकर पहली बार विधायक बने. वर्ष 2004 में भाजपा सरकार ने उन्हे संसदीय सचिव बनाया तो बिरला ने जनता की समस्याओ का समाधान करवाकर पहचान बनाई. अजेय बिरला लगातार तीन बार विधायक बने और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी एक चुनाव में बिरला के समर्थन में श्रीराम रंगमंच पर आमसभा की थी जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे. . वर्ष 2014 में उन्हे कोटा बूंदी लोकसभा सीट से पार्टी ने सांसद का चुनाव लडाया और वह संसद में राजस्थान की जनता की आवाज बन गए. आज बिरला के लोकसभा स्पीकर बनने पर कोटा में जश्न का माहौल है और हर कोई उनसे उम्मीद लगाकर बैठा हुआ है. वहीं बिरला के पिता श्रीकृष्ण बिरला को आज अपने बेटे पर गर्व महसूस हो रहा है, आज युवा और कार्यकर्ता बिरला को अपना आदर्श मानकर राजनीति के सफर में आगे बढ रहे हैं.  

जन सेवा में भी किए नवाचार:
राजनीति के शतंरज में प्रतिद्वंदियो को चारों खाने चित करने में माहिर बिरला ने जन सेवा में भी कई नवाचार किए. कोटा शहर में जनसहयोग और भामाशाहो की मदद से बिरला ने कई विशेष अभियान चलाए और गरीब और बेसहारा लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई. विधायक रहते हुए बिरला ने शहर में गरीबों के लिए प्रसाद्म प्रकल्प चलाकर गरीबों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध करवाया, तो उसके सभी सरकारी अस्पतालों में तीमारदारों के लिए कम्बल निधि अभियान की शुरुआत की. जिसके तहत कडाके की सर्दी में तीमारदारों को रात बिताने के लिए निःशुल्क कंबल और रजाई देने की व्यवस्था की गई. इसके साथ ही जनसहयोग से सीएडी के पास एक हाईटेक रैनबसेरे का निर्माण भी करवाया. जिसमें दिन में निर्धन बच्चों के लिए पाठशाला संचालित होती है और रात को खुले में रात बिताने वाले मजदूरों को सोने के छत और खाना उपलब्ध करवाया जाता है. यही नहीं बिरला ने भीषण गर्मी में चप्पलम अभियान की शुरुआत की जिसके तहत शहर की कच्ची बस्तियों में गरीब बच्चों को जनसहयोग के माध्यम से चप्पलें वितरित की जाती है. 

दिव्यांग युवाओं के लिए खास प्रयास:
बेरोजगारों को रोजगार से जोड़ने के लिए बिरला ने दिव्यांग युवाओं को इलेक्ट्रिटक ट्राईसाइकिल की सौगात दी. ताकि वह अपना और अपने परिवार का पेट पाल सके. निःशुल्क परिधान सेंटर खोलकर निर्धन के तन ढकने का काम किया जो आज भी संचालित किया जा रहा है . देश के अन्य जनप्रतिनिधियों ने हटकर किए गए इन जनसेवा के कार्यो के काऱण ही बिरला ने कार्यकर्ताओं, जनता के दिलों की धड़कन बन गए. अब बिरला को देश की सबसे बडी पंचायत में अहम जिम्मेदारी मिली है तो कोटा वासियों को उम्मीद है कि लोकसभा अध्यक्ष के होमटाउन शिक्षा नगरी कोटा को भी नई पहचान मिलेगी. 

... कोटा संवाददाता सचिन ओझा की रिपोर्ट

 

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