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जानिए क्यों है संविदा कर्मी हड़ताल पर  

जानिए क्यों है संविदा कर्मी हड़ताल पर  

रावतसर (हनुमानगढ़)। रावतसर के राजकीय चिकित्सालय में एनजीओ द्वारा लगाए गए संविदा कर्मियों को पिछले सात माह से वेतन नहीं मिलने से हड़ताल पर चले गये है। जिससे अस्पताल में आने वाले मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 

अस्पताल में ये संविदा कर्मी भामाशाह योजना, ओपीडी, जन्म मृत्यु व जेएसवाई सहित अनेकों महत्वपूर्ण कार्य योजनाओं पर कार्यरत है। पिछले तीन दिन से इन कर्मियों के हड़ताल पर जाने से आम मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। इन संविदा कर्मियों ने बताया कि, "हनुमानगढ़ के एनजीओ मानव संसाधन  विकास सेवा समिति द्वारा रावतसर राजकीय चिकित्सालय में 16 कर्मियों को लगाया गया था। जिनको पिछले सात माह से वेतन नहीं मिलने पर इन कर्मियों के खाने के लाले पड़े हुए है।" कर्मियों ने बताया कि, "इस संबंध में स्थानीय एसडीएम डॉ. अवि गर्ग को भी ज्ञापन देकर एनजीओ से वेतन दिलाने की मांग की है।"

रावतसर से संवाददाता हरप्रीत सिंह की खबर 

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ट्रक, ट्रोले व पिकअप की जबरदस्त भिड़ंत में तीन लोगों की मौत, पिता-पुत्र जिन्दा जले

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रावतसर(हनुमानगढ़): मेगा हाईवे हनुमानगढ रोड़ पर रावतसर से लगभग चार किलोमीटर दूर एक ट्रक, ट्रोला व पिकअप की जबरदस्त भिड़ंत होने से तीन लोगों की मौत हो गई. दुर्घटना में पीकअप चालक की मौके पर ही मौत हो गई वही ट्रक व ट्रोले में लगी भीषण आग में दो व्यक्ति जिन्दा जल गये. घटना की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी अरूण चौधरी, डीवाईएसपी रणवीर मीणा मय जाब्ते मौके पर पहुंचे.

ऑवर टेक करते समय हुआ हादसा:
पुलिस के अनुसार पीकअप व ट्रक हनुमानगढ की तरफ से रावतसर की तरफ आ रहे थे. वही ट्रोला रावतसर से हनुमानगढ की तरफ जा रहा था. तभी पिकअप के ऑवर टेक करते समय ट्रक, पिकअप व ट्रोले में जबरदस्त भिड़ंत हो गई. जिससे ट्रक व ट्रोले में बुरी तरह से आग लग गई. वही पिकअप में भरी शराब सड़क पर बिखर गई व पिकअप बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई. जिसमें पिकअप चालक बलवान (35) पुत्र अणतुराम निवासी रामसरा भादरा की मौके पर ही मौत हो गई व सुमेरसिंह पुत्र मंगनीराम निवासी भादरा गभीर रूप से घायल हो गया. जिन्हे स्थानीय राजकीय चिकित्सालय पहुंचाया गया. 

ट्रोले में सवार दो जने जिन्दा जल गये:
वहीं प्रत्यक्ष दर्शियों ने बताया कि ट्रोले में सवार एक व्यक्ति को बाहर निकाल कर जिला चिकित्सालय ले जाया गया है. वही ट्रोले में सवार दो जने जिन्दा जल गये. जिन्हे देर रात में कड़ी मशक्कत के बाद निकाला गया. जिनकी पहचान हनुमानगढ़ के गुरूसर निवासी राजवीर (40) पुत्र बलतेज सिंह मजबी सिक्ख व भमी उर्फ पवनसिंह (20) पुत्र राजवीर सिंह  पिता व पुत्र के रूप मे हुई है. वहीं ट्रोले में सवार एक अन्य युवक लवप्रीत निवासी गुरूसर को हनुमानगढ़ के राजकीय चिकित्सालय में उपचाराधीन है. दूसरे ट्रक में सवार मनीराम पुत्र गोपीराम राईका निवासी राईका ढाणी पल्लू व नरेश पुत्र साहबराम निवासी न्यौलखी ट्रक से निकलने में सफल हुए. ट्रक में सवार दोनों को मामुली चोटे आई है.

घटना के बाद लगा लंबा जाम:
घटना के बाद सड़क पर दो किलोमिटर लंबी वाहनों की कतार लग गई. जेसीबी मशीन की सहायता से वाहनों को साईड में कर यातायात सुचारू करवाया गया. घटना की सूचना मिलते ही जिला पुलिस अधिक्षक राशि डोगरा मौके पर पहुंची व घटना स्थल का निरीक्षण किया.

काफी मशक्कत के बाद आग पर पाया काबू:
हादसे के बाद ट्रक व ट्रोले में लगी भयंकर आग के बाद लगभग आधे घंटे बाद दमकल पहुंची इसके बाद नोहर, हनुमानगढ़ व रावतसर की दमकल भी पहुंची. कड़ी मशक्कत के बाद एक घंटे के प्रयास के बाद आग पर काबू पाया. 

प्रशासन की संवेदनशीलता, गंभीर बीमारी से पीड़ित को इलाज के लिए मिला भामाशाह

प्रशासन की संवेदनशीलता, गंभीर बीमारी से पीड़ित को इलाज के लिए मिला भामाशाह

हनुमानगढ़: गंभीर बीमारी से पीड़ित पुत्र को तिल-तिल मरते देख पिता की जिला प्रशासन से परिवार सहित इच्छामृत्यु की गुहार के बाद एक नई उम्मीद सामने आई है. इस बात की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर ने एडीएम को आदेश दिए कि इसका तुरंत से तुरंत निराकरण किया जाना जरूरी है. साथ ही मदद के लिए एक भामाशाह भी सामने आया है.

दरअसल अपने 14 वर्षीय बालक के इलाज के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे पिता ने जिला कलेक्टर और एडीएम अशोक असीजा के सामने गुहार लगाई और कहा या तो मेरे बच्चे का इलाज करवा दे, या फिर मुझे मेरे परिवार के साथ इच्छामृत्यु दे दे. जिला कलेक्टर ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत भामाशाह से बात की. हनुमानगढ़ के भामाशाह श्री खुशालदास यूनिवर्सिटी के मालिक बाबूलाल जुनेजा ने अकेले ही 6.30 लाख देने का वादा कर दिया. इसके अलावा प्रशासन ने डेढ़ लाख की व्यवस्था मुख्यमंत्री राहत कोष से भी कर दी. अब इस बच्चे का इलाज आराम से हो जाएगा. 

रावतसर कस्बे में अप्लास्टिक एनीमिया रोग से ग्रसित 14 वर्षीय हर्ष को बोन मेरो ट्रांसप्लांट की आवश्यकता है. जिसका खर्च करीब 10 लाख रूपए है. अब मजदूर सुरेश नाथ के बेटे का इलाज हो सकेगा. अभी गंगानगर के तपोवन अस्पताल में हर्ष को खून चढ़ाया जा रहा है, वहीं अब जयपुर शिफ्ट किया जायेगा. साथ ही जिला कलेक्टर ने फर्स्ट इंडिया न्यूज़ चैनल को खबर चलाने पर धन्यवाद दिया. 

... हनुमानगढ़ से कपिल शर्मा की रिपोर्ट 

गंभीर बीमारी से पीड़ित पुत्र, पिता ने प्रशासन से लगाई परिवार सहित इच्छामृत्यु की गुहार

गंभीर बीमारी से पीड़ित पुत्र, पिता ने प्रशासन से लगाई परिवार सहित इच्छामृत्यु की गुहार

गंभीर बीमारी से पीड़ित पुत्र, पिता ने प्रशासन से लगाई परिवार सहित इच्छामृत्यु की गुहार

रावतसर: गंभीर बीमारी से पीड़ित पुत्र को तिल-तिल मरते देख पिता ने जिला प्रशासन से परिवार सहित इच्छामृत्यु की गुहार लगाई है. पुत्र के इलाज के लिए अपना सब कुछ गिरवी रख चुके पिता को अब सरकारी योजना का भी लाभ नहीं मिल रहा, क्योंकि अप्लास्टिक एनीमिया एक जानलेवा बीमारी होने पर भी किसी योजना में शामिल नहीं है, जिससे कि इस बच्चे का इलाज सरकारी मदद से हो पाए. 

परिवार की निम्न आर्थिक स्थिति:
दरअसल रावतसर के चिनाई मजदूर सुरेश नाथ के 14 वर्षीय बेटे हर्ष को 4 महीने पहले अप्लास्टिक एनीमिया होने का पता चला. जब से बीमारी का पता चला तब से घर पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. निम्न आर्थिक स्थिति के परिवार का पूरी जमा पूंजी और घर तक गिरवी रख अपने 14 वर्षीय बेटे के इलाज पर लगा दिया. डॉक्टर्स ने 22 बार ब्लड ट्रांसफ्यूज़न के बाद, अब बॉन मेरो ट्रांसप्लांट की सलाह दे दी है, वो भी 23 दिसम्बर से पहले. अप्लास्टिक एनीमिया से पीड़ित मरीज को बार-बार खून चढ़ाना पड़ता है. कारण शरीर में प्राकृतिक तरीके से खून नहीं बनना, लेकिन हर्ष को कई बार खून रिएक्शन करने की वजह से अब चिकित्सकों ने साफ कह दिया है कि बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराना अति आवश्यक हो गया है.

इलाज का खर्चा लगभग 10 लाख रुपए:
जब परिवार ने बोन मैरो ट्रांसप्लांट के बारे में कई बड़े अस्पतालों में बात की तो पता चला इलाज का खर्चा लगभग 10 लाख रुपए है, जो कि इस परिवार के लिए लगभग असंभव सा है. अब परेशान परिवार ने अपनी सारी जमा पूंजी खर्च होने के बाद इलाज ना होते देख इच्छा मृत्यु की मांग करते हुए अतिरिक्त जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है. परिवार का साफ कहना है कि अगर उनके बेटे की इलाज के अभाव में मौत होती है, तो फिर उनके भी जीने का क्या औचित्य रह जाता है. परिवार ने मांग की है कि सरकारी योजना में इस गंभीर बीमारी के बारे में स्पष्टता से जिक्र ना होने की वजह से इस बीमारी को किसी भी योजना के अंदर सम्मिलित नहीं किया गया. अब इस बच्चे के इलाज के लिए परिवार पूरी तरह से समाज और सरकार की तरफ देखने को मजबूर है. 

बीमारी का स्थाई इलाज बोन मैरो ट्रांसप्लांट:
डॉ सीएम ढालिया का कहना है कि इस बीमारी से पीड़ित को बार-बार खून चढ़ाना पड़ता है, क्योंकि शरीर में प्राकृतिक तरीके से खून नहीं बनना ही यह बीमारी है, लेकिन इस बीमारी का स्थाई इलाज बोन मैरो ट्रांसप्लांट ही है जो बेहद खर्चीला भी है. वहीं अतिरिक्त जिला कलेक्टर अशोक असीजा का कहना है कि वह इस बारे में स्वास्थ्य विभाग से जानकारी मंगवा ली गई है, जो भी सम्भव मदद हो पाएगी वो यथा शीघ्र की जाएगी. 

... रावतसर से संवाददाता कपिल शर्मा की रिपोर्ट

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