दौ सौ वर्षों से रंग तेरस पर खेली जा रही कोड़ामार होली, महिलाएं करती है प्रहार

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/04/03 02:57

भीलवाड़ा। दौ सौ वर्षों से शहर मे खेली जा रही रंगतेरस पर जीनगर समाज की कोड़ामार होली की चमक आज भी कायम हैं और इसमें समाज के लोग उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं। परम्परा के तहत पुरूष कढ़ाव में भरा रंग महिलाओं पर डालते हैं और उससे बचने के लिए महिलाऐं कोड़े से प्रहार करती हैं। होली के तेरहवें दिन मनाया जाने वाला महापर्व आज भी अपनी अहमियत बनाए हुए हैं।

परम्परागत ढंग से आज भी भीलवाड़ा स्थित गुलमण्डी सर्राफा बाजार क्षैत्र में शहर के विभिन्न स्थानों में रह रहे जीनगर समाज के स्त्री-पुरूष ढ़ोल व गाजे-बाजे के साथ यहां पहुंचते हैं। इस दिन महिलाऐं सूती साड़ियों से गुंथकर कोड़े बना लेती हैं और वहां रखे पानी व रंग से भरे कड़ाव के पास खड़ी हो जाती हैं। पुरूष कड़ाव से पानी की डोलची भरकर महिलाओं पर फैंकते है और महिलाऐं उन्हें कोडे से मारती हैं। कड़ाव पर जिसका कब्जा हो जाता हैं वहीं इसमें जीतता हैं। 

वहीं महिला पवन देवी जीनगर ने कहा कि साल भर हमें इस त्‍यौहार का इंजतार रहता है। यह परम्‍परा हमारे बुजुर्ग मनाते थे और अब हम इसे आगे बढ़ा रहे है। इसमें महिलाऐं और पुरूष दोनों मिलकर इस होली को खेलते है। इसके बाद शाम को स्‍नेह भोज का आयोजन किया जाता है। वहीं पूर्व महामंत्री नन्‍द किशोर जीनगर कहते है कि लगभग 2 सौ वर्ष पूर्व हमारे बुजुर्गों ने सोचा था कि महिलाओं का सशक्तिकरण के लिए कोई पर्व मनाया जाये। इसके बाद होली के 13 वें दिन कोडामार होली का आयोजन किया गया और इस त्‍यौहार को हम आज तक निभा रहे है। इस दिन महिलाऐं हम पर प्‍यार भरे कोडे बरसाती है तो हम उन पर रंग का पानी डालते है। इसके बाद पूरे समाज का एक सामूहिक भोज का आयोजन किया जाता है। जिससे की समाज में एकता और समरसता कायम रहें।

कोड़ामार होली में नवविवाहित युवक-युवतियों भी बड़े उत्साह से लाया जाता हैं और होली खेलने के बाद बुजुर्गो से आशीर्वाद लेते हैं। महिलाऐं भी इस दिन अपने आपको पुरूषों के बराबर समझती है।

...नवीन जोशी फर्स्ट इंडिया न्यूज भीलवाड़ा

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