देशी-विदेशी परिंदों की शरणस्थली के रूप में विकसित हो रहा कोटा

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/08/30 03:25

कोटा: घना पक्षी अभ्यारण्य के बाद अब शिक्षा नगरी कोटा देशी-विदेशी परिंदो की शरण स्थली के रूप में विकसित होता जा रहा है. चाहे वह साइबेरियन पक्षी हो या हिमालय की ब्लैक काइट या फिर सारस पक्षियों का जोडा. चंबल नदी के अथाह पानी, अरावली की गोद और रियासतकालीन तालाबों में मिलने वाला अनुकूल वातावरण इन्हे नया जीवन दे रहा है और साथ में पर्यटन को भी बढ़ावा मिल रहा है. 

देशी-विदेशी परिंदों ने शुरू किया आशियाना बनाना: 
शिक्षा नगरी कोटा के चर्चे अब इंजिनियरिंग या मेडिकल परीक्षा की तैयारियों के लिए ही नही, देशी विदेशी परिंदों के कारण भी हो रहे है. इंद्रदेव की मेहरबानी से रियासत कालीन तालाब लबालब हो गए है और अब इनमें देशी-विदेशी परिंदों ने अपना आशियाना बनाना शुरू कर दिया है. पेटेंट स्टॉर्क, ओपन बिल स्टॉर्क, ब्लैक आईब्रिज,परपल मुरेन सहित 300 से अधिक प्रजातियों के 25 हजार से अधिक पक्षी प्रवास पर आते है जो सितंबर से जुलाई तक अलग-अलग जगहों पर देखने को मिलेगा. कई सालों बाद उदपुरिया का तालाब भी जांघिल परिंदो से गुलजार हुआ है लेकिन नेचर प्रमोटर मांग कर रहे है कि देशी विदेशी परिंदों के लिए अनुकूल वातावरण को और बढ़ाया जाए और साथ में पर्यटन के लिहाज से भी इन्हे विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जाए. 

कोटा शहर भी पर्यटन के मानचित्र पर लगा सकता है चार चांद: 
पहले चंबल घडियालय अभ्यारण्य, फिर मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में बाघों की दहाड़ और अब भरतपुर की तरह देशी विदेशी परिंदों की दस्तक ने शिक्षा नगरी कोटा को एक नई पहचान दिलवाई है. ग्रामीणों के साथ यदि पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन इस ओर ध्यान दे तो कोटा शहर भी पर्यटन के मानचित्र पर चार चांद लगा सकता है.   

...सचिन ओझा, फर्स्ट इंडिया न्यूज कोटा

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