जयपुर Rajasthan: क्षत्रिय युवक संघ का हीरक जयंती कार्यक्रम आज, जयपुर में जुटेगें देशभर से राजपूत समाज के लोग; जानिए प्रदेश की राजनीति में प्रमुख दिग्गजों का वर्चस्व

Rajasthan: क्षत्रिय युवक संघ का हीरक जयंती कार्यक्रम आज, जयपुर में जुटेगें देशभर से राजपूत समाज के लोग; जानिए प्रदेश की राजनीति में प्रमुख दिग्गजों का वर्चस्व

जयपुर: राजपूत समाज की अग्रणी संस्था क्षत्रिय युवक संघ का आज हीरक जयंती कार्यक्रम है. युवक संघ प्रमुख भगवान सिंह रोलसाहेबसर की अगुवाई में आयोजन होगा. युवक संघ वैसे तो सामाजिक संगठन है फिर भी इस राजपूत सियासत का पॉवर सेंटर कहे जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी. यही कारण है कि हीरक जयंती कार्यक्रम को सफल बनाने मे राजपूत वर्ग के नेताओं ने दलीय सियासत की चिंता किए बगैर पूरी ताकत लगा दी है. उल्लेखनीय है कि राजपूताना की राजनीति को आजादी के बाद से ही राजपूत समाज प्रभावित करता आया है. बीजेपी को तो उसके जन्म के बाद से ही राजपूत समाज ने सर्वाधिक प्रभावित किया. समय समय पर अपने वोटों की ताकत भी इस समाज ने जताई और दिखाई है.

राजस्थान में जमींदारा प्रथा के खिलाफ जब कांग्रेस खड़ी हुई तब राजपूत राजे रजवाड़ों का झुकाव विपक्षी दलों की और रहा. साल 1956 में जब राम राज्य परिषद की ओर से करीब 50 राजपूतों ने चुनावों में जीत दर्ज की. बेहद कम राजपूत ही कांग्रेस के टिकट पर जीते थे. बहुत कम लोगों को पता है कि बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री और कद्दावर राजपूत नेता भैरों सिंह शेखावत को राम राज्य पार्टी ने 1952 में टिकट नहीं दिया था, बाद में उन्होंने जनसंघ का दामन थामा था. आगे चलकर राम राज्य परिषद मिल गई स्वतंत्र पार्टी में जिसकी अगुवाई जयपुर की राजमाता गायत्री देवी कर रही थी. स्वतंत्र पार्टी का अस्तित्व खत्म हुआ तब राजपूत राजनीति शिफ्ट हुई. जनता पार्टी में और आगे चलकर सोहन सिंह, बिशन सिंह शेखावत, मदन सिंह दांता, तन सिंह जैसे कद्दावर नेताओं की अगुवाई में राजपूत जुड़ गये बीजेपी से और राजपूताना में कमल खिला दिया.  

----------------राजपूताना में राजपूत------------------------

---प्रमुख राजपूत दिग्गज----
--स्व महाराजा मान सिंह द्धितीय 
स्व.तन सिंह, स्व.महाराजा हनुमंत सिंह
स्व.महाराजा कर्णी सिंह, केसरी सिंह पाटोदी, राव धीर सिंह
जोधपुर महाराजा गज सिंह, कल्याण सिंह कालवी, भैरों सिंह शेखावत
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कुल जनसंख्या 11 प्रतिशत:-
- रावणा को मिलाकर 14 प्रतिशत
- सरकारी आंकड़े 9 प्रतिशत
- 60 विधानसभा सीटों पर सीधा प्रभाव
- वेस्टर्न राजस्थान, सेंट्रल राजस्थान, अजमेर, जयपुर, जोधपुर संभाग, उदयपुर संभाग में राजपूत लगभग 40 सीटों पर जीतने और जीताने की स्थिति. 
- झुंझुनूं और चूरु में राजपूत वहां की सीटों को सीधे प्रभावित करते हैx
- लोकसभा की 20 से 22 सीटों पर सीधा प्रभाव

---भाजपा के राजपूत दिग्गज---
स्व. भैरों सिंह शेखावत, स्वर्गीय जसवंत सिंह, स्व.महेन्द्रा कुमारी
गजेन्द्र सिंह शेखावत, महंत प्रताप पुरी महाराज
राव राजेन्द्र सिंह, राजेन्द्र राठौड़, दिया कुमारी,
गजेन्द्र सिंह खींवसर, पुष्पेंद्र सिंह बाली, राज्यवर्धन सिंह राठौड़, राजपाल सिंह शेखावत,
नरपत सिंह राजवी, देवीसिंह भाटी, बाबू सिंह राठौड़, मानवेन्द्र सिंह, नारायण सिंह देवल, इज्येराज सिंह, कल्पना सिंह, भवानी सिंह राजावत, 
छोटू सिंह भाटी, हमीर सिंह भायल, प्रेम सिंह बाजौर, रणधीर सिंह भिंडर, भंवर सिंह पलाड़ा, शम्भू सिंह खेतासर, 
सिद्धी कुमारी, पद्मिनी कुमारी, दशरथ सिंह शेखावत, नरपत सिंह शेखावत, भंवर सिंह पलाड़ा है बडे़ राजपूत क्षत्रप

----कांग्रेस के राजपूत दिग्गज----
--स्व धीर सिंह राव(शाहपुरा), भीम सिंह मंडावा, स्वर्गीय पूर्व महाराजा भवानी सिंह,
स्वर्गीय खेत सिंह राठौड़, स्वर्गीय गुलाब सिंह शक्तावत,
स्वर्गीय दिग्विजय सिंह उनियारा, चंद्रेश कुमारी, प्रताप सिंह खाचरियावास, भंवर जितेन्द्र, धर्मेन्द्र राठौड़ नांद, भंवर सिंह भाटी, भरत सिंह सांगोद
राजेंद्र सिंह गुढ़ा, खुशबीर सिंह जोजावर, उम्मेद सिंह शेरगढ़, विक्रम सिंह मूंडरू 
अजीत सिंह शेखावत, करण सिंह उचियाड़ा, यश प्रताप सिंह, महेंद्र सिंह

राजस्थान के राजपूत समाज में राजघरानों का अपना महत्व है. जोधपुर के पूर्व राज प्रमुख गज सिंह के प्रति प्रत्येक राजपूत का आदर भाव किसी से छुपा नहीं. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी खुद को राजपूतों की बेटी और जाटों की बहू कहती है. सब जानते है कि वसुंधरा राजे सिंधिया राजघराने की बेटी है. यह भी दिलचस्प है कि राव धीर सिंह कांग्रेस में थे और उनके पुत्र राव राजेन्द्र सिंह बीजेपी के कद्दावर नेता है. राजमाता गायत्री देवी सम्मानजनक नाम रहा, उन्हीं के कुल के महाराजा भवानी सिंह ने जयपुर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा वहीं उनकी पुत्री दिया कुमारी बीजेपी से राजसमंद सांसद है. 

बीजेपी को राजस्थान में खड़ा करने वाले भैरों सिंह शेखावत रहे जिन्होंने मुख्यमंत्री पद हासिल किया और उपराष्ट्रपति पद के ओहदे पर भी पहुंचे. वहीं उनके सगे भतीजे प्रताप सिंह खाचरियावास आज कांग्रेस के स्थापित नेता है और गहलोत सरकार में कैबिनेट मंत्री. इन दिनों राजपूत समाज में नई धारा बह रही है. सियासी दल समाज के नये नेतृत्व को उभार रहे हैं. नई लीड़रशीप को आगे बढ़ाने और राजनीतिक चेतना जगाने की भी कोशिश है. राजस्थान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ,जनसंघ को स्थापित करने और फिर बीजेपी को मजबूती देने में राजपूत समाज की भूमिका किसी से छुपी नहीं है. इसी परिपेक्ष्य में क्षत्रिय युवक संघ और प्रताप फाउंडेशन एक पॉवर सेंटर बनकर उभरे.

 .............तन सिंह ने क्षत्रिय युवक संघ की नींव रखी थी और इसे ठीक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की तर्ज पर ड़ाला..विशुद्ध राजपूत संगठन के तौर पर क्षत्रिय युवक संघ को खड़ा कर दिया. संस्कार निर्माण की दिशा में क्षत्रिय युवक संघ का अपने समाज में व्यापक योगदान है. गणवेश आधरित क्षत्रिय युवक संघ के प्रशिक्षण शिविर राज्य नही देश भर में लगते है.

......आगे चलकर राजपूत आरक्षण आंदोलन के वक्त क्षत्रिय युवक संघ की कोख से ही प्रताप फाउंडेशन ने जन्म लिया. राजपूत सभा भवन की अपनी भूमिका रही है. राजपूताना की राजनीति में राजपूत समाज की भूमिका व्यापक रही है. सरपंच से लेकर सांसद तक बड़ी तादाद में इसी समाज के लोग चुनाव जीतते. अब समाज फिर अपनी सियासी ताकत दिखाने को आतुर है.

...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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