इलाज के अभाव में हर साल दम तोड़ रहा है 50 हजार पशुधन

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/04/14 06:30

जैसलमेर। कहने को पशु बाहुल्य जिला है जैसलमेर, मगर सरकार को शायद इसकी जानकारी नहीं है। तभी तो यहां के पशु अस्पताल बदहाल स्थिति में है। जिले में करीब 32 लाख पशु हैं और इन पशुओं के इलाज के लिए डॉक्टर नहीं के बराबर है। लगभग 90 प्रतिशत अस्पतालों पर ताले लटके हुए हैं। मुख्य रूप से जिला मुख्यालय स्थिति अस्पताल में ही पशुओं को इलाज मिल रहा है। शेष ग्रामीण क्षेत्रों में पशु इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। लंबे समय से यह स्थिति होने से अब तो पशुपालक खुद ही बाजार में दुकानों से दवाई लाकर इलाज करने का प्रयास करते हैं। 

पशु बाहुल्य जिले में अधिकांश लोगों की आजीविका का साधन पशुपालन ही है। ऐसे में जो लोग पशु पालकर अपनी रोजी रोटी चला रहे हैं उनके सामने बड़ी दिक्कत यह है कि वे अपने पशुओं का समय पर इलाज नहीं करवा पाते हैं। इलाज के अभाव में हर साल लगभग 50 हजार पशु दम तोड़ देते हैं। जिससे कई पशुपालकों की रोजी-रोटी पर संकट आ जाता है। 

ये अस्पताल है बंद हैं:
फतेहगढ़, सम, मोहनगढ़, रामगढ़, सुल्ताना, खींया, खुहड़ी, म्याजलार, झिनझिनयाली, जोगा, डांगरी, लखा, सतो, पिथला, सोढाकोर, बीदा, पूनमनगर, सांकड़ा, नोख, भणियाणा, सत्याया, भीखोड़ाई, दांतल, खेतोलाई, बैरसियाला, दव, लूणार, पोछीना आदि इलाकों में अस्पताल बंद हैं। 

गायों को लेकर पशुपालक भी गंभीर नहीं:
पशु चिकित्सकों के अनुसार गायों को लेकर पशुपालक भी गंभीर नहीं है। बीमारी से होने वाली मौतों में गायों की संख्या ज्यादा होती है जबकि भेड़ बकरियों की कम। उनके अनुसार यदि किसी के पास 50 गायें है और केवल 10 या 15 गायें ही दूध देती है तो पशुपालक केवल उन गायों में ही समय पर टीका आदि लगवाने या फिर इलाज करवाता है। 

88 पशु अस्पताल बंद पड़े हैं:
 जिले में करीब 104 अस्पताल हैं। इसमें 12 प्रथम श्रेणी, 28 पशु अस्पताल, 60 पशु उप केन्द्र, 3 मोबाइल यूनिट व एक पशु औषधालय है। इनमें 6 प्रथम श्रेणी के, 23 पशु अस्पताल, 56 पशु उप केन्द्र, दो मोबाइल यूनिट व एक पशु औषधालय बंद पड़ा है। कुल 88 अस्पतालों पर ताले लटके हुए हैं। 

नहीं मिलता निशुल्क दवा का लाभ:
पशु चिकित्सक एवं पशुधन सहायक सहित स्टाफ के अभाव में 95 प्रतिशत उप केन्द्र संचालित नहीं हो पा रहे हैं। इसके चलते पशुओं का इलाज नहीं हो रहा है। इसके साथ ही पशुपालकों को पशुधन निशुल्क आरोग्य योजना का भी लाभ नहीं मिल रहा है। पशु उप केन्द्र में स्टाफ के नहीं होने के चलते पशुपालकों को इलाज के लिए सौ सौ किमी दूर जाना पड़ता है। समय पर पशुओं के इलाज के लिए पशुपालक निजी दुकानों से दवाइयां खरीदने को मजबूर रहते है। इससे पशुपालकों को आर्थिक रूप से नुकसान झेलना पड़ रहा है।   

जिले में पशुओं की संख्या:
गौवंश 4.34 लाख 
भैंस 4 हजार 
ऊंट 49 हजार 
घोड़े 1 हजार 
भेड़ 11.85 लाख 
बकरी 15.13 लाख 
अन्य 56 हजार 

... जैसलमेर संवाददाता सुर्यवीर सिंह तंवर की रिपोर्ट 
                      

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