VIDEO: लैंड पुलिंग कानून को अमल में लाने की कवायद शुरू, शहरी क्षेत्र को मिलेगा फायदा

Abhishek Shrivastava Published Date 2019/04/04 02:51

जयपुर। शहरी जनता को बड़ी राहत देने के लिए के लिए प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने पिछली भाजपा सरकार में पारित एक कानून को अमल में लाने और एक महत्वपूर्ण विधयेक को बतौर कानून लागू करने की कवायद शुरू कर दी है। इस कवायद के अंजाम तक पहुंचने पर जहां एक ओर शहरों का आधारभूत विकास तेजी से हो सकेगा वहीं लोगों को अपने आशियाने का मालिकाना हक मिल सकेगा। 

प्रदेश की पिछली भाजपा सरकार के समय 4 अप्रैल 2016 को लैंड पूलिंग बिल राजस्थान विधानसभा ने पारित किया गया था। लैंड पूलिंग बिल तो केन्द्र सरकार की स्वीकृति के बाद प्रदेश में बतौर कानून 15 सितम्बर 2018 को इसे लागू भी कर दिया गया, लेकिन पिछली सरकार ने इसे क्रियान्वित करने के लिए नियम नहीं बनाए। इसके कारण लैंड पूलिंग कानून लागू तो कर दिया लेकिन इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। अब नगरीय विकास विभाग ने नियमों को प्रारूप तैयार कर लिया है। प्रारूप पर विधि विभाग और वित्त विभाग की स्वीकृति लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आपको बताते हैं कि लैंड पूलिंग कानून के उपयोग से प्रदेश के शहरी क्षेत्र को क्या फायदा मिलेगा।

कानून का ये मिलेगा फायदा---

- आधारभूत विकास योजनाओं के लिए भूमि मिलना आसान आसान होगा
- खातेदारों को यथासंभव अपनी भूमि में से मुआवजे के तौर पर 45 प्रतिशत विकसित भूमि मिलेगी
- अवाप्ति कानून की लम्बी प्रक्रिया से नहीं गुजरने के कारण बेवजह समय नहीं लगेगा
- शहरों में बरसों से कागजों में लंबित सेक्टर प्लान की सड़कों का निर्माण कराया जा सकेगा

प्रदेश की पिछली भाजपा सरकार के समय 8 अप्रैल 2015 को अपार्टमेंट ऑनरशिप बिल लागू किया गया था। इस बिल को लागू करने की कवायद पिछले करीब 15 सालों से चल रही है। भाजपा सरकार के समय में ही बिल को स्वीकृति के लिए केन्द्र सरकार को भेजा गया। आज भी केन्द्र सरकार के पास ही यह बिल स्वीकृति के लिए लंबित है। प्रदेश की मौजूदा सरकार ने यह तय किया है कि जल्द ही इस बिल पर स्वीकृति देने के लिए केन्द्रीय आवासन व शहरी कार्य मंत्रालय को पत्र भेजा जाएगा। आपको बताते हैं किस तरह यह बिल अब तक अटका हुआ और अगर ये बिल लागू होता तो इससे क्या फायदा मिलता । 

यूं अटका है बिल---

- बिल के कई प्रावधान केन्द्रीय कानूनों के प्रावधान पर प्रभाव डालने वाले हैं
- 24 अप्रैल 2015 को इसी कारण बिल राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए केन्द्र सरकार को भेजा गया
- रियल एस्टेट रेगुलेशन कानून से असंगत होने के कारण केन्द्र सरकार ने बिल की चार धाराओं को हटाने को कहा
- फरवरी 2018 में केन्द्र से लौटने के बाद राज्यपाल ने बिल पुनर्विचार के लिए बिल राज्य सरकार को भिजवा दिया
- 7 मार्च 2018 को विधानभा से संशोधित बिल को पारित कराया गया
- 24 अप्रैल 2018 को संशोधित बिल फिर से राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा,जो अब तक लंबित है

बिल लागू होने के होंगे फायदे--- 
- बिल लागू करने का 15 सालों से इंतजार कर रहे अपार्टमेंटवासियों को उनके अपार्टमेंट का मालिकाना हक मिलता
- अपार्टमेंट के रखरखाव के लिए मेंटीनेंस राशि देने के लिए सभी अपार्टमेंटवासी बाध्य होते
- अपार्टमेंट के रखरखाव की जिम्मेदारी बिल्डर अपार्टमेंवासियों की सोसायटी को देने के लिए बाध्य होता
- अपार्टमेंट के कॉमन एरिया व विभिन्न सुविधाओं पर अपार्टमेंट वासियों के अधिकार स्पष्ट होते

इन दोनों ही महत्वपूर्ण कानूनों को लागू करने के लिए राज्य सरकार ने कमर कस ली है। इसके लिए जल्द प्रमुख सचिव नगरीय विकास विभाग के स्तर पर एक समयबद्ध कार्यक्रम भी बनाया जाएगा।

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