हाईकोर्ट परिसर में सजायाफ्ता कैदियों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेस की सुविधा का हुआ शुभारंभ

Nizam Kantaliya Published Date 2019/05/14 09:09

जयपुर: प्रदेश के किसी भी जेल में हत्या या हत्या के प्रयास सहित अन्य मामलों में सजा काट रहे कैदी अब जेल से ही अपने अधिवक्ता या विधिक सलाहाकार से बात कर सकेंगे. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ और जयपुर पीठ में वीडियो कॉन्फ्रेस की सुविधा का आगाज कर दिया है.

रालसा ने की शुरूआत:
आर्थिक या पारिवारिक कारणों के चलते लंबे समय से जेल में बंद सजायाफ्ता कैदियों के लिए प्रदेश में एक नई राह खुल गयी है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रदेश की अधिकांश जेलों में वीडियो कॉन्फ्रेस की सुविधाएं उपलब्ध कराइ जा चुकी हैं. वहीं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर और जयपुर पीठ परिसर में भी वीडियो कॉन्फ्रेस सुविधा का आगाज कर दिया है. इस सुविधा के जरिए अब जेलो में बंद कैदी जेल से ही सीधे हाईकोर्ट के अधिवक्ता से बातचीत कर सकेंगे. रालसा सदस्य सचिव अशोक जैन ने इसकी शुरूआत करते हुए कोटा, अलवर जेलो के चार कैदियों की उनके अधिवक्ताओं से बात कराई.

आर्थिक रूप से कमजोर कैदियों को मिलेगा फायदा:
आकड़ों के अनुसार प्रदेश की 9 सेंट्रल जेल में 9953 कैदी है, जिसमें से 4459 कैदी सजायाफ्ता और 5456 अंडर ट्रायल हैं. प्रदेश की जेलो में कैद सैंकड़ों सजायाफ्ता कैदी अपनी आर्थिक स्थिती के चलते अदालतों में अपना पक्ष नहीं रख पा रहे हैं. जेल में ऐसे सजायाफ्ता कैदी भी हैं, जिन्हें वकील नहीं मिल रहा है और आर्थिक स्थिति कमजोर है. इनकी जिला विधिक प्राधिकरण की तरफ से शिविर का आयोजन कर जानकारी लेते हैं, लेकिन समय कम होने के कारण कई कैदी ऐसे हैं, जिनकी बात प्राधिकरण तक नहीं पहुंच पाती है. वीडियो कॉन्फ्रेस के जरिए सभी कैदी एक साथ बैठकर अपनी बात रख पाएंगे. जिन कैदियों के पास अधिवक्ता नहीं हो, उन्हे विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से अधिवकता उपलब्ध कराया जायेगा. 

प्रदेश की जेलों में कई ऐसे भी कई कैदी हैं, जो हत्या कर सजा काट रहे हैं या पूरा परिवार ही जेल में हैं. ऐसी स्थिति में प्राधिकरण से जुड़े वॉलंटियर उनके परिवार या गांव में संपर्क करेंगे. जो कैदी  परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उच्च न्यायालयों में अपील नहीं कर पा रहे, उन्हें इससे सीधा फायदा मिलेगा. 

... संवाददाता निजाम कण्टालिया की रिपोर्ट 

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