पंजीयन अधिकारों पर रार! विधि विभाग ने लौटाई परिवहन विभाग की फाइल

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/09/06 05:27

जयपुर (काशीराम चौधरी)। परिवहन वाहनों की श्रेणी में शामिल भारी वाहन और यात्री वाहनों के पंजीयन मामले में नया विवाद खड़ा हाे गया है। परिवहन विभाग इन वाहनों के पंजीयन का अधिकार वाहन डीलर्स को देना चाहता है, लेकिन विधि विभाग ने इस पर आपत्ति जता दी है। यह भी कहा है कि गैर परिवहन यानी कारों के पंजीयन का अधिकार भी डीलर्स को देना गलत है। ऐसे में परिवहन विभाग अब दुबारा से प्रस्ताव भेज रहा है।

दरअसल, पिछले साल दिसंबर में परिवहन विभाग ने एक प्रस्ताव तैयार किया था कि भारी वाहनों के पंजीयन का अधिकार डीलर्स को दिया जाए। इससे पहले गैर परिवहन वाहनों की श्रेणी में शामिल कार या दुपहिया का पंजीयन भी डीलर्स कर रहे हैं, लेकिन ट्रांसपोर्टर्स की आपत्तियों के चलते 2 माह पहले परिवहन विभाग ने भारी वाहनों के पंंजीयन को लेकर विधि विभाग से राय मांगी थी। उस फाइल में विधि विभाग ने भारी वाहनों के पंजीयन का अधिकार डीलर्स को दिए जाने से इनकार कर दिया है। साथ ही यह भी कहा है कि गैर परिवहन वाहनों के रजिस्ट्रेशन की पावर भी डीलर्स को देना अनुचित है।

विधि विभाग ने शक्तियां विभाजन की स्वीकृति नहीं देते हुए फाइल परिवहन विभाग को लौटा दी है। फाइल में लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 19 नवम्बर 1986 को ईश्वर सिंह बग्गा बनाम राजस्थान सरकार में पारित निर्णय के तहत राज्य को दी गई शक्तियों का विभाजन नहीं किया जा सकता है। विधि विभाग ने यह फाइल 9 अगस्त को परिवहन को भेजी है। ऐसे में परिवहन विभाग के सामने अब गैर परिवहन वाहनों का रजिस्ट्रेशन का पावर डीलर्स को देने के मामले में नई समस्या खड़ी हो गई है। 

वाहन मालिक को नहीं मिलेगी परेशानी से राहत :
- डीलर्स को पंजीयन अधिकार दिए तो भी नहीं मिलेगी राहत 
- भारी और यात्री वाहनों की होती है पहले फिटनेस और टैक्स गणना
- फिटनेस और टैक्स गणना का अधिकार केवल परिवहन अधिकारियों को
- नियमों के तहत बॉडी बनने की जांच भी करते परिवहन निरीक्षक
- उसके बाद में ही होता है वाहन का पंजीयन
- डीलर्स को अधिकार देने पर भी वाहन मालिक को काटने पड़ेंगे आरटीओ के चक्कर

विधि विभाग की ओर से पंजीयन अधिकारों की फाइल लौटाने के बाद परिवहन अधिकारी नई गली निकाल रहे हैं। परिवहन अधिकारियों ने अब दो दिन पहले इसी फाइल पर विधि विभाग के अधिकारियों को गुमराह करते हुए वापस से मंजूरी लेने के लिए फाइल भेजी है। इसमें परिवहन अधिकारियों ने तर्क दिया है कि गैर परिवहन वाहनों के रजिस्ट्रेशन की शक्तियां भी वर्ष 2000 में विधि विभाग से स्वीकृति लेने के बाद ही दी थी।

परिवहन अधिकारियों ने अब भेजी फाइल में यह भी लिखा है कि गैर परिहवन वाहनों के रजिस्ट्रेशन के समय डीलर्स वाहनों को नंबर आवंटित करता है। इसके बाद डीलर वाहनों का डाटा आरसी प्रिंट के लिए आरटीओ ऑफिस में भेजता है। आरसी प्रिंट में संबंधित डीटीओ के हस्ताक्षर होते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि आरसी पर डीटीओ के नहीं बल्कि डीलर्स के आर्थोराज्ड व्यक्ति के हस्ताक्षर हो रहे हैं। कुल मिलाकर यदि भारी वाहनों के पंजीयन अधिकार डीलर्स को भी दिए जाते हैं तो आम वाहन मालिकों को इससे कोई खास राहत नहीं मिलेगी। उलटे डीलर कार्यालय और आरटीओ कार्यालय के बीच चक्कर बढ़ने की आशंका रहेगी।

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