जानें राजस्थान विधानसभा चुनाव में महिलाओं की भागीदारी के समीकरण 

Dr. Rituraj Sharma Published Date 2018/11/24 09:26

जयपुर (ऋतुराज शर्मा)। राजनीति में महिलाओं की भागीदारी 33 से 50 फीसदी सुनिश्चित करने के जुमले और शगूफे भले ही छोड़े जाते हों लेकिन जब बारी आती है तो ये वादे खानापूर्ति बनकर रह जाते हैं। हाल ही में हुए टिकट वितरण में पार्टियों ने यह साबित किया है जबकि दी गई टिकटों के मुकाबले चुनाव जीतने के ट्रेक रिकॉर्ड में वे पुरुषों से आगे रहीं हैं। खास रिपोर्ट- 

राज्य में 2 हजार 294 प्रत्याशियों के भाग्य का 7 दिसंबर को 4 करोड़ 76 लाख 72 हजार 871 मतदाता करेंगे, इनमे 2 करोड़ 28 लाख 26 हजार 329 महिला मतदाता हैं।  पुरुष के मुकाबले 1 लाख 54 हजार 228 ज्यादा महिला वोटर्स  इस बार मतदाता सूची में नाम जुड़वाने में आगे रही है लेकिन समान प्रतिनिधित्व की बात उनके लिए अभी दूर की कौड़ी ही है।

—अगर औसत देखे तो 200 में से 60 से 66 महिलाओं को टिकट मिलना चाहिए जबकि बीजेपी ने 23 ओर कोंग्रेस ने 26 महिलाओं को ही टिकट दिया गया।
—2294 प्रत्याशियों के भाग्य का 7 दिसंबर को 4 करोड़ 76 लाख 72 हजार 871 मतदाता करेंगे , 
—इसमें 2 करोड़ 48 लाख 46 हजार 295 पुरूष  वोटर्स यानि 52.11 प्रतिशत 
—तो 2 करोड़ 28 लाख 26 हजार 329 महिला मतदाता हैं। यानि  47.88 प्रतिशत महिला मतदाता हैं। 
—भाजपा ने 23, कांग्रेस ने 26 और बसपा ने 15 महिलाएं उतारीं, 55 निर्दलीय

200 सीटों पर 2105 पुरुष और 189 महिला प्रत्याशी मैदान में - 

—राज्य निर्वाचन विभाग ने 2018 विधानसभा चुनाव की 200 सीटों पर प्रत्याशियों की सूची जारी 
—इनमें 2105 पुरुष एवं 189 महिला प्रत्याशी मैदान में
—बीजेपी ने 23 महिलाओं को टिकट दिया है 
—वहीं, कांग्रेस ने इस बार 26 महिलाओं को अपना उम्मीदवार बनाया है
—बसपा ने भी महिलाओं को 15 टिकट दिए हैं
—सीपीएम, सीपीआई और एनसीपी जैसी राष्ट्रीय पार्टियों ने पिछले चुनाव की तरह ही इस बार भी महिला प्रत्याशी पर भरोसा नहीं जताया है
—प्रदेश में 55 महिलाएं अपने बलबूते यानी निर्दलीय चुनाव मैदान में है 
—अन्य रजिस्टर्ड पार्टियों के चुनाव चिह्न पर 69 महिलाएं चुनाव लड़ रही हैं।

ये हाल तब, जब पिछली बार भाजपा की 26 में से 22 महिला प्रत्याशी जीतीं

—विधानसभा चुनाव-2013 में कुल 28 महिलाएं जीती थीं। भाजपा ने 26 महिलाओं को उतारा, उनमें से 22 जीती थीं। महिलाओं की जीत का प्रतिशत 84 रहा।
—फिर भी इस बार भाजपा ने 23 महिलाओं को ही टिकट कम दिया है। 
—कांग्रेस ने पिछले चुनाव की तुलना में तीन सीटें बढ़ाकर 27 महिलाओं को मैदान में उतारा है। हालांकि, पिछले चुनाव में कांग्रेस की 24 महिला प्रत्याशियों में सिर्फ एक ही महिला जीतकर आईं थी। 
—बसपा के तीन विधायकों में एक भी महिला नहीं जीती। लेकिन, बसपा ने इस बार महिलाओं को पिछले चुनाव की तुलना में पांच सीटें ज्यादा दी है। 

कांग्रेस-भाजपा ही नहीं बल्कि, राष्ट्रीय, प्रदेश स्तरीय एवं रजिस्टर्ड पार्टियां महिला प्रत्याशी बनाने में कंजूसी दिखाती रही हैं। पिछले चुनाव में 166 महिला प्रत्याशियों में से 28 ने जीत हासिल कर सभी को चौंका दिया था।

—यानि जितनी महिला प्रत्याशी मैदान में उतरीं, उनमें से 17 प्रतिशत ने जीत हासिल की।
—172 सीटें पुरुषों ने जीतीं, लेकिन इसके लिए 1930 पुरुष प्रत्याशी मैदान में उतरे थे। यानी करीब 9 फीसदी पुरुष प्रत्याशी ही जीत पा सके। 
—इस बार के विधानसभा चुनाव में 2294 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनमें 189 महिला प्रत्याशी भाग्य आजमा रही हैं, जो कुल प्रत्याशियों का करीब 8 प्रतिशत है जिसमें फिर बेहतर परिणाम के प्रति महिला वर्ग आश्वस्त है।

साफ है कि यदि बेहतर प्रतिनिधित्व का मौका मिले तो महिलाएं भारतीय लोकतंत्र के महायज्ञ में प्रमुख रूप से आहूति दे सकती हैं लेकिन वोट बैंक की छिछली राजनीति में उलझी पार्टियों के लिए फिलहाल इस चिंतन का समय नहीं है।

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