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जानें जालोर जिले की आहोर विधानसभा सीट का सियासी इतिहास 

जानें जालोर जिले की आहोर विधानसभा सीट का सियासी इतिहास 

आहोर (विक्रमसिंह करणोत)। जालोर जिले की आहोर विधानसभा सीट एक बार कांग्रेस तो एक बार भाजपा की झोली में आती रही है। ये सिलसिला 1998 से लगातार चल रहा है। पर क्या यही इतिहास इस बार भी दोहराया जाएगा या फिर भाजपा इस बार इस मिथक को तोड़ने में कामयाब रहेगी ये भविष्य के गर्भ में है। 

अगर पिछले चार चुनाव परिणामों की बात करें तो 1998 में यहां से कांग्रेस के कद्दावर नेता भगराज चौधरी विधायक बनने में कामयाब हुए। साथ ही प्रदेश में बनी गहलोत सरकार में उन्हें वन एवं पर्यावरण जैसा अहम मंत्रालय भी दिया गया। पर अगले 2003 के चुनाव में भाजपा के नए नवेले नेता शंकरसिंह राजपुरोहित ने पहली बार आहोर सीट से भाजपा का परचम लहराकर विधानसभा में प्रवेश किया। हालांकि जीत का अंतर बहुत कम रहा पर भाजपा को 2003 के चुनाव में पहली बार आहोर की सीट से जीत का स्वाद महसूस हुआ। 

भाजपा को पहली बार जीत दिलवाने वाले शंकरसिंह राजपुरोहित का टिकिट काटकर भाजपा ने 2008 में यहां से चिरंजीलाल दवे को अपना उम्मीदवार बनाया। वहीं कोंग्रेस ने पुनः एकबार भगराज चौधरी को ही मैदान में उतारा और नतीजा भी कोंग्रेस के पक्ष में गया और कोंग्रेस के भगराज चौधरी यहां से विधायक बने। पर 2013 के चुनाव में भाजपा ने अपनी गलती में सुधार करते हुए पुनः शंकरसिंह राजपुरोहित को मैदान में उतारा। वहीं कोंग्रेस ने भगराज चौधरी का टिकिट काटकर नए नवेले उम्मीदवार सवाराम पटेल को मैदान में उतारा। नतीजा भाजपा के पक्ष में गया और शंकरसिंह राजपुरोहित ने एक बार फिर से भाजपा को आहोर सीट से जीत दिलाकर कोंग्रेस को उम्मीदवार बदलने की गलती का अहसास करवा दिया। 

1998 से अब तक चार बार के चुनाव में एक मर्तबा भाजपा एक मर्तबा कोंग्रेस को बारी बारी यहां से जीत मिली। वहीं पिछले चारो चुनावों में दोनों ही पार्टियों को उम्मीदवार बदलना महंगा भी साबित हुआ है। ऐसे में अब 2018 के चुनावों में ये देखना दिलचस्प रहेगा कि दोनों ही पार्टियां अपने पुराने उम्मीदवारों पर भरोसा जताकर चुनाव मैदान में उतारती है या फिर कोई पार्टी उम्मीदवार बदलने की गलती दोहराती है। वही आहोर की जनता क्या परिणाम देती है ये भी देखने वाली बात होगी। एक बार भाजपा एक बार कांग्रेस का मिथक टूटता है या यही इतिहास दोहराया जाएगा। ये तो 12 दिसम्बर को ही पता चल पाएगा। 
 

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