VIDEO: जानें क्या है शेखावाटी की धरती पर पीएम मोदी के दौरे का सियासी गणित 

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/05/04 03:08

जयपुर। शेखावाटी की धरती ने बीते विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को मजबूती दी। इसी मजबूती के सियासी तिलिस्म को तोड़ने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कल सीकर का चुनावी दौरा हुआ। सुमेधानंद सरस्वती के पक्ष में उन्होंने चुनावी सभा की। जाटलैण्ड से ही सियासी संदेश जाता है, लिहाजा मोदी ने कहा चुनाव के चार चरणों में चित हो चुकी कांग्रेस अब सर्जिकल स्ट्राइक का नया ड्रामा कर रही है। जबकि बालाकोट एअर स्ट्राइक से पहले स्ट्राइक शब्द इन्होंने सुना भी नहीं था। सीकर की सभा से पीएम ने झुंझुनूं की जनता को भी चुनावी संदेश दिया। 

शेखावाटी के सियासी केन्द्र सीकर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनावी हुंकार भरी। अभिनंदन, सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट के आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद करने जैसे राष्ट्रवाद आधारित विषयों को फिर से नरेन्द्र मोदी ने उठाया और कांग्रेस को जमकर कोसा। 

विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने फहराया परचम: 
सीकर जाट पॉलिटिक्स का गढ़ माना जाता रहा है। कांग्रेस का भी परम्परागत गढ़ रहा है, लेकिन बीते सालों में भाजपा व कॉमरेड ने कांग्रेसी गढ़ ढहाये और चुनावी सफलता प्राप्त की। बीते विधानसभा चुनाव जरुर कांग्रेस के लिये अच्छे रहे। सीकर लोस क्षेत्र में आती है 8 विस सीटें आती है। 8 में से 6 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस ने परचम फहराया। सीकर, दांतारामगढ, धोद, लक्ष्मणगढ़, श्रीमाधोपुर, नीम का थाना में कांग्रेस ने विजय प्राप्त की। खंडेला से निर्दलीय विधायक ने चुनावी जीता हालांकि इनकी निष्ठा मुख्यमंत्री गहलोत के प्रति है। चौमूं, सीकर लोकसभा सीट पर एकमात्र ऐसा विधानसभा क्षेत्र है जहां बीजेपी चुनाव जीती। पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने मोदी लहर के कारण सीकर और झुंझुनूं दोनों सीटें जीती। कांग्रेस सीकर को मजबूत मान कर चली रही है, यही कारण है कि रणनीतिक तौर पर बीजेपी थिंक टैंक ने नरेन्द्र मोदी की सीकर में सभा कराई। मोदी की सभा में युवाओं का जोश दिखा। मोदी - मोदी के नारों से पीएम को अपने संबोधन के वक्त भी परेशानी हुई। 

इस बार दिलचस्प सियासी संयोग:
सीकर और झुंझुनूं की धरती कद्दावर जाट नेताओं की धरती रही है। सीकर का आकर्षण इतना रहा कि चौधरी देवीलाल तक यहां आये। झुंझुनूं के कद्दावर नेता रहे शीशराम ओला, इस बार उनके परिजन को चुनाव में टिकट ना देकर कांग्रेस ने श्रवण कुमार पर दांव खेला। वहीं बीजेपी ने मंडावा विधायक नरेन्द्र कुमार को उतारा। सीकर में कद्दावर कांग्रेस नेता रहे रामदेव सिंह महरिया ने लंबी सियासी पारी खेली। महरिया परिवार के ही सुभाष महरिया बीजेपी में आये केन्द्रीय मंत्री तक बने और अब फिर कांग्रेस में आकर, हाथ के टिकट पर चुनाव लड़ रहे है। महरिया को पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने टिकट नहीं दिया तो वो बागी होकर चुनावी समर में उतरे। दिलचस्प सियासी संयोग देखिये महरिया आज कांग्रेस के टिकट पर चुनावी समर में है और फिर मुकाबला है स्वामी सुमेधानंद से, जिन्हें शेखावाटी में बाबा के नाम से पुकारा जाता है। मोदी की चुनावी सभा कितना असर छोड़ेगी यह चुनाव परिणामों से पता चलेगा। यह जरुर है कि सीकर का चुनाव परिणाम राजनीतिक संदेश देगा। 

... संवाददाता योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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