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जानें कब है मकर संक्रांति की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और इसका महत्‍व

जानें कब है मकर संक्रांति की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और इसका महत्‍व

नई दिल्ली। वैसे तो सारे त्यौहार पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाए जाते हैं, लेकिन मकर संक्रांति की बात ही अलग है। यह त्यौहार अलग-अलग राज्‍यों में अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। हालांकि मकर संक्रांति हर साल 14 जनवरी को मनाई जाती है, लेकिन साल 2012 से इसकी सही तिथि और शुभ मुहूर्त को असमंजस की स्थिति बनी रहती है। 

दरअसल पिछले कुछ सालों में मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी या 15 जनवरी को, इसको लेकर कई तरह की बातें सामने आती हैं। इस साल भी कुछ ऐसी ही स्थिति सामने आ रही है। कई कैलेंडर-पंचांग में मकर संक्रांति की तिथि 14 जनवरी तो कई में 15 जनवरी है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस साल मकर संक्रांति 15 जनवरी को है, क्योंकि सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की शाम 7 बजकर 50 मिनट पर हो रहा है। जबकि कुछ पंचांगों में सूर्य के मकर में प्रवेश का रात 2 बजकर 20 मिनट पर प्रवेश होने का उल्लेख है। शास्त्रों के नियम के अनुसार रात में संक्रांति होने पर अगले दिन संक्रांति मनाई जाती है। इस नियम के अनुसार ही मकर संक्रांति 14 नहीं 15 जनवरी को मनाई जाएगी।

शुभ मुहूर्त पुण्यकाल 

मकर संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को सूर्योदय से प्रारंभ होगा। नियम यह है कि संक्रांति से 6 घंटे पहले और बाद तक पुण्यकाल होता है इसलिए 14 जनवरी को 1 बजकर 26 मिनट से संक्रांति का स्नान दान किया जा सकेगा। सूर्य के उदया तिथि के नियामानुसार 15 जनवरी को भी ब्रह्ममुहूर्त से पूरे दिन संक्रांति का स्नान दान किया जा सकेगा।

मकर संक्रांति का महत्त्व 

ज्योतिषशास्त्र के नियमानुसार सोमवार को संक्रांति होने पर उसे ध्वांक्षी संक्रांति कहते हैं। सोमवार की शाम में ही सूर्य का प्रवेश मकर राशि में हो रहा है इसलिए यह मकर संक्रांति ध्वांक्षी संक्रांति कहलाएगी। इस संक्रांति में दान का बड़ा महत्व बताया है। कहते हैं इस संक्रांति में किया गया दान लोक-परलोक दोनों में ही सुख और समृद्धि प्रदान करता है। सक्रांति अवसर पर स्नान के बाद काले कंबल, ऊनी वस्त्र, जूते, भूमि, स्वर्ण, अन्न का दान कर सकते हैं। इस अवसर पर धार्मिक पुस्तकों का दान भी बहुत पुण्यदायी माना गया है, आप अपनी श्रद्धा के अनुसार रामायण या गीता दान कर सकते हैं।

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नई दिल्ली: कोरोना वायरस और लॉकडाउन की वजह से गुरुवार को रामनवमी का पर्व बिना दर्शनार्थियों के मंदिरों में मनाया गया. भगवान राम की मंदिरों में पूजा आराधना की गई. भगवान राम की जन्मस्थली उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भी घर-घर ही भगवान राम की पूजा आराधना की गई. कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन से हर साल रामनवमी के मौके पर भक्तों की भीड़ से गुलजार रहने वाली रामनगरी इस बार बिल्कुल सूनी है. 

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नहीं हुए मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान
जिले की सीमाएं सील कर दी गई हैं और पूरे जिले में लॉकडाउन है. 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा के बाद धाम की सीमा को भी सील कर दिया गया है. मंदिरों में ना धार्मिक अनुष्ठानों हुए. ना ही विशेष पूजा आराधना. रामनवमी मेले में यह पहली बार है जब सरयू घाट से लेकर मठ-मंदिरों में सन्नाटा पसरा रहा. इसलिए गुरुवार को राम जन्मोत्सव का पर्व सीमित अनुष्ठानों के बीच मठ-मंदिरों में ही मनाया गया. इसके पहले प्रदेश सरकार ने भी लोगों से रामनवमी पर्व घर पर ही मनाने की अपील की थी.

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श्री खोले के हनुमान मंदिर में रामनवमी उत्सव सम्पन्न, दशमी को होगी हवन-पूजा

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जयपुर: श्री नरवर आश्रम सेवा समिति श्री खोले के हनुमान जी मंदिर परिसर में बने श्रीराम मंदिर में गुरूवार को रामनवमी मनाई गई. इसके साथ ही अखण्ड वाल्मिकी रामचरितमानस के पाठ भी सम्पन्न हुए. दशमी के अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार पूर्णाहुति के साथ हवन किया जाएगा. 

भगवान श्रीराम का अभिषेक:
इससे पहले गुरूवार को रामनवमी के अवसर पर सुबह 6 बजे 101 जड़ी-बूटी, विभिन्न तीर्थों से लाए गए जल, पंचामृत तथा दुग्ध से भगवान श्रीराम का अभिषेक किया गया.इसके बाद सुबह 7 बजे हनुमान जी महाराज का दुग्धाभिषेक एवं रूद्री के पाठ का आयोजन किया गया.

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56 भोग की झांकी सजाई गई:
श्री न र व र आश्रम सेवा समिति के महामंत्री बृजमोहन शर्मा ने बताया कि भगवान श्रीराम और हनुमान जी का अभिषेक के बाद सुबह 10 बजे षोडशोपचार पूजा कर श्री सियारामजी को सपरिवार नई पोशाक धारण करवाई और सियाराम मंदिर में 56 भोग की झांकी सजाई गई. जिसके बाद मंदिर पंडितों की ओर से भगवान श्रीराम की आरती की गई. महामंत्री ने बताया कि दशमी को सायंकाल 4 बजे मंत्रोच्चारण के साथ हवन किया जाएगा.

CORONA: रामनवमी आज, बिना दर्शनार्थियों के मंदिरों में मनेगी रामनवमी, भगवान राम की होगी पूजा-आराधना

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जयपुर: कोरोना और लॉकडाउन के बीच मंदिरों में बिना भक्तों के आज रामनवमी का पर्व मनाया जा रहा है. ऐसा कई वर्षो बाद हुआ होगा जब बिना भक्तों के मंदिरों में रामनवमी मनाई जा रही है. मंदिरों में पुजारी ही भगवान रामलला की पूजा आराधना करेंगे. लॉकडाउन और कोरोना के चलते मंदिरों में भक्तों का प्रवेश बंद है. श्री नरवर आश्रम सेवा समिति श्री खोले के हनुमान जी प्रन्यास में रामनवमी के उपलक्ष्य में श्रीराम मंदिर में प्रात: 6 बजे 101 जड़ी-बूटी, विभिन्न तीर्थों से लाए गए जल, पंचामृत तथा दुग्ध से अभिषेक किया जाएगा. 

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रूद्री के पाठ का आयोजन:
इसके पश्चात् प्रात: 7 बजे श्री हनुमान जी महाराज का दुग्धाभिषेक एवं रूद्री के पाठ का आयोजन किया जाएगा. प्रात: 10 बजे षोडशोपचार पूजा के पश्चात् श्री सियारामजी को सपरिवार नई पोशाक धारण कराई जाएगी और 11 बजे सियाराम मंदिर में 56 भोग की झांकी सजाई जाएगी. इसके पश्चात् 11.30 बजे मंदिर पंडितों द्वारा आरती की जाएगी. 

दर्शनार्थियों के लिए बंद:
श्री नरवर आश्रम सेवा समिति के महामंत्री बृजमोहन शर्मा ने बताया कि कोरोना की वजह से पूरे देश में लॉकडाउन है और हनुमान मंदिर भी पिछले 10 दिनों से दर्शनार्थियों के लिए बंद है. जिससे मंदिर पंडितों द्वारा ही हनुमान जी महाराज की नियमित आरती की जा रही है. रामनवमी के अवसर पर भी मंदिर दर्शनार्थियों के लिए बंद रहेगा. मंदिर प्रशासन की ओर से प्रयास किए जा रहे है कि भक्तजन रामनवमी पर ऑनलाईन आरती का लाभ उठा सकें.

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कोरोना वायरस के चलते अष्टमी पर पसरा मंदिरों में सन्नाटा, वीरानी आई नजर

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भरतपुर: कोरोनावायरस के खौफ से जहां पूरा विश्व भयभीत है तो वहीं भगवान के मंदिरों में भी सन्नाटा पसरा हुआ है. नवरात्रा के तहत आज अष्टमी पर्व है और दुर्गा मंदिरों में जहां आज के दिन भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ता था वहां आज वीरानी नजर आई. 

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राजराजेश्वरी देवी मंदिर में पसरा सन्नाटा:     
फर्स्ट इंडिया न्यूज़ की टीम ने भरतपुर के प्राचीन श्री राजराजेश्वरी देवी मंदिर का जायजा लिया तो देखा कि जिस मंदिर में आज मेले जैसा नजारा होना चाहिए था वहां सन्नाटा पसरा हुआ था. माता रानी के दर्शन करने के लिए इक्का-दुक्का भक्त ही मंदिर आ रहे थे और दरवाजे से ही माता रानी को दंडवत कर वापस लौट रहे थे. 

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माता रानी जल्दी ही पूरे विश्व को वायरस से मुक्त करेगी:
फर्स्ट इंडिया न्यूज़ के जरिए आप भी श्री राजराजेश्वरी देवी के दर्शन कर सकते हैं. मंदिर के महंत अजय शर्मा ने फर्स्ट इंडिया न्यूज़ को बताया की कोरोना वायरस के खौफ ने जिंदगी की रफ्तार को रोक दिया है लेकिन उन्हें पूरी उम्मीद है की माता रानी जल्दी ही पूरे विश्व व भारत को इस वायरस से मुक्त करेंगी. महंत अजय शर्मा ने आमजन से अपील की है कि इस गंभीर महामारी से सतर्क व सावधान रहने की आवश्यकता है और इससे बचने के लिए सभी अपने घरों में ही रहे. 

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नई दिल्ली: आज चैत्र नवरात्रि के आठवां दिन है, यह दिन दुर्गाष्टमी के नाम से जाना जाता है. इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा आराधना होती है. आज के दिन माता महागौरी की आराधना करने से व्यक्ति को सौभाग्य की प्राप्ति होती है, साथ ही सुख-समृद्धि में कोई कमी नहीं होती है. वहीं दो अप्रैल को श्रीराम नवमी मनाई जाएगी. अष्टमी, नवमी पर लोग कुल देवी की पूजा करेंगे. कोरोना से बचाव के लिए देशभर में लागू लॉकडाउन के चलते घर से बाहर जाने पर पाबंदी है. 

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सादगी से होगी पूजा:
इसलिए मंदिरों में बिना श्रद्धालुओं के पुजारी ही माता की पूजा करेंगे.इस बार कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के चलते लॉकडाउन की स्थिति है. ऐसे में देवी मंदिरों में पूजा-अर्चना का कार्य सादगी पूर्ण ढंग से किया जा रहा है. ना भक्त होंगे, बस पुजारी ही माता की पूजा आराधना करेंगे. 

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मंदिरों में पूजा अर्चना:
मंदिरों में एक या दो दीप जलाकर पूजा-अर्चना की जा रही है. ऐसे में अष्टमी तिथि पर भी सादगीपूर्ण ढंग से पूजा हो रही है. ऐसे में अष्टमी तिथि पर कन्या भोज के लिए कोई आवश्यक नहीं कि नौ कन्याओं को ही भोज कराया जाए. इसकी जगह नौ कन्याओं के नाम से भी जरूरतमंदों को भोजन कराकर अष्टमी तिथि पर कन्या भोज की रीति निभाई जा सकती है.

बाबा रामदेव का 668 वां जन्मोत्सव, लॉकडाउन की वजह से नहीं होगा कोई कार्यक्रम 

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रामदेवरा: जन-जन के आराध्य लोक देवता बाबा रामदेव का 668 वां जन्मोत्सव रविवार को है. तंवर समाज की भाट बही के मुताबिक बाबा रामदेव का जन्म चैत्र शुक्ला पंचमी को हुआ हैं. इस मौके हर रोज कि तरह रविवार को सिर्फ बाबा रामदेव समाधि का अभिषेक कर पूजा अर्चना के साथ आरती की गई. कोरोना और लॉक डाउन के चलते कोई आयोजन नहीं हैं. बाबा रामदेव समाधि के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए गत 22 मार्च 2020 से कोरोना वायरस के चलते बन्द हैं. 

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667वां जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया:
गत वर्ष पहली बार 10 अप्रैल 2019 शुक्ल पंचमी को बाबा रामदेव का 667वां जन्मोत्सव  हर्षोल्लास के साथ मनाया गया था. बाबा रामदेव जन्मोत्सव समिति का गठन किया गया था. उल्लेखनीय है कि जन-जन के आराध्य लोक देवता बाबा रामदेव का जन्म दिवस तंवर समाज की अधिकृत भाट बही वंशावली के मुताबिक चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को होना उल्लेखनीय है. ऐसे में गत वर्ष पहली बार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी 10 अप्रैल 2019 को बाबा रामदेव का जन्म उत्सव समारोह धूमधाम के साथ मनाया गया. 

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नवरात्रि पंचमी आज, स्कंदमाता की पूजा से मिलेंगे ये लाभ

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जयपुर: नवदुर्गा के पांचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है. स्कन्दमाता की उपासना से बालरूप स्कन्द भगवान् की उपासना स्वयमेव हो जाती है. कार्तिकेय (स्कन्द) की माता होने के कारण इनको स्कंदमाता कहा जाता है. कमल के आसन पर विराजमान होने के कारण से इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है.

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स्कन्दमाता पूजा मंत्र-
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता सशस्विनी।।

स्कंदमाता की पूजा से मिलेंगे ये लाभ:
- स्कंदमाता की पूजा से संतान प्राप्ति में आसानी हो जाती है.
- इसके साथ ही अगर संतान की तरफ से कोई कष्ट हो तो वह भी समाप्त हो जाता है.
- पीले वस्त्र धारण कर पूजा करने से परिणाम अति शुभ मिलता है.
- संकदमाता की पूजा करने से शत्रु पराजित नहीं कर सकता.
- स्कंदमाता की कृपा से व्यक्ति जीवन मरण के चक्र से मुक्त होता है.
- साधना में लीन साधक सिद्धि प्राप्ति के लिए भी मां स्कंदमाता की उपासना करते हैं.

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