मुंबई शादी से बचने के लिए भागीं, हर फिल्म पर मचा बवाल, जानें कौन हैं Kaali Poster Controversy में फंसी Leena Manimekalai

शादी से बचने के लिए भागीं, हर फिल्म पर मचा बवाल, जानें कौन हैं Kaali Poster Controversy में फंसी Leena Manimekalai

शादी से बचने के लिए भागीं, हर फिल्म पर मचा बवाल, जानें कौन हैं Kaali Poster Controversy में फंसी Leena Manimekalai

मुंबई : डॉक्यूमेंट्री फिल्म काली (Kaali) के पोस्टर ने सोशल मीडिया पर जमकर बवाल मचा रखा है. फिल्म मेकर लीना मणिकमेकलई (Leena Manimekalai) इस फिल्म के पोस्टर में मां काली को सिगरेट पीते हैं और हाथ में LGBTQ का झंडा लिए देखा जा रहा है. सोशल मीडिया पर यूजर्स इसका जमकर विरोध करते दिखाई दे रहे हैं. बात इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि इसको लेकर अब भारतीय उच्चायोग ने कनाडा में बयान जारी किया है.  

यह पहली बार नहीं है जब लीना मणिकमेकलई (Leena Manimekalai) इस तरह से विवादों में फंसी है इससे पहले भी उनकी कई फिल्मों पर विवाद हो चुका है.  फिल्मी विवाद के अलावा उन्होंने असल जिंदगी में भी काफी संघर्ष किया है. 

लीना मणिकमेकलई (Leena Manimekalai) मदुरै के गांव महाराजापुरम की रहने वाली हैं. उनके पिता कॉलेज में लेक्चरर थे. वह किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं और उनके गांव की प्रथा के मुताबिक प्यूबर्टी के कुछ साल बाद लड़कियों की शादी कर दी जाती है. जब उन्हें यह पता चला कि घरवाले उनकी शादी की तैयारी कर रहे हैं तो वह चेन्नई भाग निकली. यहां उन्होंने तमिल मैगजीन विकटन में जॉब के लिए अप्लाई किया मैगजीन वालों ने उन्हें इंतजार करने को कहा और घरवालों को इन्फॉर्म कर उन्हें वापस परिवार के सुपुर्द कर दिया. इसके बाद लीना ने अपनी फैमिली को जैसे तैसे कन्वेंस किया और इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने की इच्छा जाहिर की. वह अपने कॉलेज का आखरी साल पूरा कर रही थी और उसी समय उनके पिता की मृत्यु हो गई. उनके पिता ने एक डॉक्टरल थीसिस तमिल डायरेक्टर P Bharathiraja पर लिखी थी जिसे पब्लिश करवाने के लिए वह चेन्नई गई और पहली नजर में उन्हें P Bharathiraja से प्यार हो गया. उनके रिलेशनशिप की खबर आज की तरफ फैल गई जिसके चलते उनकी मां ने खाना पीना बंद कर दिया और उन्हें वापस बुलाया. मां की हालत को देखते हुए उन्होंने सब कुछ छोड़ कर वापस जाने का फैसला लिया. 

कुछ सालों तक बेंगलुरु में आईटी कंपनी में नौकरी करने के बाद उनकी मुलाकात टेली फिल्ममेकर C Jrrold से हुई. इसके बाद उन्होंने अपनी पुरानी जॉब छोड़ दी लेकिन C Jrrold के साथ वह ज्यादा वक्त काम नहीं कर पाईं. आखिरकार उन्होंने फैसला लिया कि वह क्या बनना चाहती हैं. शोषण का शिकार हुए लोगों और सामाजिक मुद्दों की आवाज बनना चाहती थी. साल 2002 में उन्होंने अपनी पहली फिल्म Mathamma पर काम करना शुरू किया.  इसके बाद वह कभी नहीं रुके उन्होंने फ्रीलांसिंग से कमाए गए पैसों को अपनी फिल्मों में लगाया. बहुत सी फैलोशिप जीती और कई इंटरनेशनल फेस्टिवल में उनकी फिल्मों की प्रीमियर हुए. एक वक्त ऐसा भी आया जब उनके पास किराया देने के भी पैसे नहीं थे. क्योंकि उन्होंने सारे पैसे अपने प्रोजेक्ट में लगा दिए थे. 

अपनी फिल्म Mathamma बनाए जाने के बाद उन्हें अरूंधतियार समुदाय के साथ अपने परिवार का विरोध भी देखना पड़ा. वो नहीं रुकी और आगे चल उन्होंने दलित महिलाओं पर आधारित फिल्म Parai बनाई. इस पर भी उन्हें आलोचनाएं मिलीं. 2011 में धनुषकोढ़ी और मछुआरों पर बनाई गई Sengadal के लिए उन्होंने कई महीने सेंसर बोर्ड से लड़ाई की. आखिरकार फिल्म रिलीज हुई और उसे इंटरनेशनल फेस्टिवल में सराहना मिली. अब एक बार फिर वो काली के पोस्टर को लेकर विवादों में हैं.

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