मॉब लिंचिंग पर आजीवन कारावास, ऑनर किलिंग पर फांसी की सजा

Naresh Sharma Published Date 2019/07/31 09:22

जयपुर: राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने मॉब लिंचिंग और ऑनर किलिंग की घटनाओं पर अंकुश लगाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने मंगलवार को राजस्थान विधानसभा में विशेष बिल पेश किया है, जिसमें मॉब लिंचिंग और ऑनर किलिंग के आरोपियों के लिए आजीवन कारावास, मृत्युदंड और पांच लाख रुपए तक के जुर्माने का भी प्रावधान है. 

अलवर मॉब लिंचिंग केस में देशभर में बदनाम: 
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में बजट बहस का जवाब देते हुए कहा था कि मॉब लिंचिंग और ऑनर किलिंग जैसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और जल्द ही इस बारे में कानून बनाया जाएगा. अपने वादे के मुताबिक गहलोत कैबिनेट ने इन बिल पर मुहर लगा दी और मंगलवार को संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने सदन में दोनो बिल पेश किए. बजट सत्र के दौरान ही अब कानून बन जायेंगे. गौरतलब है कि राजस्थान अप्रैल 2017 में अलवर मॉब लिंचिंग केस में देशभर में बदनाम हो चुका है. इसमें भीड़ ने पेहलू खान को गोतस्करी के शक में पीट-पीटकर मार डाला था. 

सख्त सजा का प्रावधान: 
राजस्थान सरकार की ओर से पेश किए गए बिल में लिंचिंग को विस्तार से परिभाषित किया गया है. साथ ही यह भी प्रावधान रखा गया है कि मॉब लिंचिंग के मामलों की जांच इंस्पेक्टर से नीची रैंक का पुलिस अधिकारी नहीं करेगा. मॉब लिंचिंग बिल के प्रावधानों के तहत पुलिस महानिदेशक की ओर से राज्य समन्वयक नियुक्त किया जाएगा. इसके अलावा प्रत्येक एसपी जिला समन्वयक होंगे. इस तरह के मामलों में चोट लगने पर आरोपी को सात साल की सजा और एक लाख तक के जुर्माने, गंभीर चोट लगने की स्थिति में 10 साल तक की सजा और 25 हजार से तीन लाख तक का जुर्माने तथा मौत हो जाने पर आजीवन कारावास और एक लाख से पांच लाख तक के जुर्माने का प्रावधान है. भीड़ हिंसा के मामलों में पीड़ित को चोट लगने की स्थिति में दोषी को अधिकतम 10 साल तक का कारावास व तीन लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकेगा.  इसके अनुसार, भीड़ हिंसा की घटनाओं का षडयंत्र रचने, षडयंत्र रचने में शामिल होने या घटना में शामिल होने पर भी 10 साल जेल की सजा का प्रावधान होगा. 

प्रेम विवाह करने वालो के लिए भी बनेना कानून: 
वही पहले सरकार ने अब प्रेम विवाह करने वालों के लिए भी हरिद्वार की तरह काम करने का फैसला किया है. सरकार ने फैसला किया है कि अब प्रेम विवाह करने वाले जोड़े को इज्जत के नाम पर नहीं मारा जा सकता इस बारे में भी अब कानून बनाया जा रहा है. इज्जत के नाम पर खाप पंचायत चढ़ने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा और अगर कोई व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह प्रेम विवाह करने वालों का सामाजिक बहिष्कार करने की घोषणा करती है तो उनको भी अपराध की श्रेणी में माना जाए साथी प्रेमी जोड़े से मारपीट करने या हत्या करने पर आजीवन कारावास व फांसी की सजा तक का प्रावधान किया गया. 

मॉब लिंचिंग पर प्रतिबंध लगाना जरूरी: 
मुख्यमंत्री का मानना है कि भीड़ इकट्ठा होकर किसी भी इंसान की जान कैसे ले सकती है. ऐसे में मॉब लिंचिंग पर प्रतिबंध लगाना जरूरी है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि ओनर के नाम पर प्रेम विवाह करने वालों को सजा देना बिल्कुल सही नहीं है और अब प्रदेश में ऐसा नहीं होने दिया जाएगा गहलोत ने ट्विटर पर पोस्ट डाल कर कहा कि दोनों ही तरह के कानूनों में कड़े प्रावधान किए गए हैं और इन कानून के कारण प्रदेश में मॉब लिंचिंग ऑनर किलिंग जैसी घटनाओं पर रोक लगेगी. 

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